Saturday, February 23, 2019
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सचिन तेंदुलकर

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ऐसा क्या हुआ की सचिन कुछ बोल न सके

नई दिल्ली.

गुजरात चुनावों के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह पर की गई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टिप्पणी को लेकर राज्यसभा में बृहस्पतिवार को भी कांग्रेस का विरोध और नारेबाजी जारी रही। यही नहीं, सदन में पहली बार भाषण देने के लिए खड़े हुए सचिन तेंदुलकर को भी बोलने नहीं दिया गया।

दरअसल, सदन में सुबह प्रधानमंत्री की टिप्पणी और 2जी घोटाला मामले पर हुए हंगामे के बाद सभापति एम. वेंकैया नायडू ने कार्यवाही दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी थी। जब कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तो वेंकैया अल्पकालिक चर्चा की शुरुआत तेंदुलकर से करवाना चाहते थे। तेंदुलकर को खेल के अधिकार और देश में खेलों के भविष्य पर चर्चा की शुरुआत करनी थी। इस बीच सपा के नरेश अग्रवाल ने 2जी मामले में व्यवस्था का सवाल उठा दिया।

इसके बाद वेंकैया ने यह कहते हुए चर्चा की शुरुआत करने की कोशिश की कि यह तेंदुलकर का पहला भाषण है और उन्हें सुना जाना चाहिए, लेकिन तुरंत ही कांग्रेस के कई सदस्य खड़े हो गए और प्रधानमंत्री की टिप्पणी का मुद्दा उठाते हुए ‘देश को गुमराह करना बंद करो’ के नारे लगाने लगे। वे प्रधानमंत्री मोदी द्वारा माफी मांगे जाने की मांग कर रहे थे।

वेंकैया ने सदस्यों से कहा कि ‘भारत रत्न’ सचिन तेंदुलकर ने देश के लिए काफी कुछ किया है, वह आदर्श शख्सियत और युवाओं के प्रेरणास्नोत हैं, लेकिन इसके बावजूद विपक्ष ने शोरगुल और विरोध जारी रखा। नाराज वेंकैया ने तेंदुलकर से भाषण शुरू करने के लिए कहा। सपा की जया बच्चन ने भी तेंदुलकर के बोलने का समर्थन किया, लेकिन वह सिर्फ खड़े होकर देखते रह गए, क्योंकि विपक्षी सदस्य लगातार नारेबाजी करते रहे। इस पर वेंकैया ने कहा, वह नहीं चाहते कि लोग टीवी पर ऐसे दृश्य देखें और उन्होंने सदन की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी।

राज्यसभा में बृहस्पतिवार को बोलने के लिए खड़े महान क्रिकेटर और सांसद सचिन तेंदुलकर ’ प्रेट्रमुख्य विपक्षी दल के रूप में दिशा खो चुकी है कांग्रेस 1खेलों के गैर-राजनीतिक मुद्दे पर भी सचिन तेंदुलकर को नहीं बोलने देने के लिए सरकार ने कांग्रेस की आलोचना की है। संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने कहा कि मुख्य विपक्षी दल के रूप में कांग्रेस अपना आधार और दिशा दोनों खो चुकी है। गुरुवार को कांग्रेस ने बिल्कुल अलोकतांत्रिक तरीके से व्यवहार किया। सभापति के बार-बार अनुरोध करने पर भी उन्हें (तेंदुलकर) बेहद महत्वपूर्ण और जनहित के मुद्दे पर बोलने नहीं दिया गया।

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