Monday, November 12, 2018
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लखनऊ।

उत्तर प्रदेश में अब आम आदमी को खतौनी, आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। लोग अब शीघ्र ही अपने घर में बैठकर इंटरनेट के जरिए यह प्रमाण पत्र हासिल कर सकते हैं। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक यहां बताया कि ई.सुविधा केन्द्रों से तय समय में मिलने वाले प्रमाण पत्र अब इंटरनेट के जरिए कोई भी कहीं से भी हासिल कर सकता है।

इसके लिए लोकवाणी, जनसेवा केन्द्र और ई. डिस्ट्रिक्ट के न्द्र जाने की भी जरूरत नहीं है। प्रदेश में आवेदक को सिटिजन सेंट्रिक सेवाएं सीधे इंटरनेट से प्राप्त करने का शासनादेश जारी कर दिया गया है। प्रदेश में अभी तक जनसेवा और अन्य केन्द्रो के माध्यम से आवेदक आठ विभागों की 26 सेवाएं तय समय में प्राप्त की जा सकती थी। इनमें खतौनी, आय, जाति और निवास प्रमाण-पत्र और अन्य सेवाएं शामिल हैं। आवेदकों को खतौनी के लिए 30 रुपये और अन्य सेवाओं के लिए 20 रुपये शुल्क देना होता है। अब कोई आवेदक बिना इन केन्द्रों पर गये ही सेवा प्राप्त करना चाहता है तो वह प्रमाण पत्र ले सकेगा।

नई व्यवस्था के बाद राज्य में अब इंटरनेट से ही प्रमाण पत्र के लिए शुल्क भी अदा किया जा सकेगा। खतौनी के लिए 15 रुपये और अन्य शासकीय सेवाओं के लिए 10 रुपये लगेंगे। उन्होंने बताया कि शुल्क का भुगतान आनलाइन मोड या डेबिट कार्ड नेट बैंकिंग या अथवा क्रेडिट कार्ड के जरिए किया जा सकेगा। आवेदक को सेवा शुल्क के साथ गेटवे का ट्रांजक्शन चार्ज भी देना होगा।

नए सिस्टम में प्रमाण पत्र जारी होते ही आवेदक के मोबाइल पर सूचना पहुंच जाएगी। उन्होंने बताया कि आवेदक अपने घर या कहीं भी उपलब्ध इंटरनेट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन के लिए बनाए गए पोर्टल पर अपना रजिस्ट्रेशन कर सकता है। उसे तत्काल वन टाइम पार्सवड (ओटीपी) मिल जाएगा। इसके बाद पोर्टल के अनिवार्य संलग्नक लिंक पर जाकर सेवाओं और शुल्क की जानकारी प्राप्त कर सकता है।

डायरी में मिले कोड वर्डस को डीकोड करने के होगे प्रयास

लखनऊ।

उत्तर प्रदेश में करोड़ रुपये की अवैध कमाई के आरोपों में फंसे नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण के इंजीनियर इन चीफ रहे यादव सिंह पर आयकर महकमे की निगाह अब उनके करीबियों पर है। यादव सिंह व उसकी पत्नी की कंपनियों पर छापे में मिले दस्तावेज के आधार पर आयकर विभाग कार्रवाई करेगा। आयकर विभाग के सूत्रों की माने तो यादव सिंह के यहां मिले कागजात में करीब 22 लोगों का जिक्र मिला है। आशंका जतायी जा रही है कि इन लोगों को रिश्वत दी गयी है अथवा इन्हें किन्हीं अन्य तरीके से फायदा पहुंचाया गया है।

आयकर विभाग अब इन लोगों से गहन पूछताछ करेगा। इसके अलावा छापे के दौरान मिली यादव सिंह की कथित डायरी में मिले कोड वर्डस को डीकोड करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इस डीकोडिंग के बाद महकमे को कुछ और जानकारी मिल सकती है जिनके आधार पर इस प्रकरण में भविष्य की कार्रवाई की जा सकेगी। इस मामले में आयकर विभाग अब यादव सिंह की पत्नी की 40 कंपनियों को नोएडा प्राधिकरण से आवंटित भूखंडों की जानकारियां हासिल करने में जुटा है।

आयकर विभाग के छापे में यादव सिंह के कई सौ करोड़ रुपये की काली कमाई प्रकाश में आने के बाद उसके बड़े नेताओं, अधिकारियों और औद्योगिक घरानों से सांठगांठ होने की आशंका बलवती हुई है।

आधे दर्जन लाकर खुले

इस बीच महकमे के सूत्रों ने बताया कि जांच टीमों ने यादव सिंह के करीब आधा दर्जन बैंक लाकरों को खोल दिया है। लाकरों के बारे में विस्तृत विवरण तो नहीं मिल सका है। लेकिन सूत्र बताते हैं कि कुछ लाकरों में रुपये भरे मिले हैं।

हालांकि आयकर विभाग के लोग अभी इस बाबत ज्यादा मुंह खोलने से कतरा रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि लाकर में कई कंपनियों के कागजात और महत्वपूर्ण दस्तावेज भी मिले हैं। यादव सिंह के 13 लाकर होने की बात कही जा रही है।

भूखंडों की जानकारी तलब

दूसरी ओर आयकर महकमे ने इतने बड़े पैमाने पर भूखंडों के आवंटन पर नोएडा विकास प्राधिकरण से जानकारी तलब की है। विभाग ने प्राधिकरण से पूछा है कि यादव सिंह की पत्नी की कं पनियों को कितने भूखंड आवंटित किये गये थे। इन भूखंडों का आकार और उनकी कीमतों के बारे में जानकारी तलब की गयी है। भूखंडों के आवंटन में नोएडा विकास प्राधिकरण के अधिकारियों और रसूखदारों को कमीशन दिये जाने की भी र्चचा है। आयकर विभाग इस बाबत नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों से पूछताछ भी कर सकता है।

यूपी में जननी सुरक्षा योजना में गड़बड़ियों की जांच को कमेटी गठित

महीने की हर तीन तारीख को अपनी रिपोर्ट देगी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में जननी सुरक्षा योजना में पायी गयी गड़बड़ियों की जांच केंिलए प्रदेश स्तरीय कमेटी का गठन किया गया है। यह कमेटी महीने की हर तीन तारीख को अपनी रिपोर्ट देगी। जांच कमेटी में एक एडीएम स्तर के अधिकारी के साथ एक स्वास्थ्य विभाग का अधिकारी शामिल होगा। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत चलायी जा रही जननी सुरक्षा योजना में लगातार धांधलियों की रिपोर्ट मिल रही है।

हाल ही में जननी सुरक्षा योजना में फर्जी लाभार्थियों के नाम मिले हैं। अमूमन ग्रामीण क्षेत्रों में अस्पताल में होने वाले प्रसव में आशा बहुओं का नाम भी जननी सुरक्षा योजना के लाभ में जुड़ा होता है। जांच में पाया गया कि भुगतान में जिन आशा बहुओं को नाम जोड़ा गया है, उन्हें प्रसव के बारे में जानकारी तक नहीं है।

जननी सुरक्षा योजना में मेडिकल कालेज व जिला तथा संयुक्त अस्पताल के साथ ही प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र भी शामिल हैं। यह टीम इन चिह्नित अस्पतालों में लाभार्थियों का सत्यापन करेगी। इसकी रिपोर्ट हर महीने की तीन तारीख को मुख्य चिकित्सा अधिकारी को सौंपी जाएगी। इसके बाद पांच तारीख को मुख्य चिकित्सा अधिकारी को यह रिपोर्ट मिशन डायरेक्टर को देनी होगी।

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