Friday, October 19, 2018
Tags Posts tagged with "BJP"

BJP

Varun Gandhi creating problem for BJP in up election

 

Lucknow.

बीजेपी को यूपी की जंग जिताने के लिए मोदी-शाह की जोड़ी ने जहां पूरा जोर लगा रखा है वहीं बीजेपी के अपने ‘गांधी’ हानिकारक साबित होते दिख रहे हैं. हम बात कर रहे हैं वरुण गांधी की. चुनाव प्रचार के दौरान वे यूपी में मौन रहे लेकिन चौथे चरण के मतदान के ठीक पहले इंदौर में वरुण गांधी कांग्रेस नेता के कार्यक्रम में शामिल हुए. वहां वरुण ने बयानों के ऐसे तीर छोड़े जो बीजेपी और मोदी सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकती है. यूपी के चुनावी समर में राहुल और अखिलेश के बाद वरुण का नंबर तीसरे पायदान पर आता है और इस वजह से कुछ लोग इन्हें यूपी का तीसरा लड़का भी कहते हैं. आखिर क्या है वरुण की पार्टी में नाराजगी की वजह?
चुप्पी तोड़ी, मोदी सरकार की दुखती रग पर रखा हाथ
पीलीभीत के सांसद और बीजेपी के युवा नेता वरुण गांधी ने अपनी लंबी चुप्पी तोड़ दी है. वो मंगलवार को इंदौर के एक स्कूल में ‘विचार नए भारत का’ का विषय पर बोलने के लिए पहुंचे थे. इस विषय पर बोलते हुए वरुण गांधी ने हर उस विषय पर अपनी बात रखी जिसपर अबतक केंद्र की मोदी सरकार विपक्षी पार्टियों से घिरती रही है. वरुण गांधी ने हैदराबाद के दलित पीएचडी छात्र रोहित वेमुला की आत्महत्या, अल्पसंख्यकों की बढ़ती मुश्किलें, किसानों की आत्महत्या और विजय माल्या का विदेश भाग जाना सहित बढ़ती जीडीपी की हकीकत के बारे में भी अपनी बात रखी. ऐसा माना जा रहा है कि ये सारे के सारे वो मुद्दे हैं जिनपर केंद्र की बेजेपी सरकार घिरती रही है. राजनीतिक पंडितों की मानें तो वरूण अपने बयान से यूपी में बीजेपी लिए मुश्किलों की दीवार खड़ी कर रहे हैं.

