Tuesday, October 16, 2018
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UP Election 2017

Varun Gandhi creating problem for BJP in up election

 

Lucknow.

बीजेपी को यूपी की जंग जिताने के लिए मोदी-शाह की जोड़ी ने जहां पूरा जोर लगा रखा है वहीं बीजेपी के अपने ‘गांधी’ हानिकारक साबित होते दिख रहे हैं. हम बात कर रहे हैं वरुण गांधी की. चुनाव प्रचार के दौरान वे यूपी में मौन रहे लेकिन चौथे चरण के मतदान के ठीक पहले इंदौर में वरुण गांधी कांग्रेस नेता के कार्यक्रम में शामिल हुए. वहां वरुण ने बयानों के ऐसे तीर छोड़े जो बीजेपी और मोदी सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकती है. यूपी के चुनावी समर में राहुल और अखिलेश के बाद वरुण का नंबर तीसरे पायदान पर आता है और इस वजह से कुछ लोग इन्हें यूपी का तीसरा लड़का भी कहते हैं. आखिर क्या है वरुण की पार्टी में नाराजगी की वजह?
चुप्पी तोड़ी, मोदी सरकार की दुखती रग पर रखा हाथ
पीलीभीत के सांसद और बीजेपी के युवा नेता वरुण गांधी ने अपनी लंबी चुप्पी तोड़ दी है. वो मंगलवार को इंदौर के एक स्कूल में ‘विचार नए भारत का’ का विषय पर बोलने के लिए पहुंचे थे. इस विषय पर बोलते हुए वरुण गांधी ने हर उस विषय पर अपनी बात रखी जिसपर अबतक केंद्र की मोदी सरकार विपक्षी पार्टियों से घिरती रही है. वरुण गांधी ने हैदराबाद के दलित पीएचडी छात्र रोहित वेमुला की आत्महत्या, अल्पसंख्यकों की बढ़ती मुश्किलें, किसानों की आत्महत्या और विजय माल्या का विदेश भाग जाना सहित बढ़ती जीडीपी की हकीकत के बारे में भी अपनी बात रखी. ऐसा माना जा रहा है कि ये सारे के सारे वो मुद्दे हैं जिनपर केंद्र की बेजेपी सरकार घिरती रही है. राजनीतिक पंडितों की मानें तो वरूण अपने बयान से यूपी में बीजेपी लिए मुश्किलों की दीवार खड़ी कर रहे हैं.

