Friday, October 19, 2018
बिजनेस

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नई दिल्ली। लग्जरियस कार बनाने वाली कार कंपनी बीएमडब्ल्यू ने भारत में नई बीएमडब्ल्यू 3 सीरीज की ग्रैन तुरिस्मो को भारतीय बाजार में लॉन्च किया। भारत में ही तैयार इस नई कार की एक्स शोरूम कीमत 42.75 लाख रूपए है।
कंपनी ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि यह भारत के चेन्नई के करीब सिंगापेरमल कोइल में महिन्द्रा वल्र्ड सिटी के बीएमडब्ल्यू संयंत्र में निर्मित की गई है। नई कार में कपल स्टाईल रूफलाईन, फ्रेमलेस साइड विंडो, बड़ा लगेज कंपार्टमेंट सहित कई नए फीचर्स भी दिए गए हैं।

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हेलसिंकी। नोकिया के टेलीकॉम नेटवर्क इक्विमेंट डिवीजन के मुखिया भारतवंशी राजीव सूरी नोकिया हैंडसेट के नए सीईओ बन सकते हैं। नोकिया को कुछ दिन पहले ही माइक्रोसॉफ्ट ने खरीदा है। वहीं माइक्रोसॉफ्ट की कमान सत्य नाडेला के हाथों में है।
फिनलैण्ड के एक अखबार हेलसिंगिन सानोमत के अनुसार सूरी के नए सीईओ बनने की सबसे ज्यादा संभावना है। अगर ऎसा होता है तो सूरी वर्तमान सीईओ स्टीवन इलोप की जगह लेंगे। इलोप नोकिया और माइक्रोसॉफ्ट की 7.5 बिलियन डॉलर की हैंडसेट डील पूरी होने के बाद वापिस माइक्रोसॉफ्ट में लौटेंगे।
अखबार के अनुसार दोनों कंपनियों के बीच ये डील मार्च के अंत तक पूरी होने की उम्मीद है। इस डील के पूरी होने के कुछ दिनों बाद नोकिया का बोर्ड नए सीईओ की घोषणा कर देग। सूरी का नाम इस पद के लिए नोकिया सॉल्युशन एंड नेटवर्क को जोरदार योजना के तहत फायदे में लाने के बाद सबसे आगे है।
हालांकि नोकिया ने सीईओ चयन प्रक्रिया पर कमेंट से इनकार किया है। पिछले कुछ महीनों से अस्थाई सीएफओ टिमो इहामुओटिला कंपनी को चला रहे हैं।

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नई दिल्ली। रंगों के त्यौंहार होली पर ग्राहकों की पसंद को ध्यान में रखते हुए महिन्द्रा एंड महिन्द्रा ने अपनी एसयूवी कार महिन्द्रा एक्सयूवी 500 के नए कलर जारी किए हैं।
फीचर्स तथा वेरियंट्स के अनुसार महिन्द्रा एक्सयूवी 500 चार वेरियंट्स में उपलब्ध है- डब्लू 4, डब्लू 6, डब्लू 8 तथा डब्लू 8 ऑल व्हील ड्राइव।
कंपनी ने डब्लू 4 वेरियंट में डॉल्फिन ग्रे कलर दिया है। जबकि डब्लू 6 वेरियंट में स्टेन व्हाइट तथा डॉल्फिन ग्रे कलर जारी किए हैं। जबकि टॉप एंड डब्लू 8 वेरियंट को आर्कटिक ब्लू तथा ऑपूलेंट पर्पल रंगों में उतारा है।
हालांकी रंगों के अलावा एक्सयूवी 500 में और कोई बदलाव नहीं किए गए हैं। यह पहले वाले 2.2 लीटर एमह्वाक डीजल इंजन के साथ आ रही है जो 140 बीएचपी का पावर तथा 330 एनएम का टॉर्क देता है।
महिन्द्रा एक्सयूवी 500 की सबसे खास बात ये है इसके सारे वेरियंट् एबीएस तथा एयरबैग जैसे फीचर्स के साथ आते है। कंपनी इस एसयूवी को भारत समेत ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण में बेच रही है।

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नई दिल्ली।

सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत को जमानत मिलेगी या नहीं,इस पर फैसला गुरूवार को होगा। सुप्रीम कोर्ट गुरूवार दोपहर 2 बजे सुब्रत राय की जमानत याचिका पर सुनवाई करेगा। बुधवार को याचिका पर सुनवाई नहीं हो पाई। सुब्रत राय ने बुधवार को याचिका दाखिल कर हिरासत में रखे जाने के आदेश को चुनौती दी।