‘वरुण गांधी स्वतंत्र विचार रखते है, RSS का बैकग्राउंड नहीं’
जानकार ऐसा कहते हैं कि वरुण गांधी का आरएसएस से कोई जुड़ाव नहीं है. वो मुद्दों पर स्वतंत्र राय भी रखते हैं. पार्टी की कमान जब राजनाथ सिंह के हाथों में थी तो वरुण की स्थिति पार्टी में अच्छी थी. लेकिन जैसे ही पार्टी की कमान अमित शाह के हाथों में गई वरुण गांधी को पार्टी से किनारा किया जाने लगा. कुछ महीनों पहले एक न्यूज वेबसाइट से बात करते हुए राजनीतिक विश्लेषक अभय कुमार दुबे ने कहा था, ’वरुण गांधी की संघ की पृष्ठभूमि नहीं है. वह स्वतंत्र रूप से सोचने वाले व्यक्ति हैं. मोदी और शाह की बीजेपी उत्तर प्रदेश में किसी मज़बूत नेतृत्व को विकसित नहीं करना चाहती है.’
खुद को पार्टी में किनारा किए जाने से हैं दुखी
नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने और अमित शाह के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद से ही वरुण गांधी को पार्टी में किनारा किया जाने लगा. 2014 में बीजेपी ने वरुण को राष्ट्रीय महासचिव के पद से हटा दिया था. 12 जून 2016 को इलाहाबाद में बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के दौरान वरुण ने पार्टी नेताओं के सामने शक्ति प्रदर्शन करने की कोशिश की जो अमित शाह और मोदी को रास नहीं आई. पार्टी ने इस विधानसभा चुनाव में बड़ी संख्या में उन लोगों के टिकट काटे जो किसी न किसी तरह से वरुण गांधी के करीबी थे. पार्टी ने उन्हें स्टार प्रचारकों के अपने पहले लिस्ट में शामिल नहीं किया. दूसरे लिस्ट में वरुण का नाम सामने आया. इसे भी नाराजगी की वजह माना जा रहा है. कहने वाले तो यह भी कहते हैं कि वरुण बहुत पहले से पार्टी छोड़ने का मन बना चुके हैं. ऐसे में वरुण गांधी यूपी चुनाव के दौरान हर वो काम कर सकते हैं जिससे पार्टी कमजोर हो.
बीजेपी भी वरुण को नहीं मानती अपना
जैसे ही पार्टी की कमान राजनाथ सिंह से अमित शाह के पास आई वैसे ही पार्टी में वरुण गांधी की स्थिति बदलने लगी. पार्टी में उनका कद घटने लगा. राजनीति की समझ रखने वाले बताते हैं कि वरुण के साथ ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि उनके नाम में ‘गांधी’ लगा है. अमित शाह और नरेंद्र मोदी इस नाम के साथ सहज नहीं है. वरुण गांधी भी इस बात को जानते हैं. जब नरेंद्र मोदी केंद्र में जीतकर आए और पार्टी अमित शाह के हाथ में गई तभी वरुण को लगने लगा था कि उनकी अहमियत पार्टी में कम हो जाएगी. बीजेपी वरुण गांधी को ‘गांधी परिवार’ का ही एक हिस्सा मानते हैं. इसका एक और सबूत है- सात जनवरी को बीजेपी के फेसबुक अकाउंट से एक वीडियो अपलोड हुआ. इस वीडियो में यह बताया गया कि नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री हैं फिर भी उनके भाई, चाचा या दूसरे संबंधी गरीबी में रह रहे हैं या कोई छोटा-मोटा काम करके अपना जीवन चला रहे हैं लेकिन दूसरी तरह ऐसे परिवार हैं जिनका हर सदस्य सत्ता की मलाई खा रहा है. इस वीडियो में एक ग्राफिक्स के जरिए गांधी परिवार की वंशावली दिखाई गई और वरुण गांधी को उसी परिवार का सदस्य बताया गया.
अपने इलाके में प्रभावी हैं वरुण
यूपी के इस चुनाव में 45 उम्मीदवारों के टिकट इस वजह से कटे हैं कि वो वरुण के करीबी हैं. ये सारे के सारे उम्मीदवार निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं. जाहिर है कि इससे पार्टी को नुकसान होगा. ये सारे के सारे बीजेपी के विधायक हैं. इन उम्मीदवारों को चुनाव जीतवाने के लिए वरुण पूरी कोशिश कर रहे हैं. यह भी माना जाता है कि वरुण गांधी इन इलाकों में खासे प्रभावी हैं.

Sarojninagar constituency of Lucknow is important for all political parties

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के सरोजनीनगर के चुनावी दंगल में कई बड़ों की साख दांव पर लगी है। सपा के टिकट पर उतरे अनुराग यादव की वजह से अब इस सीट से सीएम की प्रतिष्ठा भी दांव पर है। वहीं, दूसरी तरफ स्वाति सिंह की वजह से बीजेपी मुखिया अमित शाह का भरोसा भी दांव पर है। बसपा के टिकट पर दोबारा चुनाव मैदान में उतरे शिव शंकर उर्फ शंकरी सिंह के सामने पिछले चुनाव में मिली हार को जीत में बदलने की चुनौती है।

वहीं पिछले चुनाव में करीब 41 हजार वोट हासिल करने वाले निर्दलीय रुद्रदमन सिंह बब्लू भी बीजेपी से बगावत कर चुनाव मैदान में कूद पड़े हैं। उनके पास अब खुद को साबित करने का मौका है। फिलहाल इन चारों उम्मीदारों के मजबूती से चुनाव में उतरने से सरोजनी नगर का चुनाव काफी रोचक हो गया है। यहां कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है।

