Friday, October 19, 2018
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Supreme Court

Samajwadi Party leader Gayatri Prajapati should be booked for gangrape: Supreme Court to UP police

नई दिल्ली।

अमेठी विधानसभा से सपा उम्मीदवार और मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने एक महिला की ओर दुष्कर्म की शिकायत पर प्रदेश सरकार को एफआइआर दर्ज करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार से इस संबंध में आठ सप्ताह में स्टेटस रिपोर्ट भी मांगी है। अमेठी में 27 फरवरी को मतदान होना है।

न्यायमूर्ति एके सीकरी की अध्यक्षता वाली पीठ ने शुक्रवार को एक महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए ये आदेश दिए। इससे पहले महिला की ओर से पेश वकील महमूद प्राचा ने आरोप लगाया कि उनकी मुवक्किल के साथ प्रजापति और उनके साथियों ने कई बार दुष्कर्म किया। उसकी बेटी के साथ भी छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न हुआ। प्रदेश के डीजीपी तक से शिकायत होने के बावजूद पुलिस ने एफआइआर दर्ज नहीं की।

प्रदेश सरकार की ओर से पेश वकील रवि प्रकाश मेहरोत्र ने कहा कि पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया और जांच की गई। इस जांच की सारी रिपोर्ट हलफनामे के साथ दाखिल की गई है। मामला तीन साल पुराना है। देरी से शिकायत करने का कारण शिकायतकर्ता नहीं बता पाई। ये मामला चुनाव के दौरान राजनीति से प्रेरित लगता है।

वर्तमान में दिल्ली में रह रही महिला ने प्रजापति और उनके साथियों पर 2013 और 2016 में सामूहिक दुष्कर्म और बेटी से यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। जान को खतरा बताते हुए सुरक्षा भी मांगी है। कोर्ट ने गत 25 नवंबर को नोटिस जारी किया था और याचिकाकर्ता को सुरक्षा देने का भी आदेश दिया था।

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VK Sasikala Likely To Surrender In Bengaluru Today

10 करोड़ का जुर्माना भी लगाया तत्काल सरेंडर करने का आदेश

दस साल चुनाव नहीं लड़ पाएंगी अन्नाद्रमुक महासचिव शशिकला

नई दिल्ली।

अन्नाद्रमुक प्रमुख वीके शशिकला का राजनीतिक भविष्य शुरू होने से पहले ही खत्म हो गया। तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनने का ख्वाब देख रही शशिकला को अब जेल जाना होगा। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में शशिकला व उनके दो रिश्तेदारों वीएन सुधाकरण और जे. इलावरसी को बरी करने का कर्नाटक हाई कोर्ट का फैसला रद कर दिया। तीनों को भ्रष्टाचार के जुर्म में चार-चार साल की कैद व दस-दस करोड़ रुपये जुर्माने की सजा पर मुहर लगा दी।

कोर्ट ने तीनों को तत्काल सरेंडर करने को कहा है। भ्रष्टाचार के अपराध में दोषी होने के कारण शशिकला 10 साल चुनाव नहीं लड़ सकेंगी। कानूनन सजा पूरी होने के छह साल बाद तक चुनाव नहीं लड़ सकते हैं। जयललिता की मृत्यु हो जाने के कारण कोर्ट ने उनके खिलाफ मामला खत्म कर दिया है। यह ऐतिहासिक फैसला न्यायमूर्ति पीसी घोष व न्यायमूर्ति अमिताव रॉय की पीठ ने सुनाया। कोर्ट ने कर्नाटक सरकार और डीएमके नेता के. अनबजगन की अपीलें स्वीकार करते हुए कर्नाटक हाई कोर्ट का 11 मई 2015 का आदेश रद कर दिया।

हाई कोर्ट ने चारों को बरी कर दिया था। जबकि बेंगलुरु की ट्रायल कोर्ट ने भ्रष्टाचार में सभी को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी। शशिकला शुरुआत में छह महीने जेल में रही हैं। ऐसे में उन्हें तीन साल छह महीने तक जेल में रहना में होगा।

संपत्ति हड़पने के लिए थे साथ

कोर्ट ने यहां तक कहा कि सभी अभियुक्त जयललिता की संपत्ति हथियाने की साजिश के तहत ही खून का रिश्ता न होते हुए भी उनके साथ घर पर रहते थे। एक खाते से दूसरे खाते में पैसे के लेनदेन से साबित होता है कि ये जयललिता की गैरकानूनी कमाई को कंपनियों के नाम संपत्ति खरीदने में खपाने की साजिश थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट के दिये कारणों से वह पूरी तरह सहमत है।

120 साल पुराना था मामला

इन सभी पर आरोप थे कि जयललिता के पहले मुख्यमंत्रित्व काल (1991-1996) में 66.65 करोड़ की संपत्ति जुटाई। इनमें 53.60 करोड़ की संपत्ति आय के स्नोतों से अधिक पाई गई। 1996 में तत्कालीन जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रण्यम स्वामी ने यह मुकदमा दर्ज कराया था।

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नई दिल्ली।

सुप्रीम कोर्ट की सात वरिष्ठतम न्यायाधीशों की पीठ ने अपने अभूतपूर्व आदेश में कलकत्ता हाई कोर्ट के सिटिंग जज जस्टिस सीएस कर्नन को अवमानना नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न उन पर अवमानना की कार्यवाही की जाए। इतना ही नहीं कोर्ट ने जस्टिस कर्नन को तत्काल प्रभाव से न्यायिक और प्रशासनिक काम छोड़ने का निर्देश देते हुए अगली सुनवाई पर निजी तौर पर पेश होने का भी आदेश दिया है।

इतिहास में यह पहला मौका है जब सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के किसी सिटिंग जज को अवमानना नोटिस जारी किया है।1सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस कर्नन द्वारा प्रधानमंत्री और अन्य लोगों को लिखे पत्रों पर स्वत: संज्ञान लेकर अवमानना पर सुनवाई शुरू की है। पत्रों में जस्टिस कर्नन ने सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के वर्तमान और सेवानिवृत्त 20 न्यायाधीशों पर कथित तौर पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं।

इस मामले पर मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली सात वरिष्ठतम न्यायाधीशों की पीठ ने सुनवाई की और आदेश जारी किया। जस्टिस खेहर के अलावा पीठ में न्यायमूर्ति दीपक मिश्र, न्यायमूर्ति जे. चेल्मेश्वर, न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर, न्यायमूर्ति पीसी घोष और न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ शामिल हैं।

करीब आधे घंटे सुनवाई चली में अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने जस्टिस कर्नन के खिलाफ अवमानना नोटिस जारी करने और उनसे न्यायिक और प्रशासनिक कामकाज वापस लिए जाने की अपील की। उन्हें सुनने के बाद कोर्ट ने जस्टिस कर्नन को कारण बताओ नोटिस जारी किया। कोर्ट ने जस्टिस कर्नन से कहा है कि वे तत्काल प्रभाव से न्यायिक और प्रशासनिक कार्य छोड़ दें और सभी फाइलें कलकत्ता हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को तुरंत वापस करें। कर्नन को नोटिस का 13 फरवरी तक जवाब देना है। कोर्ट ने रजिस्ट्री को आदेश दिया कि वह इस आदेश की कॉपी और उन पत्रों को जिन पर कोर्ट ने संज्ञान लिया है आज ही जस्टिस कर्नन को भेजना सुनिश्चित करें।

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