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पी.सदाशिवम की अध्यक्षता वाली बैंच के समक्ष सुब्रत राय के वकील रामजेठमलानी ने कहा,इस मामले में जल्द सुनवाई होनी चाहिए क्योंकि इसका संबंध बंदी प्रत्यक्षीकरण से है। बंदी प्रत्यक्षीकरण की याचिका कैदी या अन्य बंदियों को कोर्ट में लाए जाने के लिए इस्तेमाल की जाती है, ताकि यह तय किया जा सके कि कारावास या हिरासत न्ययोचित है या नहीं।

जेठमलानी ने कहा,कुछ त्रुटि है जिसके जल्द ठीक किए जाने की जरूरत है। जेठमलानी ने कहा कि कोर्ट दोपहर 2 बजे इस पर सुनवाई करे। निवेशकों का पैसा नहीं लौटाने पर सुप्रीम कोर्ट ने 4 मार्च को सुब्रत राय और दो निदेशकों रवि शंकर दुबे और अशोक राय चौधरी को 11 मार्च तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।

7 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने सहारा समूह से कहा कि वह निवेशकों के पैसे लौटाने के संबंध में ठोस फॉर्मूला या प्लान लेकर आएं। इसके बाद कोर्ट ने मामले पर सुनवाई 11 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी। सहारा समूह पर निवेशकों के 20 हजार करोड़ रूपए बकाया हैं।

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saharaसहारा समूह के मुखिया सुब्रत राय की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। उन्हें अब कुछ और समय जेल में ही गुजारना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को होने वाली सुनवाई टाल दी है। साथ ही अगली सुनवाई की तारीख भी फिलहाल तय नहीं की है।

सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर सोमवार को बताया गया कि जस्टिस केएस राधाकृष्णन और जेएस खेहर की विशेष खंडपीठ के समक्ष मंगलवार को पेश होने वाला मामला फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। सुनवाई टालने की कोई वजह नहीं बताई गई है। सहारा समूह के वकीलों ने इस कदम को आश्चर्यजनक बताया है। उन्होंने कहा कि वे मंगलवार को अदालत से अपील करेंगे कि मामले की सुनवाई की अगली तारीख जल्द से जल्द तय की जाए।

सात मार्च की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने समूह को स्पष्ट निर्देश दिया था कि वह निवेशकों के 20 हजार करोड़ रुपये न लौटाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने चार मार्च को सहारा प्रमुख और दो निदेशकों को 11 मार्च तक के लिए जेल भेज दिया था। अगली सुनवाई इसी तारीख को करने की बात कहते हुए अदालत ने समूह को विकल्प दिया था कि अगर उसने दो महीने में धन वापसी का ठोस प्रस्ताव दिया तो सुनवाई पहले भी हो सकती है। मगर सात मार्च को समूह की ओर से अदालत को जो प्रस्ताव सौंपा गया उसमें जुलाई 2015 तक किस्तों में राशि वापसी की बात कही गई थी। इस पर शीर्ष अदालत ने नाराजगी जताते हुए इसे अदालत का बड़ा अपमान करार दिया और प्रस्ताव को खारिज कर दिया।

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उत्तराखंड में तीर्थस्थल हरिद्वार की गहमागहमी से कुछ ही दूरी पर स्थित औद्योगिक क्षेत्र में साबुन से लेकर मोटरसाइकिल बनाने वाली फैक्टरियों की भरमार है. इस क्षेत्र का विकास राज्य सरकार ने किया है. पहली नजर में तो यह इलाका तीर्थस्थल की अपेक्षा काफी शांत लगता है.

लेकिन बिजली का सामान बनाने वाली कंपनी हैवेल्स की फैक्टरी में कदम रखते ही शोर शांति को भंग कर देता है. मशीनों के शोर के बीच नीली पोशाक और सफेद टोपी में कर्मचारी कॉयल्स बनाते हैं और मोटर, स्विच, स्टैंड और पंखे के डैने असेंबल करते हैं. इस फैक्टरी में हर 25 सेकंड में एक टेबल फैन बनता है.

