Friday, October 19, 2018
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Sarojninagar constituency of Lucknow is important for all political parties

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के सरोजनीनगर के चुनावी दंगल में कई बड़ों की साख दांव पर लगी है। सपा के टिकट पर उतरे अनुराग यादव की वजह से अब इस सीट से सीएम की प्रतिष्ठा भी दांव पर है। वहीं, दूसरी तरफ स्वाति सिंह की वजह से बीजेपी मुखिया अमित शाह का भरोसा भी दांव पर है। बसपा के टिकट पर दोबारा चुनाव मैदान में उतरे शिव शंकर उर्फ शंकरी सिंह के सामने पिछले चुनाव में मिली हार को जीत में बदलने की चुनौती है।

वहीं पिछले चुनाव में करीब 41 हजार वोट हासिल करने वाले निर्दलीय रुद्रदमन सिंह बब्लू भी बीजेपी से बगावत कर चुनाव मैदान में कूद पड़े हैं। उनके पास अब खुद को साबित करने का मौका है। फिलहाल इन चारों उम्मीदारों के मजबूती से चुनाव में उतरने से सरोजनी नगर का चुनाव काफी रोचक हो गया है। यहां कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है।

सरोजनीनगर विधान सभा सीट पर चुनावी मुकाबला काफी रोचक होने जा रहा है। इस सीट पर प्रत्याशियों के साथ उनके आकाओं की प्रतिष्ठा भी जुड गयी है। अनुराग सांसद धर्मेन्द्र यादव के बड़े भाई हैं। अनुराग पूरी ताकत से मैदान में अड़े हैं। बीजेपी के टिकट पर उतरीं स्वाती सिंह का पूरा राजनीतिक करियर करीब छह महीने का है। उनके पति दयाशंकर सिंह भाजपा से जुड़े रहे हैं। स्वाति सिंह पहली बार जनता के सामने आयीं। उनके कड़े तेवर, सधी व सीधी बात ने उन्हें बीजेपी का नेता बना दिया।

अब वह सरोजनी नगर से मजबूती से चुनाव लड़ रही हैं। बसपा के टिकट पर यहां चुनाव लड़ रहे शिव शंकर सिंह उर्फ शंकरी सिंह 2012 के चुनाव में अपनी दमदारी दिखा चुके हैं। पिछले चुनाव में उन्हें अचानक मैदान में उतारा गया था लेकिन इस बार वह पांच वर्षों से क्षेत्र में डटे हुए हैं। इस सीट पर उनके खुद के साथ पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की भी साख जुड़ी है। उन्हें चुनाव में किसी से कम नहीं आंका जा रहा है। निर्दलीय चुनाव में उतरे रुद्र दमन सिंह बब्लू इस बार बीजेपी से टिकट मांग रहे थे।

चुनाव से पहले बीजेपी में भी शामिल हो गए थे। पार्टी ने टिकट नहीं दिया तो बगावत कर फिर निर्दलीय मैदान में उतर गए। वर्ष 2012 का चुनाव भी उन्होंने निर्दलीय लड़ा था। उस चुनाव में उन्हें करीब 41386 वोट मिले थे। फिलहाल इस सीट पर चारों प्रत्याशी बड़ी मजबूती से मैदान में डटे हैं। इसीलिए यहां का चुनाव रोचक मोड़ पर पहुंच गया है। पहले सपा के टिकट से क्षेत्र से विधायक रहे शारदा प्रताप शुक्ला यहां से रालोद से मैदान में हैं।

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All parties pin hopes of capturing power in Uttar Pradesh on the support of Muslim voters

बाराबंकी। मतदान का समय नजदीक आता जा रहा है और साथ ही विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां तेज होती जा रही हैं। 19 फरवरी को होने वाले तीसरे चरण के मतदान पर सभी की निगाहें टिकी हुई। आखिर इस बार के चुनाव में मुस्लिम मतदाताओं का रुझान किस ओर होगा। चुनाव में सबसे अधिक निर्णायक वोटरों में शामिल मुस्लिम मतदाताओं की खामोशी ने सभी राजनीतिक दलों के दिल की धड़कनें बढ़ा दी हैं।

जिस तरह चुनाव प्रचार के दौरान सभी राजनीतिक दलों के प्रत्याशी सबकी समस्याओं का समाधान करवाने और क्षेत्र को स्वर्ग बनाने के सपने दिखाकर वोट मांग रहे है। ठीक उसी तरह मतदाता भी सभी प्रत्याशियों का समर्थन करने का आश्वासन देते नजर आ रहे हैं। लेकिन अब तक मतदाताओं का रुझान किस ओर है, इस बात की जानकारी नहीं मिल पा रही है। सबसे खास बात यह है कि मुस्लिम मतदाताओं का रुझान भी पता नहीं चल पा रहा है। जबकि सबको अच्छी तरह मालूम है कि जनपद की छह विधानसभाओं में से पांच विधानसभाओं में मुस्लिम मतदाता सर्वाधिक है।

