Friday, October 19, 2018
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BSP give reservation to poor peoples

लखनऊ । उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी की सरकार बनने पर गरीबों को आर्थिक आधार पर आरक्षण के साथ ही किसानों का एक लाख रुपए का कर्ज माफ होगा। भाजपा आरएसएस के एजेंडे पर काम कर रही है। यूपी में भाजपा सफल हुई तो दलितों और पिछड़ों को मिलने वाला आरक्षण समाप्त हो जाएगा। यह बातें बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सूबे की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने बरेली में बसपा प्रत्याशियों के समर्थन में आयोजित एक जनसभा में कहीं।

 

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी से 10 माह पूर्व ही अपने चहेतों का काला धन ठिकाने लगवा दिया। भाजपा के प्रति जनता आक्रोशित है, इस बात को भाजपा भांप चुकी है। यही कारण है कि मुख्यमंत्री पद के लिए किसी का नाम पार्टी ने पेश नहीं किया।बसपा सुप्रीमो ने कहा कि सूबे में सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी सरकार ने बदले की भावना से काम किया। अल्पसंख्यकों और दलितों को झूठे केसों में जेल भेज गया है। बसपा की सरकार बनने पर ऐसे लोगों की समीक्षा की जाएगी और निर्दोषों को रिहा किया जाएगा।

 

उन्होंने कहा कि सपा सरकार के कार्यकाल में आपराधिक घटनाओं में तेजी से बढ़ोतरी हुई। मथुरा, दादरी और बुलंदशहर जैसे कांड हुए। मथुरा में तो सरकारी जमीन पर कब्जे को लेकर पुलिस अधिकारी तक की जान चली गई। गरीब, मजलूम और अल्पसंख्यक वर्ग तो बहुत परेशान हुए। दंगे-फसाद से अल्पसंख्यकों को क्षति पहुंचाई गई। सपा सरकार की पारिवारिक कलह के बाद अब अल्पसंख्यकों का मोह इस पार्टी से भंग हो गया है।

 

बसपा अध्यक्ष ने कहा कि गुंडागर्दी, अराजकता और सांप्रदायिकता फैलाने वाली पार्टी के साथ कांग्रेस के गठबंधन का सीधा फायदा भाजपा को होगा। उन्होंने कहा कि यूपी में वर्तमान चुनाव सांप्रदायिकता, जातिवाद और अपराधी तत्वों को खत्म करने का है। पिछले पांच साल में सपा सरकार का एक सूत्रीय काम गुंडागर्दी कर जमीनों पर कब्जे करने और अराजकता फैलाने का रहा।

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PM Narendra Modi Said SP BSP Congress is scam for UP

लखनऊ.  उत्तर प्रदेश के विकास के लिए इसे स्कैम मुक्त करना जरूरी है। जनता को तय करना पड़ेगा कि उसे स्कैम चाहिए या विकास। नौजवानों को रोजगार के लिए स्कैम को दरकिनार करना ही पड़ेगा। परिवारवाद में फंसी सूबे की समाजवादी पार्टी सरकार प्रदेश का विकास नहीं कर सकती। यह बातें राज्य विधानसभा चुनाव में प्रचार अभियान की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेरठ में आयोजित विजय संकल्प रैली में कहीं। प्रधानमंत्री ने कहा कि स्कैम का मतलब, एस से समाजवादी, सी से कांग्रेस, ए से अखिलेश और एम का मतलब मायावती है।

स्कैम से यूपी बेहाल
उन्होंने कहा कि सपा और बसपा ने राज्य को बेहाल कर दिया है। मोदी ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ मेरी लड़ाई जारी रहेगी। जब तक मैं हूं चैन से नहीं बैठूंगा और न ही लुटेरों को बैठने दूंगा। भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई रुकने वाली नहीं है। मैं ताकतवर लोगों से लड़ रहा हूं, मोहल्ले की कुश्ती नहीं। देश को बेइमानों से मुक्ति दिलाने के लिए भाजपा को आर्शीवाद दीजिए।प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्य के विकास के लिए स्कैम से मुक्ति पाना जरूरी है।