‘वरुण गांधी स्वतंत्र विचार रखते है, RSS का बैकग्राउंड नहीं’
जानकार ऐसा कहते हैं कि वरुण गांधी का आरएसएस से कोई जुड़ाव नहीं है. वो मुद्दों पर स्वतंत्र राय भी रखते हैं. पार्टी की कमान जब राजनाथ सिंह के हाथों में थी तो वरुण की स्थिति पार्टी में अच्छी थी. लेकिन जैसे ही पार्टी की कमान अमित शाह के हाथों में गई वरुण गांधी को पार्टी से किनारा किया जाने लगा. कुछ महीनों पहले एक न्यूज वेबसाइट से बात करते हुए राजनीतिक विश्लेषक अभय कुमार दुबे ने कहा था, ’वरुण गांधी की संघ की पृष्ठभूमि नहीं है. वह स्वतंत्र रूप से सोचने वाले व्यक्ति हैं. मोदी और शाह की बीजेपी उत्तर प्रदेश में किसी मज़बूत नेतृत्व को विकसित नहीं करना चाहती है.’
खुद को पार्टी में किनारा किए जाने से हैं दुखी
नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने और अमित शाह के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद से ही वरुण गांधी को पार्टी में किनारा किया जाने लगा. 2014 में बीजेपी ने वरुण को राष्ट्रीय महासचिव के पद से हटा दिया था. 12 जून 2016 को इलाहाबाद में बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के दौरान वरुण ने पार्टी नेताओं के सामने शक्ति प्रदर्शन करने की कोशिश की जो अमित शाह और मोदी को रास नहीं आई. पार्टी ने इस विधानसभा चुनाव में बड़ी संख्या में उन लोगों के टिकट काटे जो किसी न किसी तरह से वरुण गांधी के करीबी थे. पार्टी ने उन्हें स्टार प्रचारकों के अपने पहले लिस्ट में शामिल नहीं किया. दूसरे लिस्ट में वरुण का नाम सामने आया. इसे भी नाराजगी की वजह माना जा रहा है. कहने वाले तो यह भी कहते हैं कि वरुण बहुत पहले से पार्टी छोड़ने का मन बना चुके हैं. ऐसे में वरुण गांधी यूपी चुनाव के दौरान हर वो काम कर सकते हैं जिससे पार्टी कमजोर हो.
बीजेपी भी वरुण को नहीं मानती अपना
जैसे ही पार्टी की कमान राजनाथ सिंह से अमित शाह के पास आई वैसे ही पार्टी में वरुण गांधी की स्थिति बदलने लगी. पार्टी में उनका कद घटने लगा. राजनीति की समझ रखने वाले बताते हैं कि वरुण के साथ ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि उनके नाम में ‘गांधी’ लगा है. अमित शाह और नरेंद्र मोदी इस नाम के साथ सहज नहीं है. वरुण गांधी भी इस बात को जानते हैं. जब नरेंद्र मोदी केंद्र में जीतकर आए और पार्टी अमित शाह के हाथ में गई तभी वरुण को लगने लगा था कि उनकी अहमियत पार्टी में कम हो जाएगी. बीजेपी वरुण गांधी को ‘गांधी परिवार’ का ही एक हिस्सा मानते हैं. इसका एक और सबूत है- सात जनवरी को बीजेपी के फेसबुक अकाउंट से एक वीडियो अपलोड हुआ. इस वीडियो में यह बताया गया कि नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री हैं फिर भी उनके भाई, चाचा या दूसरे संबंधी गरीबी में रह रहे हैं या कोई छोटा-मोटा काम करके अपना जीवन चला रहे हैं लेकिन दूसरी तरह ऐसे परिवार हैं जिनका हर सदस्य सत्ता की मलाई खा रहा है. इस वीडियो में एक ग्राफिक्स के जरिए गांधी परिवार की वंशावली दिखाई गई और वरुण गांधी को उसी परिवार का सदस्य बताया गया.
अपने इलाके में प्रभावी हैं वरुण
यूपी के इस चुनाव में 45 उम्मीदवारों के टिकट इस वजह से कटे हैं कि वो वरुण के करीबी हैं. ये सारे के सारे उम्मीदवार निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं. जाहिर है कि इससे पार्टी को नुकसान होगा. ये सारे के सारे बीजेपी के विधायक हैं. इन उम्मीदवारों को चुनाव जीतवाने के लिए वरुण पूरी कोशिश कर रहे हैं. यह भी माना जाता है कि वरुण गांधी इन इलाकों में खासे प्रभावी हैं.

लखनऊ.
यूपी विधानसभा चुनाव 2017 को लेकर कांग्रेस ने बुधवार को अपना घोषणा पत्र जारी कर दिया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और यूपी चुनाव प्रभारी गुलाम नबी आजाद ने घोषणा पत्र के मुख्य बिंदुओं को बताते हुए कहा कि अगर सपा-कांग्रेस गठबंधन की सरकासर यूपी में आती है तो किसानों के जीवन को बेहतर बनाने का काम किया जाएगा। इसके साथ ही पंचायत में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण दिया जाएगा। कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता जैसे अशोक गहलोत, सलमान खुर्शीद निर्मल खत्री और प्रमोद तिवारी मौके पर मौजूद रहे।
घोषणा पत्र के मुख्य बिंदु…
हर जिले में महिला थाने का गठन करेंगे
लड़कियों की शिक्षा के लिए काम करेंगे
महिला सशक्तिकरण पर फोकस
हर वर्ग को मिलेगा बराबरी का हक
किसानों का कर्ज माफ किया जाएगा
जेलों में सुधार किया जाएगा
रोजगार को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय के अधीन एक अलग प्रकोष्ठ बनाया जाएगा
बिजली दर को सस्‍ता करने का काम किया जाएगा
अल्‍पसंख्यकों के कल्‍याण पर फोकस किया जाएगा