उनका समर्थन जिस किसी भी पार्टी को मिलेगा, उसके प्रत्याशी का जीतना तय है। बाराबंकी जनपद की हैदरगढ़ विधानसभा को छोड़कर बाकी अन्य पांच विधानसभा कुर्सी, सदर, जैदपुर रामनगर और दरियाबाद की सीटों पर मुस्लिम वोट सत्ता का खेल बनाने-बिगाड़ने में हर बार अहम भूमिका निभाते हैं। जबकि इस बार के विधानसभा चुनाव में अब तक मुस्लिमों का रुख पूरी तरह साफ नहीं है। इस बार के चुनाव में कहीं सपा-कांग्रेस गंठबंधन तो कहीं बसपा उनकी पसंद बनती दिख रही है।

वहीं कुछ सीटों पर पीस पार्टी और अन्य मुस्लिम समर्थित पार्टी भी मुस्लिम वोटों की दावेदारी में लगा हुआ है। इन सभी विधानसभा सीटों पर उनके वोटों का बंटवारा हो या एकजुटता दिखे, दोनों ही स्थिति में चुनावी नतीजे प्रभावित होना तय है। हालांकि भाजपा इन सीटों में हिंदू मतों के ध्रुवीकरण की आस संजोए बैठी है। तो वहीं सपा, कांग्रेस-बसपा के अलावा अन्य राजनीतिक दल अपने परंपरागत वोटों के साथ ही मुस्लिम मतों को सहेजने में जुटी हुई है। हालांकि कुछ जगहों पर मुस्लिमों का रुझान साफ है, लेकिन मतदान की तारीख नजदीक आ जाने के बावजूद भी ज्यादातर सीटों पर मुलिम मतदाताओं ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं।

गौरतलब है कि मुस्लिमों की सियासत में सक्रिय नेता भी उनके वोट के सवाल पर बंटे हुए हैं। हर व्यक्ति अलग-अलग नजरिये से मुस्लिमों के लाभ और नुकसान का आंकड़ा मालूम करने में जुटा हुआ है। इसलिए उनकी तरफ से भी मतदाताओं की उलझनों को सुलझाने का कोई निर्णायक जवाब नहीं मिल पा रहा है। नतीजतन अभी भी मुस्लिम मतदाता किस पार्टी को वोट देंगे, इसको लेकर वोटर किसी निर्णायक स्थिति में नहीं पहुंचे हैं।

BJP Change his Master Plan in UP Election after First Phase News in Hindi

लखनऊ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वर्ष 2014 में ही यूपी के राजनीतिक महत्व का पता चल गया था। उन्हें विधानसभा चुनावों की अहमियत भी मालूम है। लिहाजा मोदी की टीम कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही है। चुनाव प्रचार से लेकर बूथ मैनेजमेंट तक हर अभियान हाईटेक तरीके से चल रहा है। भाजपा के रणनीतिकार हरचंद कोशिश में हैं कि मतदान के हर चरण में विरोधियों को शिकस्त दी जाए। इसलिए भाजपा के फ्रंटल संगठनों से लेकर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की समस्त अनुषांगिक इकाइयां चुनावी समर में आरपार की लड़ाई लड़ रही हैं।

मोदी की जरूरत है यूपी

वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों में यूपी की जनता ने मोदी की मन मांगी मुराद पूरी कर दी थी। विधानसभा चुनावों में भी मोदी की मुराद कुलाचे मार रही है। उन्हें पता है कि दिल्ली का रास्ता लखनऊ से होकर ही जाता है। इसलिए यूपी में भाजपा का सत्ता से वनवास तोड़ना बेहद जरूरी है। इसलिए मोदी की नजर 403 विधानसभा वाली यूपी पर है। हालांकि राजनीतिक प्रेक्षक इस चुनावों को अभी से 2019 के आम चुनाव के पहले लोगों में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के प्रति लगाव के टेस्ट के रूप में भी देखा जा रहा है। चुनाव से पहले ही सभी दल अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं और साथ ही गठबंधनों से बने नए समीकरणों पर जीत हार तय होने की भी चर्चा है। सर्वाधिक जनसंख्या वाला राज्य और वोटरों की संख्या भी इस राज्य में सबसे ज्यादा है। यूपी की राजनीति में भाजपा काफी लंबे समय से सत्ता से बाहर है। भाजपा इससे उबरने के लिए इस बार भी मोदी लहर के सहारे है। 2014 के आम चुनाव में पार्टी को मोदी लहर का ऐसा फायदा मिला था कि राज्य की 80 लोकसभा में से पार्टी को 71 सीटों पर कामयाबी मिली थी।