स्कैम से बचने के लिए परिवर्तन जरूरी
उन्होंने स्कैम के खेल को हमेशा के लिए नेस्तनाबूद करने के लिए वोट का सही प्रयोग करने की अपील की और कहा कि राज्य में खुशहाली के लिए परिवर्तन लाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार का आलम यहां तक पहुंच गया है कि कर्नाटक के एक मंत्री के यहां 150 करोड़ रुपए बरामद हुए लेकिन शर्म की बात है कि कांग्रेस ने उसे अभी तक मंत्री बनाकर रखा है। कांग्रेस पता नहीं किस मुंह से भ्रष्टाचार खत्म करने की बात करती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी लड़ाई भ्रष्टाचार, गुंडाराज, बहन-बेटियों की इज्जत लूटने वालों को शरण देने वालों के खिलाफ है। यह लड़ाई वह अंतिम दम तक जारी रखेंगे।

रोजी-रोटी के चक्कर में यूपी से हो रहा पलायन
उन्होंने कहा कि इस राज्य के पास अकूत प्राकृतिक संपदा और काम करने वाले मजबूत हाथ हैं, फिर भी रोजी-रोटी के चक्कर में नौजवानों को यहां से पलायन करना पड़ रहा है। ढाई साल में केंद्र सरकार ने गरीबों, किसानों, महिलाओं, शोषित और पीड़ितों के लिए काफी काम किया, लेकिन अभी भी बहुत कुछ करना है। उन्हें यूपी का कर्ज चुकाना है, लेकिन इसके लिए बाधा डालने वाली राज्य सरकार को हटाना ही पडेगा।

यूपी के लिए दिल्ली से आई योजनाएं लखनऊ में रूक जाती हैं
दिल्ली से चली योजनाएं लखनऊ में लटक जाती हैं। प्रधानमंत्री ने स्वास्थ्य, शिक्षा और आवास की केंद्रीय योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि हमने बड़ी रकम भेजी लेकिन राज्य सरकार पैसे खर्च नहीं करना चाहती थी। राज्य सरकार की नीयत में खोट है, इसलिए विकास के अलावा उनका ध्यान अन्य चीजों पर है।

एक दूसरे को कोसने वाले गले मिले
मोदी ने सपा-कांग्रेस गठबंधन पर चुटकी ली और कहा कि एक दूसरे को हर समय कोसने वालों को बताना चाहिए कि रातों रात ऐसा क्या हो गया कि गले मिल गए। कांग्रेस उपाध्यक्ष ने प्रदेश में यात्रा निकालकर सपा सरकार पर कई आरोप लगाए थे। कानून व्यवस्था को चैपट करार दिया था। राज्य सरकार को लुटेरा बताया गया था। मोदी ने कहा कि राजनीतिक गठबंधन कई बार हुए हैं लेकिन यह पहला ऐसा गठबंधन है जिसमें एक-दूसरे को खत्म करने का मौका नहीं छोड़ने वाले गले मिल गए हैं।

2022 तक हर गरीब को मिलेगा घरा
उन्होंने कहा कि उनकी नीति और नीयत दोनों साफ हैं। वह 2022 तक हर गरीब को घर देना चाहते हैं। यूपी के भाग्य को बदलने के लिए यहां की सरकार को बदलना ही होगा। प्रधानमंत्री ने दावा किया कि जिन प्रदेशों में भाजपा की सरकारें हैं वहां एक पैसा भी किसानों का बकाया नहीं है।

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सड़ रहे शव, पोस्टमार्टम के पुराने हो चुके औजारों में जंग लगना तथा डॉक्टरों की कमी राष्ट्रीय राजधानी के अधिकतर शवगहों की आम स्थिति है। दिल्ली उच्च न्यायालय को सौंपी गई एक रिपोर्ट में यह बात कही गयी है।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि शवगृहों में काम करने वालों की जीवन प्रत्याशा राष्ट्रीय औसत से कम है। ऐसा शायद वहां काम करने के लिए अस्वास्थ्यकर स्थिति के कारण है।

शवगृहों में शव के साथ किस तरह का सलूक होता है इसकी जांच करने के लिए उच्च न्यायालय की ओर से एमिकस क्यूरी नियुक्त वकील साकिब की रिपोर्ट में शीतलन कक्षों (कूलिंग चेंबर्स) की खराब स्थिति, शवों को सही तरह से नहीं ढकना, मेजों पर बिना किसी देखभाल के शवों का पड़ा रहना और अंत्यपरीक्षण के लिए जंग लगे और पुराने पड़ चुके औजारों के इस्तेमाल समेत विभिन्न कमियों का उल्लेख किया गया है।