सरोजनीनगर विधान सभा सीट पर चुनावी मुकाबला काफी रोचक होने जा रहा है। इस सीट पर प्रत्याशियों के साथ उनके आकाओं की प्रतिष्ठा भी जुड गयी है। अनुराग सांसद धर्मेन्द्र यादव के बड़े भाई हैं। अनुराग पूरी ताकत से मैदान में अड़े हैं। बीजेपी के टिकट पर उतरीं स्वाती सिंह का पूरा राजनीतिक करियर करीब छह महीने का है। उनके पति दयाशंकर सिंह भाजपा से जुड़े रहे हैं। स्वाति सिंह पहली बार जनता के सामने आयीं। उनके कड़े तेवर, सधी व सीधी बात ने उन्हें बीजेपी का नेता बना दिया।

अब वह सरोजनी नगर से मजबूती से चुनाव लड़ रही हैं। बसपा के टिकट पर यहां चुनाव लड़ रहे शिव शंकर सिंह उर्फ शंकरी सिंह 2012 के चुनाव में अपनी दमदारी दिखा चुके हैं। पिछले चुनाव में उन्हें अचानक मैदान में उतारा गया था लेकिन इस बार वह पांच वर्षों से क्षेत्र में डटे हुए हैं। इस सीट पर उनके खुद के साथ पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की भी साख जुड़ी है। उन्हें चुनाव में किसी से कम नहीं आंका जा रहा है। निर्दलीय चुनाव में उतरे रुद्र दमन सिंह बब्लू इस बार बीजेपी से टिकट मांग रहे थे।

चुनाव से पहले बीजेपी में भी शामिल हो गए थे। पार्टी ने टिकट नहीं दिया तो बगावत कर फिर निर्दलीय मैदान में उतर गए। वर्ष 2012 का चुनाव भी उन्होंने निर्दलीय लड़ा था। उस चुनाव में उन्हें करीब 41386 वोट मिले थे। फिलहाल इस सीट पर चारों प्रत्याशी बड़ी मजबूती से मैदान में डटे हैं। इसीलिए यहां का चुनाव रोचक मोड़ पर पहुंच गया है। पहले सपा के टिकट से क्षेत्र से विधायक रहे शारदा प्रताप शुक्ला यहां से रालोद से मैदान में हैं।

0 187

All parties pin hopes of capturing power in Uttar Pradesh on the support of Muslim voters

बाराबंकी। मतदान का समय नजदीक आता जा रहा है और साथ ही विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां तेज होती जा रही हैं। 19 फरवरी को होने वाले तीसरे चरण के मतदान पर सभी की निगाहें टिकी हुई। आखिर इस बार के चुनाव में मुस्लिम मतदाताओं का रुझान किस ओर होगा। चुनाव में सबसे अधिक निर्णायक वोटरों में शामिल मुस्लिम मतदाताओं की खामोशी ने सभी राजनीतिक दलों के दिल की धड़कनें बढ़ा दी हैं।

जिस तरह चुनाव प्रचार के दौरान सभी राजनीतिक दलों के प्रत्याशी सबकी समस्याओं का समाधान करवाने और क्षेत्र को स्वर्ग बनाने के सपने दिखाकर वोट मांग रहे है। ठीक उसी तरह मतदाता भी सभी प्रत्याशियों का समर्थन करने का आश्वासन देते नजर आ रहे हैं। लेकिन अब तक मतदाताओं का रुझान किस ओर है, इस बात की जानकारी नहीं मिल पा रही है। सबसे खास बात यह है कि मुस्लिम मतदाताओं का रुझान भी पता नहीं चल पा रहा है। जबकि सबको अच्छी तरह मालूम है कि जनपद की छह विधानसभाओं में से पांच विधानसभाओं में मुस्लिम मतदाता सर्वाधिक है।

उनका समर्थन जिस किसी भी पार्टी को मिलेगा, उसके प्रत्याशी का जीतना तय है। बाराबंकी जनपद की हैदरगढ़ विधानसभा को छोड़कर बाकी अन्य पांच विधानसभा कुर्सी, सदर, जैदपुर रामनगर और दरियाबाद की सीटों पर मुस्लिम वोट सत्ता का खेल बनाने-बिगाड़ने में हर बार अहम भूमिका निभाते हैं। जबकि इस बार के विधानसभा चुनाव में अब तक मुस्लिमों का रुख पूरी तरह साफ नहीं है। इस बार के चुनाव में कहीं सपा-कांग्रेस गंठबंधन तो कहीं बसपा उनकी पसंद बनती दिख रही है।

