Saturday, December 15, 2018
मनोरन्जन

फिल्म अपने पहले ही सीन से कॉमेडी के ट्रैक को कस कर पड़क ले तो वह कपिल शर्मा की फिल्म कहलाती हैं। इस फिल्म के शुरु होने के कुछ पलों बाद ये अहसास आपको भी हो। मौजूदा दौर में टेलिविजन की दुनिया के सुपरस्टार कॉमेडियन कपिल शर्मा की खासियत ही यही है कि वो किसी सुपरफास्ट लग्जरी कार की तरह कुछ सेकेंड्स में ही 0 से 100 की स्पीड पकड़ लेते हैं। इस फिल्म के बारे में कुछ और बताने से पहले जरा एक नजर डाल लें इसकी कहानी पर जो बहुत सारे उतार-चढ़ाव और घुमाव भरी है।
कहानी : तो शरुवात यहाँ से होती है हालात हर बार ऐसे बने कि कुमार शिव राम किशन (कपिल शर्मा) को एक दो नहीं, बल्कि तीन-तीन शादियां करनी पड़ती है । बेचारे शिव राम किशन की तीनों बीवियां जूही (मंजरी फडनीस), सिमरन (सिमरन कौर मुंडी) अंजली ( साईं लोंकर) एक ही बिल्डिंग के अलग-अलग फ्लोर पर रहती हैं। शर्मा जी की इन तीनों बीवियों को कानो कान खबर नहीं है कि शिव, राम और किशन तीन अलग आदमी नहीं, बल्कि एक ही आदमी के तीन नाम हैं। दूसरी ओर शर्मा जी की एक गर्लफ्रेंड दीपिका (एली अवराम) भी है। इसी ट्रैक पर धीरे-धीरे आगे खिसकती कहानी के कई मोड़ पर अलग-अलग टिवस्ट आते हैं। तीनों बीवियों के साथ वक्त गुजारने के मकसद से शिव हर बार अलग-अलग बहाने मारता है। एसआरके की मुसीबत उस वक्त बढ़ती है, जब शिव की प्रेमिका दीपिका (एली अवराम) एकबार फिर से उसकी लाइफ में लौटती है। इस बार शर्मा जी अपने पहले प्यार को भी खोना नहीं चाहते और दीपिका से भी जल्दी शादी करने का वादा कर बैठते हैं। दूसरी ओर शिव के माता-पिता (शरत सक्सेना और सुप्रिया पाठक) भी नहीं जानते कि उनके बेटे ने क्या गुल खिला रखे है।

ऐक्टिंग : अगर बिग स्क्रीन पर पहली बार ऐक्टिंग के मापदंड पर रखकर कपिल शर्मा को परखा जाए तो उनकी तारीफ करनी होगी कि उन्होंने कमजोर और लाचार स्क्रिप्ट को अपने दम पर इंटरवल तक खूब संभाला है। हां, कपिल कभी-कभी ७० एमएम के पर्दे पर कॉमिडी नाईट्स जैसा माहौल बना देते हैं। सिमरन कौर मुंडी, साईं लोकर, मंजरी फडनीस, अरबाज खान हर किसी ने अपने किरदार के हिसाब से ठीकठाक काम किया है। यह बात अलग है कि कपिल को छोड़ दूसरे कलाकारों को ज्यादा फुटेज नहीं मिल पाई। वरुण शर्मा ने कमाल का अभिनय किया है।इस वीकेंड आप कपिल के साथ टाइमपास कर सकते हैं।

निर्देशन : अब्बास मस्तान ने अपने ट्रैक से अलग हटकर इस बार ऐसी स्क्रिप्ट पर काम किया जो नब्बे के दशक की याद दिलाती है। इंटरवल से पहले तो फिल्म एक ट्रैक पर ठीकठाक रफ्तार से आगे चलती है, लेकिन बाद में रोचकता कम होने लगती है। अगर अब्बास मस्तान कपिल को उनके टीवी शो से बाहर निकालकर अलग ट्रैक पर फिल्म बनाते तो यकीनन उनकी यह फिल्म कपिल के कॉमिडी शो से बेहतर बनती । कुल मिलकर एक अच्छी कोशिश की गई है

रेटिंग: २ स्टार
कलाकार: कपिल शर्मा, मंजरी फडणिस, सिमरन कौर मुंडी, साईं लोकुर, एली एवराम, अरबाज खान, वरुण शर्मा, सुप्रिया पाठक
निर्देशन: अब्बास-मस्तान

आजकल फिल्मों को बेहतर या और ज्यादा प्रभावी बनाने के लिए कहानी-पटकथा की गुणवत्ता पर द्यान कम, बल्कि कुछ अन्य चीजों का तवज्जो ज्यादा दी जाने लगी है। इनमें से एक चीज है फ्लैशबैक। अगर कुशलता से और जरूरत के हिसाब से रचनात्मक ढंग से इसका इस्मेमाल किया जाए तो फिल्म में मजा आता है, उत्सुकता बनी रहती है। लेकिन अगर कहीं निर्देशक इसका बेजा इस्तेमाल करते हैं या फिर सही ढंग से फिल्म में प्रयोग करने से चूक जाते हैं तो ‘कट्टी बट्टी’ जैसी फिल्म बनती है। वो कैसे, ये जानने से पहले जरा एक नजर फिल्म की कहानी पर।

ये कहानी है माधव काबरा (इमरान खान) उर्फ मैडी और पायल (कंगना रनौत) की। दोनों एक ही कॉलेज में पढ़ते हैं। मैडी को पायल से पहली ही नजर में प्यार हो जाता है। पहली ही मुलाकात में वो पायल को आई लव यू बोल देता है और लगे हाथ शादी का प्रस्ताव भी दे डालता है। नखरेबाज पायल के आगे-पीछे दो-तीन दर्जन चक्कर लगाने के बाद आखिरकार बात बन जाती है और दोनों मुंबई आकर लिव-इन में रहने लगते हैं। एक दिन पायल अचानक घर छोड़ कर चली जाती है। बहुतेरा ढूंढने के बाद भी जब मैडी को पायल नहीं मिलती तो वह एक दिन तनाव में फिनायल पी लेता है। गंभीर हालत में उसे अस्पताल ले जाया जाता है, जहां से डिस्चार्ज होने के बाद उसकी बहन कोयल उसे अपने साथ ले जाती है।