मौका नहीं छोड़ना चाहते मोदी

दरअसल भाजपा के लिए यूपी का चुनाव जीतना प्रतिष्ठा की जंग बन गया है। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोई भी अवसर हाथ से नहीं गवाना चाहते। पार्टी के भगवाधारी नेता हिंदू कार्ड चलाने से नहीं चूक रहे हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान से पहले विवादास्पद राममंदिर के मुद्दे को को एक बार फिर से उठाया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि अगर भाजपा की पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनती है तो अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण किया जाएगा। 1992 से 2000 तक राम भाजपा की राजनीति के केंद्र में रहे हैं।

पिछड़े वाटों पर है मोदी की नजर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछड़ों-अतिपिछड़ों को भाजपा से जोड़ने की चुनाव पूर्व मुहिम चलाई। राजनीति के जानकारों का कहना है कि वोट बैंक की दृष्टि से प्रदेश में अतिपिछड़ी जातियों का सबसे बड़ा वोट बैंक है। शायद यही कारण है कि 43 फीसदी से अधिक गैर यादव पिछड़ों में कुर्मी, लोधी, जाट, गूजर, सोनार, गोसाई, कलवार, अरक आदि की 10.22 फीसदी और मल्लाह, केवट, कुम्हार, गड़ेरिया, काछी, कोयरी, सैनी, राजभर, चौहान, नाई, भुर्जी, तेली आदि 33.34 फीसदी संख्या वाली अत्यंत पिछड़ी हिस्सेदारी वाले इस वोट बैंक पर मोदी की नजर है। समाजवादी पार्टी ने जहां 17 अतिपिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने के मुद्दे को तूल देने का काम किया है तो बसपा अतिपिछड़ों को काडर कैंप के जरिए अपने पाले में करने की कोशिश में है।

भाजपा ने उछाला अतिपिछड़ों को विशेष आरक्षण का मुद्दा

यूपी की सत्ता पर काबिज होने की खातिर ही भाजपा ने अति पिछड़ों को 7.5 फीसदी विशेष आरक्षण कोटा देने व सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट लागू करने का मुद्दा उछालने का काम किया है। उत्तर प्रदेश में सत्ता में वापसी का भरोसा जताते हुए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कहा है कि उनकी पार्टी अकेले ही राज्य में अगली सरकार बनाएगी क्योंकि सपा-कांग्रेस गठबंधन को करारी शिकस्त मिलेगी। वह अखिलेश-राहुल के गठबंधन पर कहते हैं कि अगर सपा चुनाव जीतने को लेकर निश्चिंत होती तो वह कांग्रेस के साथ गठबंधन क्यों हाथ मिलाती। सपा ने गठबंधन इसलिए किया क्योंकि चुनाव में इसके नेताओं की हार प्रत्याशित थी।

लखनऊ.
यूपी विधानसभा चुनाव 2017 को लेकर कांग्रेस ने बुधवार को अपना घोषणा पत्र जारी कर दिया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और यूपी चुनाव प्रभारी गुलाम नबी आजाद ने घोषणा पत्र के मुख्य बिंदुओं को बताते हुए कहा कि अगर सपा-कांग्रेस गठबंधन की सरकासर यूपी में आती है तो किसानों के जीवन को बेहतर बनाने का काम किया जाएगा। इसके साथ ही पंचायत में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण दिया जाएगा। कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता जैसे अशोक गहलोत, सलमान खुर्शीद निर्मल खत्री और प्रमोद तिवारी मौके पर मौजूद रहे।
घोषणा पत्र के मुख्य बिंदु…
हर जिले में महिला थाने का गठन करेंगे
लड़कियों की शिक्षा के लिए काम करेंगे
महिला सशक्तिकरण पर फोकस
हर वर्ग को मिलेगा बराबरी का हक
किसानों का कर्ज माफ किया जाएगा
जेलों में सुधार किया जाएगा
रोजगार को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय के अधीन एक अलग प्रकोष्ठ बनाया जाएगा
बिजली दर को सस्‍ता करने का काम किया जाएगा
अल्‍पसंख्यकों के कल्‍याण पर फोकस किया जाएगा

poster war between BJP and SP congress in UP Election 2017

लखनऊ. यूपी में विधानसभा चुनाव के लिए हर पार्टियां अपनी ताकत झोंके हुए हैं। हर कोई अपने विरोधियों को मात देने में लगा हुआ है। प्रचार भी हाईटेक हो गया है। सोशल मीडिया चुनाव प्रचार में एक अहम मंच देता है। शायद इसी को ध्यान में रखते हुए यूपी चुनाव में बीजेपी समर्थकों की ओर से सपा के स्लोगन के जवाब में एक नया स्लोगन और पोस्टर जारी किया गया है।