वहीं कुछ सीटों पर पीस पार्टी और अन्य मुस्लिम समर्थित पार्टी भी मुस्लिम वोटों की दावेदारी में लगा हुआ है। इन सभी विधानसभा सीटों पर उनके वोटों का बंटवारा हो या एकजुटता दिखे, दोनों ही स्थिति में चुनावी नतीजे प्रभावित होना तय है। हालांकि भाजपा इन सीटों में हिंदू मतों के ध्रुवीकरण की आस संजोए बैठी है। तो वहीं सपा, कांग्रेस-बसपा के अलावा अन्य राजनीतिक दल अपने परंपरागत वोटों के साथ ही मुस्लिम मतों को सहेजने में जुटी हुई है। हालांकि कुछ जगहों पर मुस्लिमों का रुझान साफ है, लेकिन मतदान की तारीख नजदीक आ जाने के बावजूद भी ज्यादातर सीटों पर मुलिम मतदाताओं ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं।

गौरतलब है कि मुस्लिमों की सियासत में सक्रिय नेता भी उनके वोट के सवाल पर बंटे हुए हैं। हर व्यक्ति अलग-अलग नजरिये से मुस्लिमों के लाभ और नुकसान का आंकड़ा मालूम करने में जुटा हुआ है। इसलिए उनकी तरफ से भी मतदाताओं की उलझनों को सुलझाने का कोई निर्णायक जवाब नहीं मिल पा रहा है। नतीजतन अभी भी मुस्लिम मतदाता किस पार्टी को वोट देंगे, इसको लेकर वोटर किसी निर्णायक स्थिति में नहीं पहुंचे हैं।

BJP Change his Master Plan in UP Election after First Phase News in Hindi

लखनऊ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वर्ष 2014 में ही यूपी के राजनीतिक महत्व का पता चल गया था। उन्हें विधानसभा चुनावों की अहमियत भी मालूम है। लिहाजा मोदी की टीम कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही है। चुनाव प्रचार से लेकर बूथ मैनेजमेंट तक हर अभियान हाईटेक तरीके से चल रहा है। भाजपा के रणनीतिकार हरचंद कोशिश में हैं कि मतदान के हर चरण में विरोधियों को शिकस्त दी जाए। इसलिए भाजपा के फ्रंटल संगठनों से लेकर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की समस्त अनुषांगिक इकाइयां चुनावी समर में आरपार की लड़ाई लड़ रही हैं।

मोदी की जरूरत है यूपी

वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों में यूपी की जनता ने मोदी की मन मांगी मुराद पूरी कर दी थी। विधानसभा चुनावों में भी मोदी की मुराद कुलाचे मार रही है। उन्हें पता है कि दिल्ली का रास्ता लखनऊ से होकर ही जाता है। इसलिए यूपी में भाजपा का सत्ता से वनवास तोड़ना बेहद जरूरी है। इसलिए मोदी की नजर 403 विधानसभा वाली यूपी पर है। हालांकि राजनीतिक प्रेक्षक इस चुनावों को अभी से 2019 के आम चुनाव के पहले लोगों में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के प्रति लगाव के टेस्ट के रूप में भी देखा जा रहा है। चुनाव से पहले ही सभी दल अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं और साथ ही गठबंधनों से बने नए समीकरणों पर जीत हार तय होने की भी चर्चा है। सर्वाधिक जनसंख्या वाला राज्य और वोटरों की संख्या भी इस राज्य में सबसे ज्यादा है। यूपी की राजनीति में भाजपा काफी लंबे समय से सत्ता से बाहर है। भाजपा इससे उबरने के लिए इस बार भी मोदी लहर के सहारे है। 2014 के आम चुनाव में पार्टी को मोदी लहर का ऐसा फायदा मिला था कि राज्य की 80 लोकसभा में से पार्टी को 71 सीटों पर कामयाबी मिली थी।