पायल को गए छह हफ्ते हो चुके हैं और मैडी की इस हालत से उसके सारे यार-दोस्त परेशान हैं। एक दिन मैडी को पता चलता है कि पायल दिल्ली में है और उसकी शादी रिक्की से होने वाली है। रिक्की इन दोनों का एक कॉलेज फ्रेंड है, जिसकी कभी मैडी ने खूब पिटाई की थी। बिना किसी नाम पते के मैडी पायल को ढूंढता दिल्ली आ जाता है। काफी जद्दोजेहद के बाद वह किसी तरह वह विवाह स्थल पर भी पहुंच जाता है और शादी को रोकने की कोशिश भी करता है, लेकिन ऐन मौके पर पहुंच कर पायल उसे अपना जबाव एक तमाचे से देती है।

हक्का-बक्का निखिल वहां से वापस चला जाता है, लेकिन उसे अब भी विश्वास है कि पायल उससे अब भी प्यार करती है। कोयल मैडी को फिर समझाती है कि उसे पायल को भूल जाना चाहिए। तभी मैडी को कोयल के बैग से एक कंगन मिलता है, जो कभी मैडी की मां ने पायल को दिया था। मैडी को समझते देर नहीं लगती कि पायल, कोयल और उसके सारे दोस्स उससे कुछ छिपा रहे हैं। आखिर वो कौन सी बात या वजह है, जिससे पायल उससे दूर जाना चाहती है। कोयल जब मैडी को असलियत बताती है तो वह पूरी तरह से टूट जाता है। अब आप कहीं ये तो नहीं समझ रहे कि ये कोई सस्पेंस फिल्म है, जिसमें नायक से नायिका के बारे में कुछ छिपाया जा रहा है।

बेशक, ये एक रोम-कॉम यानी रोमांटिक-कॉमेडी फिल्म ही, लेकिन इस कहानी को जिस ढंग से बयां किया गया है, वो किसी जलेबी से भी ज्यादा टेड़ा-मेढ़ा है। कॉलेज में एक लड़का-लड़की के मिलने का सीन और उनके बीच नया-नया पनपा प्यार देख कर लगता है कि निर्देशक ने लेखन को तवज्जो दी ही नहीं है। अब नायिका, नायक को छोड़ कर चली गयी है और वो देवदास बन गया है। किसी को नहीं पता कि नायिका क्यों और कहां गयी है। ये तमाम बातें बेहद घिसी-पिटी और पुराने ढर्रे के फॉर्मूले से प्रेरित हैं।

न जाने आज की यंग जेनरेशन इसे एक मिनट भी बर्दाश्त कैसे कर पाएगी। मैडी, पायल के जाने से लगभग पागल सा हो गया है, लेकिन पागल लगता नहीं है। वो काम पर जाता है और सिर्फ अपने दोस्त से लड़ता रहता है। एक बच्चे की तरह उसने सबकी जिंदगी हिलाकर रख दी है। मजे की बात है कि इस पूरे झगड़े से पायल का कुछ लेना-देना है ही नहीं, क्योंकि वो सो किसी सीन में है ही नहीं। अगर है तो सिर्फ फ्लैशबैक्स में। केवल यादों में। ये फ्लैशबैक इतनी तेजी से आते-जाते हैं कि अच्छे और प्रभावी कर, बल्कि झुंझलाहट ज्यादा पैदा करते हैं।

उसके ऊपर इमरान का बासी अभिनय। ऐसा लगता ही नहीं कि इस कलाकार की आप कोई नई फिल्म देख रहे हों। कंगना का किरदार उनकी पिछली फिल्म च्तुन वेड्स मनु र्टिन्सज् का शहरी वर्जन है। यानी तनूजा त्रिवेदी कानपुर से निकल मुंबई जाकर कैसी लगेगी, ये दखना है कि आप च्कट्टी बट्टीज् की पायल को देख लीजिए। ये फिल्म अपनी थोड़ी बहुत लाज केवल अंत के 15-20 मिनट में ही बचा पाती है, जब पायल के दूर जाने की असली वजह सामने आती है। उसे भी ज्यादातर दर्शक पहले ही समझ लेंगें, क्योंकि दर्द का ये फॉर्मूला बरसों पुराना है। खुद निखिल आडवाणी इसी फॉर्मूले से कभी रातों रात चमके थे।

फिल्म का गीत-संगीत भी बस औसत दर्जे का ही है। याद नहीं पड़ता कि कोई गीत गुनगुनाने लायक भी हो। फिर भी गीत च्लि टू लिप..ज् का फिल्मांकन आकर्षित करता है। ये एक नए कॉन्सेप्ट का गीत है, जिसे फिल्म च्फुकरेज् के एक गीत लग गयी लौटरी…और फिल्म च्उंगलीज् के एक गीत उंगली पे नचाले…में भी दर्शाया गया है। इस नए कॉन्सेप्ट में जमीन या दिवार पर हल्का-फुल्का सेट डिजाइन, रंगों का इस्तेमाल और ग्राफिक एवं एनिमेशन की मदद से एक स्टोरीबोर्ड तैयार किया जाता है, जिसे संगीत के साथ मैच किया जाता है।

कुल मिलाकर ‘कट्टी बट्टी’ एक बेहद निराश करने वाली फिल्म है, जो पुरानी और बेजान कहानी के अलावा अपने ट्रीटमेंट और बोरिंग अभिनय से केवल सिरदर्द देती है और कुछ नहीं।