एमिकस ने कहा है कि यहां तक कि आपराधिक मामलों में महत्वपूर्ण साक्ष्य समझे जाने वाले विसरा के नमूने खुले कैबिनेट में पॉलिथीन बैग में लावारिस स्थिति में पड़े रहते हैं और कोई भी उन्हें अपने साथ ले जा सकता है।

मामले में साकिब की यह तीसरी रिपोर्ट थी। उन्होंने पिछले सप्ताह अदालत को बताया कि उनकी पूर्व की रिपोर्ट के बाद से हालात में कोई सुधार नहीं हुआ है। यहां करीब 20 मुर्दाघर हैं जिसका संचालन सरकार और अन्य एजेंसियां करती है।

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लखनऊ। 2 सितंबर को हुए सेन्ट्रल बार एसोसिएशन के वार्षिक चुनावी नतीजे मंगलवार देर शाम घोषित किए गए। अध्यक्ष पद के लिए मृगेंद्र पांडेय ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी शिवशरण उपाध्याय को दो वोटों से हरा दिया। उन्हें कुल 976 वोट मिले। वहीं, महामंत्री पद के लिए बृजेश यादव ने भारी मतों से जीत हासिल की। उन्हें कुल 1726 वोट मिले।
वरिष्ठ उपाध्यक्ष के पद पर आशुतोष मिश्रा, मध्य उपाध्यक्ष के दो पद पर अनुमेष मिश्रा व मलन सिंह, कनिष्ठ उपाध्यक्ष के पद पर अशोक कुमार सिंह तोमर, ट्रेजरार के पद पर उमेंद्र अवस्थी, ज्वॉइंट सेक्रेटरी के तीन पदों पर जितेंद्र यादव, राकेश श्रीवास्तव, विजय प्रकाश तिवारी ने जीत हासिल की।
वहीं, वरिष्ठ कार्यकारिणी के 6 पदों पर आनंद विक्रम सिंह, आशुतोष राय, दिलीप भदौरिया, विवेक सिंह, रामराज सिंह, सुरेन्द्र तिवारी चुने गए।

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सूचना प्रौद्योगिकी कानून की धारा 66 (ए) की संवैधानिक वैधता का बचाव करने वाली राजग सरकार ने मंगलवार को कहा कि उसके रुख में और पिछली संप्रग सरकार के रुख में कोई समानता नहीं की जा सकती क्योंकि पिछली सरकार ने इस धारा को असहमति, व्यंग्य और उसे सही नहीं लगने वाली हर चीज पर लगाम लगाने का हथियार बनाने का प्रयास किया था। संचार व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि अगर सुरक्षा प्रतिष्ठानों को लगता है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में कुछ पहलुओं पर विचार करने की जरूरत है तो उचित सुरक्षा मानकों के साथ एक समुचित तरीके से विचार किया जाएगा ताकि संवैधानिक अधिकारों का हनन नहीं हो। दूसरी तरफ अधिकतर राजनीतिक पार्टियों ने कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। कांग्रेस ने माना कि निरस्त किए गए कानून में खामियां थीं। बहरहाल, जदयू अध्यक्ष शरद यादव ने कोर्ट के फैसले से असहमति जताते हुए कहा कि वह न्यायपालिका का सम्मान करते हैं, लेकिन एक अच्छे प्रावधान को निरस्त करना गलत है क्योंकि अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब गाली देने की आजादी नहीं होता। वहीं शिवसेना ने कहा कि इस फैसले से कानून को लागू कराने वाली एजेंसियों के हाथ कमजोर होंगे। वामपंथी पार्टियों व आप ने भाजपा और कांग्रेस पर आरोप लगाया कि दोनों ने इस मुद्दे पर अदालत में एक जैसा अलोकतांत्रिक रुख अपनाया। उधर बाल ठाकरे के निधन के बाद बंद के खिलाफ शाहीन ढाडा की टिप्पणी को लाइक करने के कारण गिरफ्तार होने वाली ऋणु श्रीनिवासन ने निर्णय पर खुशी जताई।