मौका नहीं छोड़ना चाहते मोदी

दरअसल भाजपा के लिए यूपी का चुनाव जीतना प्रतिष्ठा की जंग बन गया है। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोई भी अवसर हाथ से नहीं गवाना चाहते। पार्टी के भगवाधारी नेता हिंदू कार्ड चलाने से नहीं चूक रहे हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान से पहले विवादास्पद राममंदिर के मुद्दे को को एक बार फिर से उठाया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि अगर भाजपा की पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनती है तो अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण किया जाएगा। 1992 से 2000 तक राम भाजपा की राजनीति के केंद्र में रहे हैं।

पिछड़े वाटों पर है मोदी की नजर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछड़ों-अतिपिछड़ों को भाजपा से जोड़ने की चुनाव पूर्व मुहिम चलाई। राजनीति के जानकारों का कहना है कि वोट बैंक की दृष्टि से प्रदेश में अतिपिछड़ी जातियों का सबसे बड़ा वोट बैंक है। शायद यही कारण है कि 43 फीसदी से अधिक गैर यादव पिछड़ों में कुर्मी, लोधी, जाट, गूजर, सोनार, गोसाई, कलवार, अरक आदि की 10.22 फीसदी और मल्लाह, केवट, कुम्हार, गड़ेरिया, काछी, कोयरी, सैनी, राजभर, चौहान, नाई, भुर्जी, तेली आदि 33.34 फीसदी संख्या वाली अत्यंत पिछड़ी हिस्सेदारी वाले इस वोट बैंक पर मोदी की नजर है। समाजवादी पार्टी ने जहां 17 अतिपिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने के मुद्दे को तूल देने का काम किया है तो बसपा अतिपिछड़ों को काडर कैंप के जरिए अपने पाले में करने की कोशिश में है।

भाजपा ने उछाला अतिपिछड़ों को विशेष आरक्षण का मुद्दा

यूपी की सत्ता पर काबिज होने की खातिर ही भाजपा ने अति पिछड़ों को 7.5 फीसदी विशेष आरक्षण कोटा देने व सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट लागू करने का मुद्दा उछालने का काम किया है। उत्तर प्रदेश में सत्ता में वापसी का भरोसा जताते हुए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कहा है कि उनकी पार्टी अकेले ही राज्य में अगली सरकार बनाएगी क्योंकि सपा-कांग्रेस गठबंधन को करारी शिकस्त मिलेगी। वह अखिलेश-राहुल के गठबंधन पर कहते हैं कि अगर सपा चुनाव जीतने को लेकर निश्चिंत होती तो वह कांग्रेस के साथ गठबंधन क्यों हाथ मिलाती। सपा ने गठबंधन इसलिए किया क्योंकि चुनाव में इसके नेताओं की हार प्रत्याशित थी।

Bjp will take action against leaders who object party decisions

लखनऊ।

“जबरा मारे रोने न दे” ये मुहावरा भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश के नीति निर्धारकों पर समयानुसार सटीक बैठ रहा है।प्रत्याशी चयन में जिम्मेदार लोगों पर धन उगाही जैसे गंभीर आरोपों पर चुप्पी साध लिया नेतृत्व मौका पाते ही अनुशासन की आड़ में बदले की कार्यवाही की रूप -रेखा तैयार कर लिया है।

पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व प्रदेश प्रभारी ओम माथुर ने मीडिया के माध्यम से सन्देश भेजा है कि चुनाव में भीतरघात और चुप्पी साधे कार्यकर्ताओं पर उनकी नजर है। माना जा रहा है कि माथुर ने कार्यकर्ताओं को यह सन्देश देकर आक्रोश का तापमान मापने की कोशिश की है।साथ ही तमाम धांधली के आरोपों को दरकिनार कर चुनाव में पार्टी प्रत्याशियों के समर्थन में न निकलने वालों की लिस्ट बनाने की बात करके उपेक्षित किये गए कार्यकर्ताओं को दबाव में लेने की कोशिश की गयी है।

यदि ऐसा है तो नेताओं के अहंकारी रवैये से यूपी विधानसभा चुनाव परिणाम में भाजपा को लेने को देने पड़ सकते हैं। चुनावी रणनीति में पार्टी में महाबली बन कर उभरे प्रदेश महामंत्री संगठन सुनील बंसल द्धारा सार्वजानिक तौर से रूठों को समझाने का पार्टी अब तक कोई सकारात्मक प्रचार नहीं करती नहीं दिख पा रही हैं।