रेटिंग : 1.5 स्टार
कलाकार : कंगना रनौत, इमरान खान
निर्देशक : निखिल आडवाणी
निर्माता : सिद्धार्थ राय कपूर
गीत : कुमार
संगीत : शंकर-अहसान-लॉय
कहानी : अंशुल सिंघल, निखिल आडवाणी

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मुंबई। हाल ही में ऋतिक रोशन और सोनम कपूर स्टारर म्यूजिक वीडियो “धीरे धीरे” लॉन्च हुआ था। इस म्यूजिक वीडियो को दर्शकों को अच्छा रेस्पॉन्स मिला और ऋतिक व सोनम की कैमेस्ट्री को भी खूब पसंद किया गया। ऋतिक और सोनम के बाद अब कैटरीना कैफ भी म्यूजिक वीडियो में नजर आ सकती है।

इस म्यूजिक वीडियो को अहमद खान कोरियोग्राफ करेंगे। एक अंग्रेजी वेबसाइट के मुताबिक ये एक पुराना क्लासिकल सॉन्ग का रिमिक्स वर्जन होगा, जिसमें कैटरीना अकेली नजर आएंगी। अहमद ने इस बारे में संपर्क किया है और वे इसमें काफी दिलचस्पी भी ले रही हैं।

कैटरीना पहले ये सॉन्ग सुनेगी और अगर उन्हें ये पसंद आया तो वे ये म्यूजिक वीडियो करेंगी। अब इसमें उनके कथित ब्वॉयफ्रेंड रणबीर कपूर भी मदद कर सकते हैं, क्योंकि उनको पुराने क्लासिक्स बहुत पसंद हैं। ऋतिक-सोनम से पहले टाइगर श्रॉफ और कृति सैनॉन अरिजीत सिंह के म्यूजिक वीडियो “चल वहां जाते हैं” में नजर आ चुके हैं। टाइगर इससे पहले आतिफ असलम के सॉन्ग “जिंदगी आ रहा हूं मैं” भी कर चुके हैं।

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नई दिल्ली। पैगंबर मोहम्‍मद पर बनी फिल्‍म में संगीत देने पर मिले फतवे का जवाब संगीतकार रहमान ने फेसबुक पर दिया है। रहमान ने एक खुला पत्र लिखकर इसे फेसबुक पर पोस्‍ट किया है। उन्‍होंने कुरान का हवाला देते हुए लिखा कि मैंने सिर्फ फिल्‍म में संगीत दिया है। मैं इस्लाम का विद्वान नहीं हूं। रहमान ने कहा कि न उन्होंने ये फिल्म बनाई है न निर्देशन किया है।

बता दें कि मुसलमानों की एक संस्था रजा अकादमी ने इस फिल्म की कड़ी आलोचना की है और फिल्म पर प्रतिबंध की मांग करते हुए गृह मंत्री राजनाथ सिंह और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को पत्र भी लिखा है। रजा एकेडमी के सदस्य मौलाना नूरी ने रहमान के फेसबुक पोस्ट का जवाब दिया है।

मौलाना नूरी ने कहा कि हम ए आर रहमान के जवाब का स्वागत करते हैं। उन्होंने माना कि उनको ज्यादा जानकारी नही थी। पर इसके बाद ए आर रहमान को कलमा तो पढ़ना ही चाहिए। कलमा पढ़ने में क्या दिक्कत है। हम फतवा वापस नहीं लेंगे।

वहीं बॉलीवुड भी ए आर रहमान के समर्थन में आ गया है। कई कलाकारों ने रहमान का साथ देते हुए फतवे पर सवाल उठाए हैं। निर्माता अशोक पंडित ने लिखा कि मुस्लिम सेकुलरवादी और तथाकथित बुद्धिजीवी चुप क्यों हैं। वही शबाना आजमी ने कहा कि रहमान इसकी कतई चिंता न करें, मुझ पर भी फतवा भेजा गया था।

रोहित तिवारी/ मुंबई ब्यूरो। बॉलीवुड इंडस्ट्री के नामचीन निर्देशक निखिल आडवाणी ऑडियंस को पहले “पटियाला हाउस”, “डी-डे” जैसी कई फिल्में दे चुके हैं। अब वे अपने चाहने वालों की बीच फिल्म “हीरो” लेकर आए हैं। यह एक रोमांटिक और एक्शन फिल्म है, जिसमें निखिल ने अपने गजब के निर्देशन से ऑडियंस को काफी कुछ मसाला देने की भरपूर कोशिश की है।

