Thursday, December 13, 2018
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contempt notice

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नई दिल्ली।

सुप्रीम कोर्ट की सात वरिष्ठतम न्यायाधीशों की पीठ ने अपने अभूतपूर्व आदेश में कलकत्ता हाई कोर्ट के सिटिंग जज जस्टिस सीएस कर्नन को अवमानना नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न उन पर अवमानना की कार्यवाही की जाए। इतना ही नहीं कोर्ट ने जस्टिस कर्नन को तत्काल प्रभाव से न्यायिक और प्रशासनिक काम छोड़ने का निर्देश देते हुए अगली सुनवाई पर निजी तौर पर पेश होने का भी आदेश दिया है।

इतिहास में यह पहला मौका है जब सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के किसी सिटिंग जज को अवमानना नोटिस जारी किया है।1सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस कर्नन द्वारा प्रधानमंत्री और अन्य लोगों को लिखे पत्रों पर स्वत: संज्ञान लेकर अवमानना पर सुनवाई शुरू की है। पत्रों में जस्टिस कर्नन ने सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के वर्तमान और सेवानिवृत्त 20 न्यायाधीशों पर कथित तौर पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं।

इस मामले पर मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली सात वरिष्ठतम न्यायाधीशों की पीठ ने सुनवाई की और आदेश जारी किया। जस्टिस खेहर के अलावा पीठ में न्यायमूर्ति दीपक मिश्र, न्यायमूर्ति जे. चेल्मेश्वर, न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर, न्यायमूर्ति पीसी घोष और न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ शामिल हैं।

करीब आधे घंटे सुनवाई चली में अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने जस्टिस कर्नन के खिलाफ अवमानना नोटिस जारी करने और उनसे न्यायिक और प्रशासनिक कामकाज वापस लिए जाने की अपील की। उन्हें सुनने के बाद कोर्ट ने जस्टिस कर्नन को कारण बताओ नोटिस जारी किया। कोर्ट ने जस्टिस कर्नन से कहा है कि वे तत्काल प्रभाव से न्यायिक और प्रशासनिक कार्य छोड़ दें और सभी फाइलें कलकत्ता हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को तुरंत वापस करें। कर्नन को नोटिस का 13 फरवरी तक जवाब देना है। कोर्ट ने रजिस्ट्री को आदेश दिया कि वह इस आदेश की कॉपी और उन पत्रों को जिन पर कोर्ट ने संज्ञान लिया है आज ही जस्टिस कर्नन को भेजना सुनिश्चित करें।

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