भाजपा मामलों के जानकर वरिष्ठ पत्रकार आरपी सिंह के अनुसार भाजपा नेतृत्व समायोजन का लालच देकर या हंटर दिखा कर यूपी के कार्यकर्ताओं को सक्रिया नहीं कर पायेगा। टिकट वितरण के समय कार्यकर्ताओं को अकड़ दिखाने वाले नेता यदि समय रहते आहत नेताओं से याचक बन कर संपर्क करेंगे तो पार्टी की स्थिति में गुणात्मक सुधार होगा नहीं तो फिर सरकार ढूंढते रह जायेंगे।

0 88

BJP releases Fourth List of Candidates for Uttar Pradesh Assembly Election 2017 News in Hindi

नई दिल्ली। भाजपा ने यूपी चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की चौथी लिस्ट जारी की है। इसमें कुल नौ सीटों के लिए उम्मीदवारों के नामों का उल्लेख किया गया है। सबसे महत्त्वपूर्ण पूर्वांचल के भदोही और ज्ञानपुर की सीटों के उम्मीदवारों के नाम हैं जहां से पार्टी ने क्रमशः रविन्द्र तिवारी और महेंद्र बांध को टिकट दिया गया है। इन दोनों ही सीटों पर सातवें चरण में मत डाले जाएंगे।
इसके अलावा पार्टी ने बीकापुर से शोभा सिंह, बलिया नगर से आनन्द शुक्ला, बैरिया से सुरेंद्र सिंह, मुगल सराय से साधना सिंह, सकलडीहा से सूर्यभान तिवारी, सैयदराजा से सुशील सिंह और मरिहान से रामशंकर पटेल को टिकट दिया है।

अब जब कि पहले चरण के चुनाव के लिए पांच दिन ही रह गए हैं, सभी पार्टियों का चुनाव अपने शबाब पर है। इस लिहाज से पार्टी कार्यकर्ता इसे टिकटों के वितरण में देरी मान रहे हैं। स्वाभाविक रूप से अब इन प्रत्याशियों को प्रचार के लिए अपेक्षाकृत कम समय मिलेगा।
पार्टी अभी भी कई सीटों पर अपना फैसला नहीं ले पायी है। यह माना जा रहा है कि कुछ सीटों पर उसकी सहयोगी पार्टियों का दबाव काम कर रहा है जिसकी वजह से बीजेपी अभी तक अपने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा नहीं कर पायी है। इसमें अपना दल का नाम सबसे आगे हैं। केंद्र सरकार में मंत्री अनुप्रिया पटेल भी बीजेपी के इसी रुख से नाराज बताई जा रही हैं कि बीजेपी ने उसके कोटे की सीटों पर अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं।

poster war between BJP and SP congress in UP Election 2017

लखनऊ. यूपी में विधानसभा चुनाव के लिए हर पार्टियां अपनी ताकत झोंके हुए हैं। हर कोई अपने विरोधियों को मात देने में लगा हुआ है। प्रचार भी हाईटेक हो गया है। सोशल मीडिया चुनाव प्रचार में एक अहम मंच देता है। शायद इसी को ध्यान में रखते हुए यूपी चुनाव में बीजेपी समर्थकों की ओर से सपा के स्लोगन के जवाब में एक नया स्लोगन और पोस्टर जारी किया गया है।

यूपी को ये साथ पसंद है
समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के गठबंधन के बाद राहुल गांधी और अखिलेश यादव की फोटो के साथ यूपी को ये साथ पसंद है, के नाम से पोस्टर और स्लोगन जारी किया गया था, जिसके जरिए मतदाताओं को ये संदेश देने की कोशिश की गई थी कि लोगों को अखिलेश और राहुल का साथ पसंद है। इसकी चर्चा सपा की जनसभाओं में भी खुब होता है।