कहानी:
मायानगरी को दमदार तरीके से दिखाते हुए, बोले तो… हर वो चीज जिससे है मुंबई की पहचान, अब शुरू होती है कहानी…। सूरज (सूरज पंजोली) 35 साल के हो गए हैं, लेकिन उनकी शादी नहीं हुई है। उसे कई लोग समझाते हैं, लेकिन वो अपनी वही पुरानी ख्यालों में बिजी रहता है। वहीं दूसरी तरफ राधा (अथिया शेट्टी) आईजी माथुर (तिग्मांशु धूलिया) की बेटी दोनों ही अपने सच्चे प्यार की तलाश में निकल पड़ते हैं। इधर, सूरज यानी सूर्यकांत पाशा (आदित्य पंचोली) का बेटा होता है, जो गलत तरीके से आई आमदनी को वह गरीब और लाचार लोगों में बांटता है। लेकिन किन्हीं कारणों से पाशा जेल में होता है। अब आईजी की परेशानी के तहत पाशा अपने बेटे सूरज का यूज करता है और पाशा को लगता है कि वह सफल हो गया, जबकि सूरज को राधा से हकीकत में प्यार हो जाता है और वह राधा के कहे अनुसार ही करता है। लेकिन आईजी माथुर सूरज को रंगे हाथों पकड़ लेते हैं और इसी के साथ फिल्म में तरह-तरह के ट्विस्ट आते हैं और कहानी एक गजब मोड़ के साथ आगे बढ़ती है।
अभिनय:
बी-टाउन के नवोदित एक्टर सूरज पंचोली ने वाकई में अपने अभिनय में गजब का प्रयास किया है और साथ ही अथिया शेट्टी ने भी अपनी पहली ही फिल्म से यह साबित कर दिखाया है कि वाकई में उनके खून में अभिनय का अच्छा कीड़ा है। साथ ही ये दोनों नवोदित स्टार्स ऑडियंस की वाहवाही लूटने में भी काफी हद तक सफल से दिखाई दिए। जहां शरद केलकर, तिग्मांशू धूलिया और आदित्य पंचोली अपने-अपने अभिनय में बाजी मारते दिखाई दिए, वहीं सलमान खान भी आखिरी में एक गाने की बदौलत ही अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में कुछ हद तक सफल रहे। लेकिन शरद व तिग्मांशू को अभिनय में कुछ और बेहतर करने की जरूरत सी भी दिखाई दी। इसके अलावा सलमान खान ने अपने “मैं हूं हीरो तेरा” गाने से ऑडियंस को इस फिल्म की ओर आकर्षित करने का दमदार प्रयास भी किया है।
निर्देशन:
निखिल आडवाणी इस फिल्म से अपने चाहने वालों को आकर्षित करने में काफी हद तक सफल रहे। इस तरह से उन्होंने साबित कर दिखाया है कि अगर कहानी बेहतर हो तो फिल्म में न्यू कमर्स को भी दमदार मौका दिया जा सकता है। उन्होंने अपने निर्देशन में रोमांस और एक्शन का गजब तड़का लगाया है, लेकिन कहीं-कहीं पर वे थोड़ा असफल भी रहे। इस रोमांटिक फिल्म में निखिल ने वाकई में कुछ अलग करने की दमदार कोशिश की है, इसीलिए वे ऑडियंस की वाहवाही बटोरने में भी सफल रहे। कुछ एक जगह भले ही इनकी स्क्रिप्ट थोड़ी डगमगाती सी दिखाई दी, लेकिन इसकी कहानी ने ऑडियंस को फिल्म के आखिर तक बांधे रखा। वैसे उन्होंने इससे यह तो जरूर प्रूव कर ही दिखाया है कि बॉलीवुड के प्रेमी आज भी रोमांटिक और बेहतरीन कहानियों के कायल हैं। बहरहाल, कॉमर्शियल अंदाज की बात की जाए तो सिनेमेटोग्राफी भी कुछ खास करने में थोड़ा असफल भी रही है। साथ ही पूरी फिल्म में कहीं न कहीं कोरियोग्राफी की कमी भी नजर आई। संगीत (जिगर, अमाल अलिक, मीत ब्रदर्स अंजान, जस्सी कात्याल और सचिर्न) तो ऑडियंस को भाता भी है, लेकिन गाने की तुलना में थोड़े और प्रयास की जरूरत भी नजर आई।
क्यों देखें:
नवोदित स्टार्स के अभिनय और एक दमदार रोमांटिक विथ एक्शन फिल्म देखने के लिहाज से सिनेमा घरों का रुख किया जा सकता है। इसके अलावा सलमान खान के चाहने वालों को भी उदास नहीं होना पड़ेगा। आगे इच्छा आपकी…!
बैनर : सलमान खान फिल्म्स, इरोज इंटरनेशनल, मुक्ता आट्र्स लि. और इमेय एंटरटेंमेंट प्रा. लि.
निर्माता : सलमान खान और सुभाष घई
निदेशक : निखिल आडवाणी
स्टोरी : सुभाष घई
जोनर : रोमांस
गीतकार : सलमान खान, राहत फतेह अली खान, मीत ब्रदर्स अंजान, भूमि त्रिवेदी, सुनैना सिंह, मोहित चौहान, प्रिया पांचाल, अर्पिता चक्रवर्ती, तनिष्का, अमाल मलिक, पलक मुच्छल, राहुल पांडे, शालमली खोलगडे, दिव्या कुमार, जिगर, देव नेगी, शिप्रा गोयल और अरमान मलिक।
संगीत: जिगर, अमाल अलिक, मीत ब्रदर्स अंजान, जस्सी कात्याल और सचिन।
स्टारकास्ट : सूरज पंचोली, अथिया शेट्टी, शरद केलकर, सलमान खान, तिग्मांशू धूलिया आदित्य पंचोली।

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फिल्म वेलकम बैक का एक बार फिर दर्शकों ने वेलकम किया है। पहले ही हफ्ते में फिल्म १०० करोड़ कमाने के करीब पहुंच चुकी है। उदय शेट्टी और मजनू भाई ने एकबार फिर लोगों को खूब हंसाया है।

वेलकम का सीक्वल इस फिल्म में अक्षय कुमार की जगह जॉन अब्राहम को लिया गया था। जबकि अनिल कपूर और नाना पाटेकर वेलकम वाले किरदार में ही नजर आए।

चौंकाने वाली बात ये है कि वेलकम बैक भारत ही नहीं विदेशों में भी अच्छा बिजनेस कर रही है। शुक्रवार को रिलीज हुई इस फिल्म ने तीन दिन में ही 51 करोड़ रुपये कमा डाले।

कहते हैं कि ठोकर लगने के बाद इंसान की अक्ल ठिकाने आ जाती है। अनीज बज्मी के साथ भी यही हुआ लगता है। वर्ना कॉमेडी फिल्मों के नाम पर च्नो प्रॉब्लमज् (2010) और च्थैंक्यूज् (2011) जैसा सिरदर्द परोसने वाले अनीस को तो लोग कब का भूल गये थे। अब लगभग चार साल के बाद वह च्वैलकम बैकज् के साथ लौटे हैं, जो 2007 में आयी उन्हीं की फिल्म च्वैलकमज् का सीक्वल है।

इस साल आयी फिल्म च्तनु वेड्स मनु रिटर्न्सज् के बाद ये दूसरी ऐसी फिल्म कही जा सकती है, जिसका अपने पहले भाग से सीधा संबंध है। न केवल किरदारों के मामले में, बल्कि कहानी के स्तर पर भी यह सही मायने में एक सीक्वल लगता है।