४ इस प्रावधान का संविधान में प्रदत्त अभिव्यक्ति और बोलने की आजादी पर प्रतिकूल असर पड़ता है : खंडपीठ ४ बाल ठाकरे के मामले में गिरफ्तारी के कारण यह प्रावधान न्यायिक समीक्षा के दायरे में आया था

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक ऐतिहासिक फैसले में सूचना प्रौद्योगिकी कानून के उस विवादास्पद प्रावधान को असंवैधानिक करार देते हुए निरस्त कर दिया जिसके तहत कथित रूप से अपमानजनक विवरण वेबसाइट्स पर पोस्ट करने पर व्यक्ति को पुलिस गिरफ्तार कर सकती थी। कोर्ट ने कहा कि इस प्रावधान का संविधान में प्रदत्त अभिव्यक्ति और बोलने की आजादी पर प्रतिकूल असर पड़ता है। न्यायमूर्ति जे. चेलामेश्वर की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा कि सूचना एवं प्रौद्योगिकी कानून की धारा 66-ए में प्रयुक्त भाव ‘बिना किसी नियंत्रण के और अपरिभाषित’ हैं जिसका विभिन्न प्रशासनों ने साइबर स्पेस के मामले में असहजता वाले पोस्ट के खिलाफ इस्तेमाल किया है। हालांकि कोर्ट ने सूचना प्रौद्योगिकी कानून की धारा 69-ए और धारा 79 को निरस्त करने से इनकार कर दिया।

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भर्ती प्रक्रिया में असफल अभ्यर्थियों द्वारा किए जा रहे प्रदर्शन और हंगामे पर प्रमुख सचिव गृह और डीजीपी ने सख्ती दिखाई है। सोमवार को देर शाम वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए प्रदेश भर के आईजी, डीआईजी और एसएसपी को सख्त निर्देश दिया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखा जाए। प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों से सख्ती से निपटा जाए। किसी प्रकार की प्रदेश में कानून-व्यवस्था बिगड़ने न पाए। देर शाम प्रमुख सचिव देबाशीष पंडा और डीजीपी एके जैन ने प्रदेश भर के आईजी जोन, डीआईजी रेंज और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए हालात के बारे में विस्तृत जानकारी जुटायी। दारोगा और आरक्षी पदों की भर्ती को लेकर प्रदेश भर के जनपदों में हो रहे प्रदर्शन पर सख्ती से निपटने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि हरहाल में कानून व्यवस्था बनाये रखा जाएं। कानून व्यवस्था के साथ खिलवाड़ करने वालों से सख्ती से निपटा जाय। इसके साथ ही बढ़ रहे अपराध पर काबू पाने और कई सनसनीखेज घटनाओं के जल्द खुलासे के निर्देश दिए गये हैं। इसके अलावा कई जनपदों से अपराध और अफसरों के रवैए को लेकर आ रही शिकायत पर दोनों अफसरों ने फटकार भी लगाई हैं।

यूपी में दारोगा और आरक्षी पदों की भर्ती प्रक्रिया का परिणाम घोषित हो जाने के बाद प्रदेश भर में असफल अभ्यर्थियों में रोष बना हुआ हैं। सोमवार को प्रदेश के दर्जनों जनपदों में हजारों की संख्या में अभ्यर्थी सड़क पर उतारे और मुख्यालय का घेराव कर हंगामा करते रहे। जिन्हें जिला और पुलिस प्रशासन समझाबुझा कर आश्वसान देकर शांत कराती रही। सड़क पर उतरे अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया में धांधली का आरोप लगाते हुए प्रक्रिया को निरस्त करने और मामले की जांच सीबीआई से कराए जाने की मांग की। जिसको लेकर प्रदेश के कानपुरनगर, मैनपुरी, हरदोई, उन्नाव, गाजियाबाद और एटा जनपद में असफल अभ्यर्थी हंगामा करते हुए। उन्नाव जनपद में हजारों लोगों ने कानपुर-लखनऊ राजमार्ग जामकर प्रदर्शन किया। सरकार विरोधी नारेबाजी करते हुए भर्ती प्रक्रिया निरस्त करने की मांग करते रहे। धांधली से आक्रोशित अभ्यर्थियों ने गाजियाबाद में जिला मुख्यालय और एटा के कासगंज में सड़क जामकर प्रदर्शन किया। जिन्हे समझाने बुझाने में जिला और पुलिस प्रशासन दिनभर लगा रहा।