यूपी को ये साथ पसंद है
समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के गठबंधन के बाद राहुल गांधी और अखिलेश यादव की फोटो के साथ यूपी को ये साथ पसंद है, के नाम से पोस्टर और स्लोगन जारी किया गया था, जिसके जरिए मतदाताओं को ये संदेश देने की कोशिश की गई थी कि लोगों को अखिलेश और राहुल का साथ पसंद है। इसकी चर्चा सपा की जनसभाओं में भी खुब होता है।

यूपी को ये 7 पसंद है
वहीं बीजेपी ने भी इसका जवाब अब निकाल लिया है। सोशल मीडिया में पिछले एक नया पोस्टर वायरल होने लगा है और नारा है यूपी को ये 7 पसंद है। बीजेपी समर्थकों ने इस पोस्टर को राहुल और अखिलेश के जबाब में निकाला है जिसमें पीएम मोदी के साथ सात नेताओं की तस्वीरें लगी हैं और नारे के तौर पर लिखा है यूपी को ये 7 पसंद है। यह बीजेपी की ओर से सपा को करारा जवाब है। कांग्रेस के गठबंधन के बाद राहुल गांधी और अखिलेश यादव की फोटो के साथ यूपी को ये साथ पसंद है्य के नाम से पोस्टर और स्लोगन जारी किया गया था। इसको सपा और कांग्रेस दोनों पार्टियों ने काफी प्रमुखा भी दिया। समर्थकों ने भी इसका खूब प्रचार और प्रसार किया है।

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PM Narendra Modi Said SP BSP Congress is scam for UP

लखनऊ.  उत्तर प्रदेश के विकास के लिए इसे स्कैम मुक्त करना जरूरी है। जनता को तय करना पड़ेगा कि उसे स्कैम चाहिए या विकास। नौजवानों को रोजगार के लिए स्कैम को दरकिनार करना ही पड़ेगा। परिवारवाद में फंसी सूबे की समाजवादी पार्टी सरकार प्रदेश का विकास नहीं कर सकती। यह बातें राज्य विधानसभा चुनाव में प्रचार अभियान की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेरठ में आयोजित विजय संकल्प रैली में कहीं। प्रधानमंत्री ने कहा कि स्कैम का मतलब, एस से समाजवादी, सी से कांग्रेस, ए से अखिलेश और एम का मतलब मायावती है।

स्कैम से यूपी बेहाल
उन्होंने कहा कि सपा और बसपा ने राज्य को बेहाल कर दिया है। मोदी ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ मेरी लड़ाई जारी रहेगी। जब तक मैं हूं चैन से नहीं बैठूंगा और न ही लुटेरों को बैठने दूंगा। भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई रुकने वाली नहीं है। मैं ताकतवर लोगों से लड़ रहा हूं, मोहल्ले की कुश्ती नहीं। देश को बेइमानों से मुक्ति दिलाने के लिए भाजपा को आर्शीवाद दीजिए।प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्य के विकास के लिए स्कैम से मुक्ति पाना जरूरी है।

स्कैम से बचने के लिए परिवर्तन जरूरी
उन्होंने स्कैम के खेल को हमेशा के लिए नेस्तनाबूद करने के लिए वोट का सही प्रयोग करने की अपील की और कहा कि राज्य में खुशहाली के लिए परिवर्तन लाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार का आलम यहां तक पहुंच गया है कि कर्नाटक के एक मंत्री के यहां 150 करोड़ रुपए बरामद हुए लेकिन शर्म की बात है कि कांग्रेस ने उसे अभी तक मंत्री बनाकर रखा है। कांग्रेस पता नहीं किस मुंह से भ्रष्टाचार खत्म करने की बात करती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी लड़ाई भ्रष्टाचार, गुंडाराज, बहन-बेटियों की इज्जत लूटने वालों को शरण देने वालों के खिलाफ है। यह लड़ाई वह अंतिम दम तक जारी रखेंगे।