इस दूसरे भाग में मजनूं भाई (अनिल कपूर) भी है और उदय शेट्टी (नाना पाटेकर) भी। फर्क है तो बस इतना कि अब ये दोनों भाई लोग, भाईगिरी छोड़ कर गांधीगिरी करने लगे हैं। सात साल पहले अपनी बहन की शादी के बाद इन्होंने सारे बुरे काम छोड़ दिये हैं। हालत ये हो चली है कि छोटे-मोटे गुंडे भी अब इनसे हफ्ता वसूलने लगे हैं। ये सब देख मजनूं से तो रहा नहीं जाता है और अपने पुराने दिन याद कर करके दिन में बीस बार उसकी रगों में उबाल आता रहता है। हालांकि ऐसा ही उबाल कभी-कभी उदय की रगों में भी आता है, लेकिन उसका चेला बल्लू (मुश्ताक खान) भाई कंट्रोल, भाई कंट्रोल कहकर उसे शांत करा देता है।

एक दिन उदय-मजनूं को ये अहसास होता है कि अब उन्हें भी शादी कर लेनी चाहिए। और इस अहसास की वजह है राजकुमारी ऑफ नजफगढ़ (अंकिता श्रीवास्तव), जिसे देखते ही दोनों को उससे प्यार हो गया है। लेकिन इस राजकुमारी की असलियत वे दोनों नहीं जानते। ये राजकुमारी, बेटी है महारानी ऑफ नजफगढ़ (डिंपल कपाड़िया) की, जिनके दिन आजकल मुफलिसी में कट रहे हैं।

अब कहानी में ट्विस्ट ये है कि मजनू-उदय अपनी शादी के बारे में सोच ही रहे हैं कि अचानक से उदय का पिता आ जाता है। साथ में ले आता है इन दोनों की एक बहन, जिसका नाम है रंजना (श्रुति हसन)। अब उन्हें इसकी शादी करानी है। हैरान-परेशान उदय-मजनूं पहुंच जाते हैं डॉ. घुंघरू (परेश रावल) के यहां। उन्हें लगता है कि शरीफ लड़का तो उनके घर ही मिलेगा। इधर, डॉ. घुंघरू के घर भी एक रेडीमेड बेटा तैयार बैठा है। नाम है अज्जू भाई (जॉन अब्राहम), जो छटा हुआ गुंडा है। अज्जू, मिसेज घुंघरू (सुप्रिया कार्निक) के गुजरे जमाने की एक च्भूलज् की देन है, जिसकी झल्लाहट डॉ. घुंघरू अभी ठीक से निकाल भी नहीं पाता कि धड़ाधड़ा नई-नई मुसीबतें आने लगती हैं।

उदय-मजूनं, अज्जू की असलियत से अनजान हैं। लेकिन ये राज अज्जू-रंजना की सगाई वाले दिन खुल जाता है। सगाई टूट जाती है। कहानी आगे बढ़ती वॉन्टेड (नसीरूद्दीन शाह) की धमाकेदार एंट्री के साथ, जिसके इकलौते गंजेड़ी बेटे सनी (शाईनी आहूजा) का दिल रंजना पर आ गया है। उदय-मजनूं के लिए डबल मुसीबत हो जाती है। वो तो अज्जू जैसे गुंडे से पीछा छुड़ा कर आये थे, यहां तो डॉन का बेटा पीछे पड़ गया है। अब बेचारे दोनों करें तो क्या करें..

करीब आधा दर्जन लोगों की टीम के साथ निर्देशक ने कहानी तो लगभग ठीक-ठीक ही गढ़ ली है। ढेर सारे कलाकारों को संभाल लेना अनीस की खासियत रही है। उन्हें लगता है कि इससे दर्शकों को मनोरंजन का डोज बराबर मिलता रहता है, इसलिए परिचय और किरदारों को पुख्ता करने के चक्कर में उन्होंने समय नहीं गंवाया है और पहले ही सीन से कॉमेडी का भरपूर अटैक किया है। इस हमले में ग्लैमर पक्ष हावी रहा है, जिसकी बौछार की जिम्मेदारी अंकिता और श्रुति पर डाली गयी है। वैसे भी इन दोनों का ही अभिनय सबसे ज्यादा निराश करने वाला है।

च्वैलकम बैकज् की खासियत है, जिसके चुटीले जोक्स। नाना का ये कहना- च्बेटा गन और गुण की स्पैलिंग एक ही होती है, ध्यान रखिये…ज् नसीर साहब का एक संवाद- च्अरे हम तो शिकार पर कई दिनों से गए ही नहीं, फिर से गोली किसने चला दी…ज् या फिर परेश रावल का ये कहना- च्अरे जब मैंने वोट दिया ही नहीं तो मेरा मुख्यमंत्री कहां से आया…ज् ऐसे और भी ढेर जोक्स है, जो पल पल में हंसाते-गुगुदाते हैं।

इसके अलावा फिल्म में नाना-अनिल की कैमिस्ट्री भी जबरदस्त दिखती है। जैसे कब्रिस्तान का एक सीन। ज्योतिषी वाला सीन, जिसमें ये दोनों अपने-अपने ढंग से कुंडलियां सेट करवाने पर जोर डालते हैं। इसके अलावा एक अंधे डॉन के रूप में नसीरूद्दीन शाह ने भी बांधे रखा है। इंटरवल के बाद कॉमेडी का तंबू उन्होंने ही थामे रखा है। दुबई के आलीशान होटलों और निजी आईलैंड्स पर शूट किये गे सीन्स अच्छे लगते हैं। बड़े परदे पर मुफ्त का ये पर्यटन बुरा नहीं है।