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किसी जमाने में ऐसा भी होता था कि पति को खुश करने के लिए पत्नी 24 घंटे किचन में खड़ी रहती थी। पति के लिए उसकी फेवरेट डिशेज बनाती रहती थी, लेकिन आज के जमाने में हैप्पी मैरिड लाइफ के लिए सिर्फ खाने से बात नहीं बनती, बल्कि कुछ बदलाव भी जरूरी हो गए हैं। शादीशुदा लाइफ को खुशहाल बनाने लिए अब पुराने विचारों में सुधार आ रहा है। महिला और पुरुष में फर्क कम हो रहा है। हैप्पी मैरिड लाइफ के रूल्स में क्या बदलाव आया है, आइए जानते हैं…

पति और बच्चों का साथ आपके रिश्ते को मजबूत बनाता है, लेकिन पूरा दिन उनमें खोए रहना भी कोई सॉल्युशन नहीं है। अब पत्नी को सारा दिन घर के काम-काज में ही नहीं निकालना चाहिए, बल्कि कुछ वक्त खुद के लिए भी रखना चाहिए। खुद की सुनें अपने आप को हमेशा खुश रखें। इसके लिए हर रोज कोई न कोई ऐसा काम करें जिससे आपको खुशी मिलती हो। आप खुश रहेंगी तभी आस-पास का माहौल भी वैसा ही रहेगा। खुलकर करें बात हमारे समाज में सेक्स लाइफ को लेकर खुलेआम बातचीत को अच्छा नहीं माना जाताए लेकिन रिलेशनशिप को हेल्दी बनाने के लिए इस पर खुलकर बातचीत करना भी बहुत जरूरी हो गया है।पति जैसा कहता है वैसा करो पहले जमाने में हर काम में पति का डिसिशन जरूरी होता था और वो जो भी फैसला लेता था परिवार के लोग उसे मानते भी थे। आज जमाना खुद फैसले लेने का हो गया है। इसलिए कभी-कभार अपने विचार भी देने चाहिए। इससे परिवार में आपका सम्मान बना रहता है। ज्यादा भावुक न होंबहुत सी महिलाएं अपने पार्टनर से अपनी फीलिंग इसलिए नहीं शेयर करतीं, क्योंकि उन्हें लगता है कि वो समझेंगे नहीं। असल में उनकी यही सोच सबसे बड़ी समस्या है। इससे गलतफहमियां पैदा हो सकती है। इसलिए अपने दिल की बात कहने से घबराना नहीं चाहिए। सोते वक्त नो मोर डिसकशन आपस के लड़ाई-झगड़ों को सोने के वक्त नहीं डिस्कस करना चाहिएए बल्कि कोशिश करनी चाहिए कि शांति और आराम सुलझाएं जब दिमाग भी फ्रेश हो। समस्या खुद सुलझाएंपति-पत्नी को अपने बीच की समस्याओं को खुद ही सुलझाना चाहिए। कोई तीसरा दखल दे, यह किसी को मंजूर नहीं। अगर जरूरत लगे, तभी किसी बड़े से बात करनी चाहिए।पुरुषों से बहस न करें बहस करने से बेहतर है बातचीत करना। दोनों के बीच का फर्क जानना बहुत जरूरी है, क्योंकि जहां अनावश्यक बहस विवाद को जन्म देती है। वहीं, शांत दिमाग से की गई बातचीत से मामले को आसानी से सुलझाया जा सकता है। पति ही घर का खर्च चलाता है ऐसा पहले कभी हुआ करता था, लेकिन आज के जमाने में औरतें भी पुरूषों के साथ कदम मिलाकर चल रही हैं। वो घर की जिम्मेदारियां भी उठा रही हैं और साथ ही वकिंर्ग वुमन के तौर पर घर का खर्च चलाने में भी मदद करती हैं। पुरूषों में इगो जरूरी हैआदमियों को क्या पसंद है और क्या नहीं इसमें वक्त जाया करने से बेहतर है वो जैसे हैं उनसे प्यार करें। और-तो-और, यह पहले की बाते हैं कि पुरुषों में इगो होना चाहिए और महिलाओं को सहना चाहिए। आज के जमाने में खुशहाल शादीशुदा जिंदगी जीने के लिए इगो नहीं, बल्कि विश्वास और प्यार की जरूरत है। उन्हें सब कुछ नहीं बताना वैसे तो कहा जाता है कि हेल्दी रिलेशनशिप में कुछ भी नहीं छिपाना चाहिए, लेकिन सब कुछ बताना भी कई बार निगेटिव हो सकता है। इसलिए हेल्दी रिलेशनशिप के लिए आपसी समझ बहुत ज़रूरी है। उसके बाद ही अपनी कोई पर्सनल बात अपने पार्टनर से शेयर करें। बच्चा पहले इसमें कोई शक नहीं कि बच्चे की केयर मां-बाप दोनों की जिम्मेदारी है, लेकिन उसके साथ-साथ दोनों को अपने लिए भी वक्त निकालना चाहिए। बच्चे का ध्यान तो रखना ही चाहिए, लेकिन कभी-कभार रोमांस के लिए भी वक्त निकाल लेना चाहिए।शादी दो लोगों का नहीं, दो परिवारों का मिलन है परिवार का सम्मान जरूरी है, लेकिन इसके साथ ही ये भी जरूरी है कि वही सम्मान आपको भी मिले। शादी का मतलब एक-दूसरे का सम्मान करना है। यह कोई समझौता नहीं है। पैसों का हिसाब-किताब पति के पासअगर आप कामकाजी महिला हैं, तो अपने पैसों का हिसाब-किताब खुद रखें। इससे आपके पार्टनर को भी आपकी समझदारी का अहसास होगा और दोनों कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ंगे।आदमी काम करेगा, औरतें घर संभालेंगी ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। आज औरतें ऑफिस जा रही हैं और पुरुष घर के कामों मे उनका हाथ बंटा रहे हैं।