रोजी-रोटी के चक्कर में यूपी से हो रहा पलायन
उन्होंने कहा कि इस राज्य के पास अकूत प्राकृतिक संपदा और काम करने वाले मजबूत हाथ हैं, फिर भी रोजी-रोटी के चक्कर में नौजवानों को यहां से पलायन करना पड़ रहा है। ढाई साल में केंद्र सरकार ने गरीबों, किसानों, महिलाओं, शोषित और पीड़ितों के लिए काफी काम किया, लेकिन अभी भी बहुत कुछ करना है। उन्हें यूपी का कर्ज चुकाना है, लेकिन इसके लिए बाधा डालने वाली राज्य सरकार को हटाना ही पडेगा।

यूपी के लिए दिल्ली से आई योजनाएं लखनऊ में रूक जाती हैं
दिल्ली से चली योजनाएं लखनऊ में लटक जाती हैं। प्रधानमंत्री ने स्वास्थ्य, शिक्षा और आवास की केंद्रीय योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि हमने बड़ी रकम भेजी लेकिन राज्य सरकार पैसे खर्च नहीं करना चाहती थी। राज्य सरकार की नीयत में खोट है, इसलिए विकास के अलावा उनका ध्यान अन्य चीजों पर है।

एक दूसरे को कोसने वाले गले मिले
मोदी ने सपा-कांग्रेस गठबंधन पर चुटकी ली और कहा कि एक दूसरे को हर समय कोसने वालों को बताना चाहिए कि रातों रात ऐसा क्या हो गया कि गले मिल गए। कांग्रेस उपाध्यक्ष ने प्रदेश में यात्रा निकालकर सपा सरकार पर कई आरोप लगाए थे। कानून व्यवस्था को चैपट करार दिया था। राज्य सरकार को लुटेरा बताया गया था। मोदी ने कहा कि राजनीतिक गठबंधन कई बार हुए हैं लेकिन यह पहला ऐसा गठबंधन है जिसमें एक-दूसरे को खत्म करने का मौका नहीं छोड़ने वाले गले मिल गए हैं।

2022 तक हर गरीब को मिलेगा घरा
उन्होंने कहा कि उनकी नीति और नीयत दोनों साफ हैं। वह 2022 तक हर गरीब को घर देना चाहते हैं। यूपी के भाग्य को बदलने के लिए यहां की सरकार को बदलना ही होगा। प्रधानमंत्री ने दावा किया कि जिन प्रदेशों में भाजपा की सरकारें हैं वहां एक पैसा भी किसानों का बकाया नहीं है।

BSP congress samajwadi party MLA join BJP

लखनऊ. यूपी में अगले साल विधानसभ चुनाव से पहले पाला बदलने का खेल शुरू हो गया है। कल ही कांग्रेस और एसपी के चार विधायकों ने बीएसपी का दामन थामा था आज अलग-अलग पार्टियों के 7 विधायक बीजेपी में शामिल हो गए हैं।

ये लोग बीजेपी में हुए शामिल
बसपा के बाला प्रसाद अवस्थी और राजेश त्रिपाठी बीजेपी में शामिल हुुए हैं। वहीं, कांग्रेस के संजय जायसवाल, विजय दुबे, माधुरी वर्मा और सपा के शेर बहादुर भी बीजेपी में शामिल हो गए हैं। हालांकि, सपा के रामपाल अभी तक बीजेपी दफ्तर नहीं पहुंचे हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि रामपाल मौके पर पाला बदल सकते हैं।

सपा विधायक बसपा में शामिल
बुधवार को कांग्रेस के तीन विधायक और समाजवादी पार्टी के एक विधायक बीएसपी में शामिल हुए। बीएसपी में शामिल होने वाले ये सभी विधायक मुसलमान हैं। कांग्रेस के मोहम्मद मुस्लिम, नवाब काजिम अली खान, दिलनवाज खान और समाजवादी पार्टी के नवाजिश आलम खान हाथ और साइकिल छोड़ हाथी पर सवार हुए।

दलित और मुस्लिम गठजोड़ में लगी बसपा
खास बात ये है कि जैसे-जैसे चुनाव के दिन करीब आ रहे हैं बीएसपी दलित और मुस्लिम गठजोड़ की तरफ बढ़ रही है। परंपरगत तौर पर ब्राह्मण बीएसपी के समर्थक रहे हैं। ऐसे में मायावती की कोशिश मुस्लिम, दलित और ब्राह्मण को साथ लाने की है। यूपी में 21 फीसदी दलित, 20 फीसदी मुसलमान हैं।

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