हां, कमी खलती है तो फिल्म की लंबाई की, जिस पर कई जगह बड़े प्यार से कैंची चलाई जा सकती थी। खासतौर से क्लाईमैक्स में। यहां लंबे सीन्स है। ढाई घंटे से ऊपर की यह फिल्म अपने गीत-संगीत से बांध नहीं पाती। गीत केवल देखने में आकर्षित करते हैं। एक-दो गीत कम भी किये जा सकते थे, जिनके बोल, चालू और कहीं-कहीं भद्दे किस्म के हैं।

बहुत ज्यादा लॉजिक वगैराह के चक्कर में न पड़ें तो आजकल ऐसी ही कॉमेडी फिल्में आ रही है, जिनकी कहानी में च्तुकज् की गुंजाइश न के बराबर रहती है। वैसे भी हमारी हिन्दी फिल्मों में सिर पर चोट लगने से याद्दाश्त आती-जाती रहती है, आंखें भी खोई-पायी गयी है और मेले में बिछुड़ कर सालों बाद फिर से मिलने की कहानियां तो सुल्वर जुबली हुई हैं। ये फिल्म भी कुछ ऐसे ही अनपचेबल रास्तों से होकर गुजरती है, इसलिए इसे च्वैलकम बैकज् कहने में कोई बुराई तो नहीं दिखती।

रेटिंग : 3 स्टार
कलाकार : अनिल कपूर, नाना पाटेकर, जॉन अब्राहम, श्रुति हसन, परेश रावल, डिंपल कपाडिम्या, नसीरूद्दीन शाह, शाईनी आहूजा, अंकिता श्रीवास्तव, सुप्रिया कार्निक, आदि ईरानी, मुश्ताक खान
निर्देशन : अनीस बज्मी
निर्माता : सुनील ए. लुल्ला, फिरोज नाडियाडवाला
कहानी : अनीस बज्मी, राजीव कौल
संवाद : राज शांडिल्य
पटकथा : राजीव कौल, प्रफुल्ल पारिख, राजन अग्रवाल, अनीज बज्मी

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62वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में ‘क्वीन’ व ‘हैदर’ का जलवा४ चैतन्य तम्हाने की ड्रामा फिल्म ‘कोर्ट’ को सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार ४ सर्वश्रेष्ठ निर्देशक व अभिनेता का खिताब बांग्ला व कन्नड़ फिल्मों के नाम

४ विशाल भारद्वाज को सर्वश्रेष्ठ संगीतकार के लिए खिताब ४ प्रियंका चोपड़ा अभिनीत ‘मैरीकॉम’ को सर्वश्रेष्ठ लोकप्रिय फिल्म का खिताब ४ राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी 3 मई को विजेताओं को करेंगे सम्मानित

फिल्म ‘क्वीन’ में दमदार अभिनय के लिए अभिनेत्री कंगना रनौत को सर्वश्रेष्ठ अदाकारा के 62वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के लिहाज से चुना गया है, वहीं विशाल भारद्वाज की ‘हैदर’ मंगलवार को घोषित पुरस्कारों में पांच पुरस्कारों के साथ छाई रही। सर्वश्रेष्ठ फिल्म के खिताब के लिए चैतन्य तम्हाने की बहुभाषी ड्रामा फिल्म ‘कोर्ट’ को चुना गया है वहीं सर्वश्रेष्ठ निर्देशक व सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का खिताब क्रमश: बांग्ला व कन्नड़ फिल्मों के नाम रहा। तम्हाने ने से कहा कि यह पुरस्कार एक तरह का प्रोत्साहन है। ‘क्वीन’ ऐसी लड़की की कहानी है जो अपने मंगेतर से धोखा खाने के बाद अकेले ही विदेश में हनीमून मनाने चली जाती है। कंगना को फिल्म ‘फैशन’ के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिल चुका है। विकास बहल निर्देशित इस फिल्म को सर्वश्रेष्ठ हिंदी फिल्म का पुरस्कार मिला। शेक्सपीयर के उपन्यास ‘हेमलेट’ पर बनी शाहिद कपूर अभिनीत ‘हैदर’ को भी पांच पुरस्कारों के लिए चुना गया है। विशाल भारद्वाज को सर्वश्रेष्ठ संगीतकार के लिए खिताब मिलेगा। सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार बांग्ला फिल्मकार श्रीजीत मुखर्जी (चतुष्कोण के लिए) की झोली में गया। भारद्वाज को ‘हैदर’ के लिए सर्वश्रेष्ठ संवाद के सम्मान से भी नवाजा जाएगा।