नई दिल्ली।

डायरेक्टर पीटर जैक्सन की फिल्म ‘द होबिट: द बैटल ऑफ द फाइव आर्मीज’ ने लगभग साढ़े सात अरब रुपए का बिजनेस कर विदेशी बॉक्स ऑफिस को हिला कर रख दिया है। यह फिल्म अभी तक 117.6 मिलियन डॉलर (लगभग 7.46 अरब रुपए) बटोर चुकी है।

न्यूजीलैंड, जापान, मैक्सिको, रूस समेत 38 देशों में यह फिल्म 11 दिसंबर को रिलीज हो चुकी हैं, वहीं अमेरिकी सिनेमाघरों में फिल्म कल रिलीज होगी। यानी अभी फिल्म के कलेक्शन में काफी इजाफा होने की उम्मीद है।

द होबिट ने सबसे ज्यादा कमाई जर्मनी में की है। जर्मनी में इस फिल्म ने अभी तक 19.5 मिलियन डॉलर, ब्रिटेन में 15.2 मिलियन डॉलर, फ्रांस में 14.5 मिलियन डॉलर और रूस में 13.4 मिलियन डॉलर का कलेक्शन किया। यह फिल्म वॉर्नर ब्रदर्स की सबसे बड़ी ओपनिंग वाली फिल्म बन गई है।