यूपी को ये 7 पसंद है
वहीं बीजेपी ने भी इसका जवाब अब निकाल लिया है। सोशल मीडिया में पिछले एक नया पोस्टर वायरल होने लगा है और नारा है यूपी को ये 7 पसंद है। बीजेपी समर्थकों ने इस पोस्टर को राहुल और अखिलेश के जबाब में निकाला है जिसमें पीएम मोदी के साथ सात नेताओं की तस्वीरें लगी हैं और नारे के तौर पर लिखा है यूपी को ये 7 पसंद है। यह बीजेपी की ओर से सपा को करारा जवाब है। कांग्रेस के गठबंधन के बाद राहुल गांधी और अखिलेश यादव की फोटो के साथ यूपी को ये साथ पसंद है्य के नाम से पोस्टर और स्लोगन जारी किया गया था। इसको सपा और कांग्रेस दोनों पार्टियों ने काफी प्रमुखा भी दिया। समर्थकों ने भी इसका खूब प्रचार और प्रसार किया है।

BSP give reservation to poor peoples

लखनऊ । उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी की सरकार बनने पर गरीबों को आर्थिक आधार पर आरक्षण के साथ ही किसानों का एक लाख रुपए का कर्ज माफ होगा। भाजपा आरएसएस के एजेंडे पर काम कर रही है। यूपी में भाजपा सफल हुई तो दलितों और पिछड़ों को मिलने वाला आरक्षण समाप्त हो जाएगा। यह बातें बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सूबे की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने बरेली में बसपा प्रत्याशियों के समर्थन में आयोजित एक जनसभा में कहीं।

 

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी से 10 माह पूर्व ही अपने चहेतों का काला धन ठिकाने लगवा दिया। भाजपा के प्रति जनता आक्रोशित है, इस बात को भाजपा भांप चुकी है। यही कारण है कि मुख्यमंत्री पद के लिए किसी का नाम पार्टी ने पेश नहीं किया।बसपा सुप्रीमो ने कहा कि सूबे में सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी सरकार ने बदले की भावना से काम किया। अल्पसंख्यकों और दलितों को झूठे केसों में जेल भेज गया है। बसपा की सरकार बनने पर ऐसे लोगों की समीक्षा की जाएगी और निर्दोषों को रिहा किया जाएगा।

 

उन्होंने कहा कि सपा सरकार के कार्यकाल में आपराधिक घटनाओं में तेजी से बढ़ोतरी हुई। मथुरा, दादरी और बुलंदशहर जैसे कांड हुए। मथुरा में तो सरकारी जमीन पर कब्जे को लेकर पुलिस अधिकारी तक की जान चली गई। गरीब, मजलूम और अल्पसंख्यक वर्ग तो बहुत परेशान हुए। दंगे-फसाद से अल्पसंख्यकों को क्षति पहुंचाई गई। सपा सरकार की पारिवारिक कलह के बाद अब अल्पसंख्यकों का मोह इस पार्टी से भंग हो गया है।

 

बसपा अध्यक्ष ने कहा कि गुंडागर्दी, अराजकता और सांप्रदायिकता फैलाने वाली पार्टी के साथ कांग्रेस के गठबंधन का सीधा फायदा भाजपा को होगा। उन्होंने कहा कि यूपी में वर्तमान चुनाव सांप्रदायिकता, जातिवाद और अपराधी तत्वों को खत्म करने का है। पिछले पांच साल में सपा सरकार का एक सूत्रीय काम गुंडागर्दी कर जमीनों पर कब्जे करने और अराजकता फैलाने का रहा।

0 219

PM Narendra Modi Said SP BSP Congress is scam for UP

लखनऊ.  उत्तर प्रदेश के विकास के लिए इसे स्कैम मुक्त करना जरूरी है। जनता को तय करना पड़ेगा कि उसे स्कैम चाहिए या विकास। नौजवानों को रोजगार के लिए स्कैम को दरकिनार करना ही पड़ेगा। परिवारवाद में फंसी सूबे की समाजवादी पार्टी सरकार प्रदेश का विकास नहीं कर सकती। यह बातें राज्य विधानसभा चुनाव में प्रचार अभियान की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेरठ में आयोजित विजय संकल्प रैली में कहीं। प्रधानमंत्री ने कहा कि स्कैम का मतलब, एस से समाजवादी, सी से कांग्रेस, ए से अखिलेश और एम का मतलब मायावती है।