कंगना को सर्वश्रेष्ठ अदाकारा का खिताब …वहीं फिल्म के गीत ‘बिस्मिल’ के लिए सुखविंदर सिंह सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायक चुने गए। फिल्म को दो अन्य पुरस्कार कोरियोग्राफी व परिधान डिजाइन की श्रेणी में दिए जाएंगे। भारद्वाज ने कहा कि राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने से आप और अधिक निडर हो जाते हैं। कन्नड़ फिल्म ‘नानू अवनल्ला अवालू’ में किन्नर का भावनात्मक किरदार अदा करने के लिए संचारी विजय को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के खिताब के लिए चुना गया। ‘चतुष्कोण’ को सर्वश्रेष्ठ सिनेमेटोग्राफी व स्क्रीनप्ले (मूल) के लिए भी सम्मानित किया जाएगा। प्रियंका चोपड़ा अभिनीत ‘मैरीकॉम’ को सर्वश्रेष्ठ लोकप्रिय फिल्म का खिताब मिलेगा। प्रियंका ने ट्वीट किया कि मुझे हारना पसंद नहीं है। सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशन की श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ गीत के हकदार भारद्वाज रहे, वहीं मलयाली फिल्म ‘नाइनटीन ऐटी थ्री’ के लिए गोपी सुंदर को सर्वश्रेष्ठ पार्श्व संगीत के राष्ट्रीय पुरस्कार से पुरस्कृत किया जाएगा। सर्वश्रेष्ठ गीतकार के सम्मान से तमिल फिल्म ‘सैवम’ में गीत लिखने वाले एनए मुथुकुमार को पुरस्कृत होंगे। इसके गीत ‘अझागु’ के लिए गायिका उत्तरा उन्नीकृष्णन सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायिका का खिताब पाने में सफल रहीं। सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री के राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए हरियाणवी अदाकारा बजिंदर कौर को चुना गया। किसी निर्देशक की पहली सर्वश्रेष्ठ फिल्म के लिए इंदिरा गांधी पुरस्कार बांग्ला फिल्म ‘आशा जावार माझे’ के लिए आदित्य विक्रम सेनगुप्ता के नाम रहा। पर्यावरण संरक्षण की श्रेणी में सबसे अच्छी फिल्म मलयालम भाषा की ‘उत्ताल’ रही। इसे एक और पुरस्कार के लिए चुना गया है। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी आगामी तीन मई को विजेताओं को सम्मानित करेंगे। कांग्रेस ने प्रवक्ताओं व टेलीविजन पैनलिस्टों की टीम का किया विस्तार …अन्य प्रवक्ताओं में कर्नाटक सरकार में मंत्री दिनेश गुंडु राव शामिल हैं। इसके अलावा भक्त चरण दास और मीम अफजल की कई महीने बाद एक बार फिर प्रवक्ता के रूप में वापसी हुई है। नए प्रवक्ताओं की सूची में राज्यसभा सांसद पीएल पुनिया, राजीव गौड़ा और रजनी पाटिल और पूर्व सांसद मधु गौड़ याक्षी और विजय इंदर सिंगला और प्रियंका चतुर्वेदी शामिल हैं। यह लोग पार्टी प्रवक्ताओं अभिषेक सिंघवी, अजय कुमार, ज्योतिरादित्य सिंधिया, पीसी चाको, राजबब्बर, रीता बहुगुणा जोशी, संदीप दीक्षित संजय झा, शक्ति सिंह गोहिल और शोभा ओझा की मौजूदा टीम के अतिरिक्त पार्टी प्रवक्ता होंगे। पार्टी के नए मीडिया पैनलिस्टों की सूची में मनीष तिवारी, राजीव शुक्ला के अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री सुशील कुमार शिंदे की बेटी प्रणीति शिंदे, जम्मू कश्मीर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शैफुद्दीन सोज के पुत्र सलमान सोज, स्वर्गीय विलासराव देशमुख के पुत्र अमित देशमुख, पूर्व उपराष्ट्रपति कृष्णकांत के पुत्र रश्मीकांत और वीएन गाडगिल के पुत्र अनंत गाडगिल शामिल हैं। एसवी रमनी एआईसीसी के मीडिया विभाग के नए सचिव होंगे जबकि प्रणव झा और आशीष दुआ को मीडिया संयोजक बनाया गया है।

कंगना रनौत हाल ही में पेरिस पहुंची हुई थीं। मौका था पेरिस फैशन वीक का और इत्तेफाक से उन्हें वहां डायरेक्टर विशाल भारद्वाज मिल गए, जिनसे वह 12 साल पहले से ही प्रभावित हैं। ऐसे में कंगना ने विशाल से हुई मुलाकात को यादगार बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। वह विशाल को डिनर पर ले गईं और वहां उन्हें सबसे महंगी शराब पिलाई!

विशाल ने खुद इस बात की पुष्टि की। विशाल ने कहा, ‘हां, वो मुझे डिनर पर लेकर गई थीं और उन्होंने मुझे वहां की सबसे महंगी शराब पिलाई। वह सबसे बेहतरीन कलाकारों में से एक हैं। मैं उनकी प्रतिभा की सराहना करता हूं।’

चर्चा है कि कंगना, विशाल की अगली फिल्म में लीड रोल निभाने वाली हैं, लेकिन विशाल ने इससे इंकार कर दिया। उन्होंने कहा, ‘हम भविष्य में एक साथ फिल्म करेंगे, लेकिन अभी तक मेरी अगली फिल्म को लेकर कुछ भी तय नही है।’ कंगना ने 12 साल पहले विशाल की फिल्म ‘मकबूल’ देखी थी। तभी से वो उनसे बहुत प्रभावित हैं। अब विशाल को प्रभाबित करने के लिए कंगना को कुछ तो करना पड़ेगा।

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अनुष्का शर्मा की निर्माण संस्था ‘क्लीन स्लेट’ की पहली फिल्म ‘एनएच 10’ पहले 6 मार्च को रिलीज होनी थी लेकिन अब आगे बढ़ गई है। अब फिल्म 13 मार्च को सिनेमाघरों में पहुंचेगी। इसके प्रचार में अनुष्का व्यस्त हैं। इसी सिलसिले में खूबसूरतपेंटिंग्स, एंटीक वस्तुओं और फर्नीचर से सजे 20वें फ्लोर पर स्थित उनके घर में मुलाकात हुई। इस दौरान उन्होंने अपनी फिल्म, करियर, घर, विराट कोहली से रिश्ते और अन्य पहलुओं पर बात की। प्रस्तुत हैं अंश:

>>घर बहुत खूबसूरत डिजाइन किया है आपने।

मैंने पहले भी घर खरीदा था, लेकिन उस समय हमें आर्मी से मिले घर से शिफ्ट करना था तो ज्यादा कुछ नहीं कर पाई। इस घर को इत्मीनान से बनाया है। एक इंटीरियर डिजाइनर साथ था। इसके बावजूद मैं कई रेफरेंस जमा करती थी। जब भी किसी अच्छे घर का इंटीरियर देखती और उसमें से जो मुझे पसंद आता उसकी तस्वीरें खीच लेती थी। पेरिस और अन्य जगहों पर ट्रैवल के दौरान मैंने कई तस्वीरें खींची थीं और उन्हें कैनवास पर बनवाया।

>>’एनएच10′ की इंटेंसिटी में खुद को कैसे उतारा?