Bjp will take action against leaders who object party decisions

लखनऊ।

“जबरा मारे रोने न दे” ये मुहावरा भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश के नीति निर्धारकों पर समयानुसार सटीक बैठ रहा है।प्रत्याशी चयन में जिम्मेदार लोगों पर धन उगाही जैसे गंभीर आरोपों पर चुप्पी साध लिया नेतृत्व मौका पाते ही अनुशासन की आड़ में बदले की कार्यवाही की रूप -रेखा तैयार कर लिया है।

पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व प्रदेश प्रभारी ओम माथुर ने मीडिया के माध्यम से सन्देश भेजा है कि चुनाव में भीतरघात और चुप्पी साधे कार्यकर्ताओं पर उनकी नजर है। माना जा रहा है कि माथुर ने कार्यकर्ताओं को यह सन्देश देकर आक्रोश का तापमान मापने की कोशिश की है।साथ ही तमाम धांधली के आरोपों को दरकिनार कर चुनाव में पार्टी प्रत्याशियों के समर्थन में न निकलने वालों की लिस्ट बनाने की बात करके उपेक्षित किये गए कार्यकर्ताओं को दबाव में लेने की कोशिश की गयी है।

यदि ऐसा है तो नेताओं के अहंकारी रवैये से यूपी विधानसभा चुनाव परिणाम में भाजपा को लेने को देने पड़ सकते हैं। चुनावी रणनीति में पार्टी में महाबली बन कर उभरे प्रदेश महामंत्री संगठन सुनील बंसल द्धारा सार्वजानिक तौर से रूठों को समझाने का पार्टी अब तक कोई सकारात्मक प्रचार नहीं करती नहीं दिख पा रही हैं।

भाजपा मामलों के जानकर वरिष्ठ पत्रकार आरपी सिंह के अनुसार भाजपा नेतृत्व समायोजन का लालच देकर या हंटर दिखा कर यूपी के कार्यकर्ताओं को सक्रिया नहीं कर पायेगा। टिकट वितरण के समय कार्यकर्ताओं को अकड़ दिखाने वाले नेता यदि समय रहते आहत नेताओं से याचक बन कर संपर्क करेंगे तो पार्टी की स्थिति में गुणात्मक सुधार होगा नहीं तो फिर सरकार ढूंढते रह जायेंगे।

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BJP releases Fourth List of Candidates for Uttar Pradesh Assembly Election 2017 News in Hindi

नई दिल्ली। भाजपा ने यूपी चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की चौथी लिस्ट जारी की है। इसमें कुल नौ सीटों के लिए उम्मीदवारों के नामों का उल्लेख किया गया है। सबसे महत्त्वपूर्ण पूर्वांचल के भदोही और ज्ञानपुर की सीटों के उम्मीदवारों के नाम हैं जहां से पार्टी ने क्रमशः रविन्द्र तिवारी और महेंद्र बांध को टिकट दिया गया है। इन दोनों ही सीटों पर सातवें चरण में मत डाले जाएंगे।
इसके अलावा पार्टी ने बीकापुर से शोभा सिंह, बलिया नगर से आनन्द शुक्ला, बैरिया से सुरेंद्र सिंह, मुगल सराय से साधना सिंह, सकलडीहा से सूर्यभान तिवारी, सैयदराजा से सुशील सिंह और मरिहान से रामशंकर पटेल को टिकट दिया है।

अब जब कि पहले चरण के चुनाव के लिए पांच दिन ही रह गए हैं, सभी पार्टियों का चुनाव अपने शबाब पर है। इस लिहाज से पार्टी कार्यकर्ता इसे टिकटों के वितरण में देरी मान रहे हैं। स्वाभाविक रूप से अब इन प्रत्याशियों को प्रचार के लिए अपेक्षाकृत कम समय मिलेगा।
पार्टी अभी भी कई सीटों पर अपना फैसला नहीं ले पायी है। यह माना जा रहा है कि कुछ सीटों पर उसकी सहयोगी पार्टियों का दबाव काम कर रहा है जिसकी वजह से बीजेपी अभी तक अपने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा नहीं कर पायी है। इसमें अपना दल का नाम सबसे आगे हैं। केंद्र सरकार में मंत्री अनुप्रिया पटेल भी बीजेपी के इसी रुख से नाराज बताई जा रही हैं कि बीजेपी ने उसके कोटे की सीटों पर अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं।

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