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अक्सर बच्चे झूठ बोलते हैं। झूठ तो बड़े भी बोलते हैं, पर बच्चों को झठ बोलने पर सजा मिलती है। पेरेंट्स सोचते हैं कि डांट-फटकार और पिटाई के डर से बच्चे झूठ बोलना बंद कर देंगे, पर ऐसा होता नहीं। सवाल ये है कि बच्चे आख़िर झूठ क्यों बोलते हैं और झूठ बोलना कैसे सीखते हैं। यह वह अपनी फैमिली और आसपास के माहौल में ही सीखते हैं।आज हम आपको बच्चों के झूठ बोलने के कारणों के बारे में बता रहे हैं।
1-पेरेंट्स ध्यान दें बच्चों पर
 बच्चे जिन बातों के ग़लत मानते हैं और वैसा उन्होंने किया हो, तो झूठ बोल देते हैं। कई बार बच्चे कुछ ग़लत नहीं करने पर भी झूठ बोलने लगते हैं, क्योंकि उन्हें ये शक होता है कि कहीं उन्हें ग़लत न माना जाए। यहां पेरेंट्स को समझने की कोशिश करनी चाहिए कि बच्चा झूठ क्यों बोलता है। उन्हें यह भी देखना चाहिए कि कहीं उन्होंने बच्चे के सामने झूठ तो नहीं बोला। आमतौर पर बच्चे मासूम होते हैं और वो ख़ुद से झूठ नहीं बोल सकते। बहुत से बच्चों को झूठ बोलने के बाद पश्चाताप भी होता है। जो भी हो, पेरेंट्स को एक बात समझ लेनी चाहिए कि बच्चा अगर झूठ बोल रहा है तो कभी भी उसे इसके लिए डांटें-फटकारें नहीं। पिटाई तो हर्गिज नहीं करें। इससे बच्चे की पर्सनैलिटी पर बहुत नेगेटिव असर होता है।
2.यूएसए की मैक-गिल यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ एजुकेशनल एंड काउंसेलिंग साइकोलॉजी में हुए एक एक्सपेरिमेंट में यह पाया गया बच्चे झूठ नहीं बोलते, अगर उन्हें पनिशमेंट का डर न हो। पनिशमेंट का डर नहीं होने पर बच्चे वे बातें भी साफ-साफ बतला देते हैं, जो उनकी नज़र में ग़लत हो। अगर उन्हें प्यार से समझाया जाए तो वो अपने व्यवहार में सुधार लाने की कोशिश करते हैं। यह एक्सपेरिमेंट 4 से 8 साल के 373 बच्चों पर किया गया। प्रमुख रिसर्चर विक्टोरिया तलवार ने कहा कि दंड मिलने के भय से ही बच्चे झूठ बोलते हैं। इसके अलावा, झूठ बोलने का शायद ही कोई कारण हो।
3.चाइल्ड साइकोलॉजी पर शोध करने वाली विक्टोरिया तलवार का कहना है कि पनिशमेंट का भय बच्चों पर नकारात्मक असर डालता है। वे सच बोलने से और सच को स्वीकार करने से घबराने लगते हैं। इसकी जगह अगर उन्हें विश्वास में लिया जाए और उत्साहित किया जाए तो सच कहने में वे जरा भी नहीं कतराते।
4.कई बार पेरेंट्स बच्चों के सामने झूठ बोलते हैं या किसी से कोई बहाना करते हैं। वे घर में होते हुए किसी के आने पर बच्चे से कह देते हैं कि जा कर बता दो कि पापा घर पर नहीं हैं। बच्चा इसे सामान्य बात मानता है। बच्चे अक्सर अपने पेरेंट्स को आदर्श मान कर चलते हैं। फिर इसमें आश्चर्य की क्या बात कि वे भी छोटी-छोटी बातों में झूठ बोलने लगें और बहाने बनाने लगें। इस पर अगर उन्हें दंड दिया जाता है, तो उनके मन में यही सवाल पैदा होता है कि बच्चा होने के कारण ही उन्हें दबाया जा रहा है, वैसे झूठ बोलने में कुछ भी ग़लत नहीं।
5.कुछ बच्चे कभी स्कूल में क्लास बंक कर देते हैं और दोस्तों के साथ खेल में मशगूल हो जाते हैं। जब इस बारे में पेरेंट्स के पास शिकायत जाती है तो पूछताछ किए जाने पर बच्चे को समझ में नहीं आता कि वो क्या जवाब दें और झूठ बोलने लगते हैं या बहाने बनाने लगते हैं। उनका झूठ ऐसा होता है, जो तुरंत पकड़ में आने वाला होता है। ऐसे में, पेरेंट्स गुस्से में आकर डांट-फटकार शुरू कर देते हैं या एक-दो चपत लगा देते हैं। लेकिन इससे समस्या सुलझने वाली नहीं। टीचर और पेरेंट्स को यह पता लगाने की कोशिश करनी चाहिए कि आखिर बच्चे ने क्लास बंक क्यों की और उस दौरान क्या किया, तभी समस्या की तह तक पहुंचा जा सकता है। लेकिन इतना धैर्य किसके पास है? हो सकता है, बच्चे को क्लास में मजा नहीं आ रहा हो या दोस्तों के साथ उसने कोई प्लान बना रखा हो। ध्यान रहे, बच्चे को कभी ग़लत न समझें।
6.कुछ बच्चों में चिल्लर पैसे चुराने की आदत लग जाती है। जब पेरेंट्स या फैमिली मेंबर देखते हैं कि उनके पैसे गायब हो रहे हैं तो बच्चों पर ही पहले शक होता है। उनसे कड़ी पूछताछ होती है। बच्चों के सामने झूठ बोलने के अलावा और कोई चारा नहीं होता। जरूरी नहीं कि पैसे बच्चों ने ही चुराए हों, कई बार पैसे खो भी सकते हैं, पर शक बच्चों पर ही होता है। पेरेंट्स को यह जानने की कोशिश करनी चाहिए कि अगर पैसे बच्चे ने ही चुराए तो क्यों, उसने उन पैसों का क्या किया। इसके बाद बच्चों के प्यार से समझाया जा सकता है। अगर वास्तव में बच्चे को पैसे की जरूरत है, तो उसे यह दिया जाना चाहिए। अगर बच्चे ने पैसे चुरा लिए हैं और झूठ बोल रहा है तो इसका इलाज ये नहीं कि उसे मारा-पीटा जाए। याद रखें, बचपन में ऐसी आदत महापुरुषों में भी रही है। महात्मा गांधी ने भी अपनी आत्मकथा में लिखा है कि वे पैसे चुरा लिया करते थे। यही नहीं, उधार चुकाने के लिए उन्होंने एक बार घर से गहना भी चुरा लिया था। पेरेंट्स सही कारण की तलाश करें और बच्चे को प्यार से समझाएं। उसकी कोई जरूरत हो तो उसे पूरा करें। तब आपके बच्चों में झूठ बोलने की आदत नहीं होगी।