मीरा एक इमोशनल और नॉर्मल लड़की है लेकिन परिस्थिति उसे कैसे बदल देती है, यही फिल्म की कहानी है। हम सब में एक फाइटर छिपा है जो परिस्थिति के अनुसार खुद को बदल लेता है। ये निजी संघर्ष हर इंसान की जिंदगी में अलग तरह से अनुभव करता है, वही हम फिल्म में दिखा रहे हैं। हमने फिल्म में सब रियल रखा है। नवदीप जैसे निर्देशक हैं उन्हें सब ऑर्गेनिक पसंद है। एक्शन-ड्रामा सब कुछ रियल लगेगा आपको। जब मैं शूटिंग करती थी तो मीरा ही होती थी अनुष्का नहीं। कई इंटेंस दृश्यों के बाद एक-दो दिन के लिए मुझे तनाव हो जाता था। मेरी एनर्जी कम हो जाती थी। राजस्थान के दूर-दराज के गांव में मैं सिर्फ मीरा बन कर रही।

प्रोमो में हिंसा कुछ ज्यादा ही दिख रही है?

फिल्म की हिंसा एक घटना है। फिल्म तो रोड ट्रिप है। एक जोड़ा रोजमर्रा की जिंदगी से ब्रेक लेकर रोड ट्रिप पर जा रहा है लेकिन रास्ते में उनके साथ कुछ ऐसा होता है जो उनकी जिंदगी को उलझा देता है। यह कहानी का दूसरा पहलू है जिसमें एक्शन जाता है।

क्या तैयारी की एक्शन के लिए?

एक्शन बहुत रियल था, बहुत चैलेंजिंग था। मुझे मेहनत करनी थी अपने स्टेमिना पर। इसके लिए मैंने इंटरवल ट्रेनिंग ली जिसमें आप बहुत तेज भागते हो और एकदम से रुक जाते हो। हार्टबीट तेज होती है और स्टेमिना बढ़ाती है। फिजिकली फिल्म बहुत डिमांडिंग रही, इतना कि मुझे कमर में तकलीफ हो गई। उबड़-खाबड़ रास्ते पर भागना मुश्किल था। मैंने तैयारियों में बहुत एनर्जी लगाई। बाकी सब हम सेट पर तय करते थे कि दृश्य का एक्शन कैसा हो। एक्शन डिज़ाइन किया गया था लेकिन तयशुदा होकर जगह के अनुरूप हमने एक्शन किया। एक्शन डायरेक्टर सेट पर रहा है लेकिन स्क्रिप्ट की तरह इसे नहीं शूट किया गया।

इस एक्शन के साइड इफेक्ट भी रहे कुछ?

एक्शन दृश्य के बाद मुझे ‘दिल धड़कने दो’ का गाना शूट करना था। यह गाना भी आसान नहीं था, मुझे कमर में बेहद तकलीफ थी। पैर सुन्न हो जाता था। कमर में जब अति में दर्द होता है तो वह पूरे पैर में उतर जाता है। जोधपुर से 60 किलोमीटर दूर शूटिंग थी ‘एनएच 10’ की तो जोधपुर से एक कायरोप्रेक्टर आते थे मुझे ट्रीटमेंट देने के लिए। उन्होंने मुझे ट्रीटमेंट दिया कमर और गर्दन के लिए। फिर दूसरी फिल्म का गाना शूट करने के दौरान भी मुझे सावधानियां रखनी पड़ीं।

आपकी पहली ‘ए’ सर्टिफिकेट वाली फिल्म है ये।

एडल्ट इसलिए क्योंकि कई एलिमेंट्स फिल्म में होते हैं जिन्हें रियल रखना जरूरी है। लोग जिंदगी में गालियां देते हैं न। कोई पहले आप-पहले आप कहकर गाली देने का इंतजार नहीं करता। हम इसमें बीप लाकर दर्शकों को डिस्ट्रैक्ट नहीं करना चाहते। जैसे आप यूट्यूब पर वीडियो देख रहे हों तब डिस्ट्रेक्शन जाता है। नो स्मोकिंग का टैग भी स्क्रीन पर ध्यान बंटाता है इससे तो एडल्ट सर्टिफिकेट में जाना बेहतर है।

‘पीके’ में अच्छी एक्टिंग के बावजूद चर्चा आपके रिश्तों (विराट कोहली से) की ज्यादा रही।

निजी रिश्तों की चर्चाएं आपके काम से सबका ध्यान हटा देती हैं। लेकिन रिश्तों के जिक्र को पूरी तरह हटा भी नहीं सकते। मैं इसी लिए अपनी निजी जिंदगी के बारे में बात नहीं करती। सवाल पूछे जाते हैं लेकिन मैं उनसे बचती हूं। आपका काम है सवाल पूछना और मेरा ये ध्यान रखना कि मैं उस बारे में कितना सीमित बोलूं या बोलूं। मेरा ध्यान अपने काम पर ज्यादा है। रिश्तों की बातें तो अपनी फैमिली और दोस्तों से करूंगी, दुनिया को जानना जरूरी नहीं है। और आप देखिए मैं छुप-छुप के तो नहीं जी रही। मेरे स्वभाव में नहीं है इसलिए मैं झूठ भी नहीं बोल रही। मैं खुलेपन में जीती हूं, खुल के बोलती हूं, मेरा छिपाने का कोई एजेंडा नहीं रहता।

क्रिकेट मैच के दौरान इंडिया ही नहीं विश्व भर के दर्शकों का फोकस आप पर जाता है।

मुझे ये बातें प्रभावित नहीं करतीं। मैं अपना काम ईमानदारी से कर रही हूं न, निजी जिंदगी में जो भी करूं उसको लेकर कोई क्या सोच रहा है उसकी फिक्र नहीं करती। ही मैं इन बातों में खुद को ज्यादा इन्वॉल्व करती हूं। मेरा लक्ष्य स्पष्ट है कि मुझे अपनी निजी और प्रोफेशनल लाइफ दोनों ही में आगे बढ़ना है।
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