स्कैम से यूपी बेहाल
उन्होंने कहा कि सपा और बसपा ने राज्य को बेहाल कर दिया है। मोदी ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ मेरी लड़ाई जारी रहेगी। जब तक मैं हूं चैन से नहीं बैठूंगा और न ही लुटेरों को बैठने दूंगा। भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई रुकने वाली नहीं है। मैं ताकतवर लोगों से लड़ रहा हूं, मोहल्ले की कुश्ती नहीं। देश को बेइमानों से मुक्ति दिलाने के लिए भाजपा को आर्शीवाद दीजिए।प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्य के विकास के लिए स्कैम से मुक्ति पाना जरूरी है।

स्कैम से बचने के लिए परिवर्तन जरूरी
उन्होंने स्कैम के खेल को हमेशा के लिए नेस्तनाबूद करने के लिए वोट का सही प्रयोग करने की अपील की और कहा कि राज्य में खुशहाली के लिए परिवर्तन लाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार का आलम यहां तक पहुंच गया है कि कर्नाटक के एक मंत्री के यहां 150 करोड़ रुपए बरामद हुए लेकिन शर्म की बात है कि कांग्रेस ने उसे अभी तक मंत्री बनाकर रखा है। कांग्रेस पता नहीं किस मुंह से भ्रष्टाचार खत्म करने की बात करती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी लड़ाई भ्रष्टाचार, गुंडाराज, बहन-बेटियों की इज्जत लूटने वालों को शरण देने वालों के खिलाफ है। यह लड़ाई वह अंतिम दम तक जारी रखेंगे।

रोजी-रोटी के चक्कर में यूपी से हो रहा पलायन
उन्होंने कहा कि इस राज्य के पास अकूत प्राकृतिक संपदा और काम करने वाले मजबूत हाथ हैं, फिर भी रोजी-रोटी के चक्कर में नौजवानों को यहां से पलायन करना पड़ रहा है। ढाई साल में केंद्र सरकार ने गरीबों, किसानों, महिलाओं, शोषित और पीड़ितों के लिए काफी काम किया, लेकिन अभी भी बहुत कुछ करना है। उन्हें यूपी का कर्ज चुकाना है, लेकिन इसके लिए बाधा डालने वाली राज्य सरकार को हटाना ही पडेगा।

यूपी के लिए दिल्ली से आई योजनाएं लखनऊ में रूक जाती हैं
दिल्ली से चली योजनाएं लखनऊ में लटक जाती हैं। प्रधानमंत्री ने स्वास्थ्य, शिक्षा और आवास की केंद्रीय योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि हमने बड़ी रकम भेजी लेकिन राज्य सरकार पैसे खर्च नहीं करना चाहती थी। राज्य सरकार की नीयत में खोट है, इसलिए विकास के अलावा उनका ध्यान अन्य चीजों पर है।

एक दूसरे को कोसने वाले गले मिले
मोदी ने सपा-कांग्रेस गठबंधन पर चुटकी ली और कहा कि एक दूसरे को हर समय कोसने वालों को बताना चाहिए कि रातों रात ऐसा क्या हो गया कि गले मिल गए। कांग्रेस उपाध्यक्ष ने प्रदेश में यात्रा निकालकर सपा सरकार पर कई आरोप लगाए थे। कानून व्यवस्था को चैपट करार दिया था। राज्य सरकार को लुटेरा बताया गया था। मोदी ने कहा कि राजनीतिक गठबंधन कई बार हुए हैं लेकिन यह पहला ऐसा गठबंधन है जिसमें एक-दूसरे को खत्म करने का मौका नहीं छोड़ने वाले गले मिल गए हैं।

2022 तक हर गरीब को मिलेगा घरा
उन्होंने कहा कि उनकी नीति और नीयत दोनों साफ हैं। वह 2022 तक हर गरीब को घर देना चाहते हैं। यूपी के भाग्य को बदलने के लिए यहां की सरकार को बदलना ही होगा। प्रधानमंत्री ने दावा किया कि जिन प्रदेशों में भाजपा की सरकारें हैं वहां एक पैसा भी किसानों का बकाया नहीं है।

Free Arcade Games by Critic.net