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-सरकार से दो-दो हाथ करने की रणनीति तैयार

मीरजापुर।

विंध्याचल के देवरहा बाबा आश्रम में भारतीय जनता पार्टी ने अपनी दो दिनी प्रदेश कार्यसमिति प्रदेश में इस बार के पंचायत चुनाव जीतने, 2017 के विधानसभा चुनाव जीतने का संकल्प लिया गया। बैठक में 27 सूत्री प्रस्तावों पर मुहर लगायी गयी है। मीरजापुर में विंध्याचल के देवरहा बाबा आश्रम सम्पन्न इस बैठक में प्रदेश की लचर कानून-व्यवस्था पर तंज कसा गया और यूपी पुलिस को समाजवादी पार्टी की निजी सेना बताया गया।  बैठक सम्पन्न होने के बाद प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने कहा कि दो दिनी बैठक बहुत फलदायी रही।

इसमें सपा सरकार से दो-दो हाथ करने की रणनीति तैयार की गई। इसके साथ ही 27 सूत्रीय प्रस्ताव पारित भी पारित किए गये। इसमें 2017 के विधानसभा चुनाव जीतने का संकल्प लिया गया। साथ ही प्रदेश में इस बार के पंचायत चुनाव जीतने को लेकर भी मंथन हुआ। वाजपेयी ने बताया कि नोएडा के इंजीनियर यादव सिंह और मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति के खिलाफ हम मोर्चा खोलेंगे। हमारी मांग है कि इनके खिलाफ सीबीआई जांच हो।

पुलिस सपा की निजी सेना

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की पुलिस सपा की निजी सेना की तरह काम कर रही है। इसके कारण ही सूबे में भ्रष्टाचार तथा अपराध चरम पर है। प्रदेश सरकार का भी भ्रष्टाचार पर अलग-अलग रूख रहता है। चरम पर चल रहा भ्रष्टाचार ही यूपी सरकार को ले डूबेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश से कर्मठ तथा ईमानदार केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर जा रहे हैं। इस बैठक में गेहूं धान खरीद में सरकार पर घोर लापरवाही का आरोप लगाया गया।

मुलायम शाही जन्मदिन चर्चा में रहा

पूर्वाचल में फैले इंसेफ्लाइटिस के साथ गन्ना व आलू किसानों की दुर्दशा पर भी चर्चा हुई। इन सबके बीच रामपुर में सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव का शाही जन्मदिन विशेष चर्चा में रहा। बैठक में उत्तर प्रदेश के प्रभारी ओम माथुर के साथ महासचिव पंकज सिंह तथा वरिष्ठ नेता सूर्य प्रताप शाही, ओम प्रकाश सिंह समेत सभी दिग्गज मौजूद थे।

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