दो साल पहले यहां ऐसा कुछ नहीं था. हैवेल्स कंपनी दशकभर से पंखे बेच रही है. इससे पहले वह टेबल फैन चीनी कंपनी मीडिया से मंगाती थी. मीडिया दुनिया की सबसे बड़ी फैन निर्माताओं में से है. मीडिया ने कई साल तक हैवेल्स से दाम बढ़ाने की मांग नहीं की पर 2010 में उसने बढ़ती मजदूरी लागत और बिजली की कमी का हवाला देकर अगले तीन साल में दाम 20 फीसदी तक बढ़ा दिए.

हैवेल्स के प्रेसिडेंट सुनील सिक्का कहते हैं, ‘‘ऐसा समय आया जब हमने कहा कि बहुत हो गया, अब हमें भारत में ही प्रोडक्शन की बात सोचनी चाहिए.’’ हैवेल्स ने हरिद्वार में प्रति महीने 1,00,000 टेबल फैन की क्षमता के साथ शुरुआत की. वहां वह पहले से सीलिंग फैन बनाती थी. अब वह टेबल फैन आयात नहीं करती, बल्कि चीन के मुकाबले उसकी लागत भी 10 फीसदी कम पड़ रही है. सिक्का बताते हैं, ‘‘मेरा मार्जिन बढ़ गया क्योंकि इस पर आने वाली लागत घट गई है.’’

हैवेल्स उन कंपनियों में से है जिन्होंने चीन में कीमत बढऩे पर वहां से माल मंगाना बंद किया और यहां उत्पादन शुरू किया या शुरू करने के बारे में सोच रही हैं, ताकि सस्ते भारतीय श्रम और अनुकूल करेंसी मार्केट का लाभ ले सकें. उपभोक्ता सामान बनाने वाली कंपनी गोदरेज, मोबाइल फोन निर्माता माइक्रोमैक्स, ऑटो पार्ट्स कंपनी बॉश और स्टेशनरी निर्माता आइटीसी सभी ने भारत में उत्पादन शुरू किया या अपना विस्तार किया है. चीनी कंपनियां भी भारत में उत्पादन केंद्र बनाने के लिए साझीदारों के साथ संयुक्त उपक्रम स्थापित कर रही हैं.

अपने एयरकंडिशनर और वाशिंग मशीन का उत्पादन भारत में शुरू करने वाले गोदरेज समूह के चेयरमैन आदि गोदरेज कहते हैं, ‘‘चीन में लागत बढ़ रही है, इसलिए चीन के बदले यहां प्रोडक्शन शुरू करने का यह सही समय है.’’ उनकी राय में यह रुझान अगले 20 साल तक बना रहेगा. वे कहते हैं, ‘‘जितनी जल्दी भारत इस रुझान का फायदा उठा लेगा, वह उतनी बेहतर स्थिति में रहेगा. अगर हम जल्दी इसका लाभ नहीं लेंगे तो दूसरे देश इसे भुना लेंगे.’’

दरअसल, दूसरे देश भी चीन के प्रतिस्पर्धा में बढ़त गंवाने से फायदा उठाने लगे हैं. चीन की बढ़त से दुनियाभर की कंपनियां उसकी ओर आकर्षित हुई थीं. भारत के नेशनल मैन्युफैक्चरिंग कम्पीटिटिवनेस काउंसिल के सदस्य सचिव अजय शंकर के मुताबिक अगले कुछ साल में चीन में श्रम आधारित उद्योगों में अनुमानित 10 करोड़ नौकरियां खत्म हो जाएंगी. कई अमेरिकी, यूरोपीय और जापानी कंपनियां चीन में प्रोडक्शन बंद करके दक्षिण एशिया के कम लागत वाले क्षेत्रों की ओर रुख कर रही हैं.

दशकभर से अर्थव्यवस्था की धीमी गति की वजह से पिछले कुछ साल में एयरकंडिशनर और ऑटोमोबाइल्स जैसे उत्पादों की मांग घटने का असर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर पड़ा है. भारत में उत्पादन 2005 और 2011 के बीच 10 फीसदी की दर से वृद्धि के बाद 2011-12 में 2.7 फीसदी और पिछले साल एक फीसदी की दर से ही बढ़ा. देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में उत्पादन क्षेत्र की हिस्सेदारी लगातार दूसरी बार घट गई है. यह हिस्सेदारी 2010-11 में सर्वाधिक 16.2 फीसदी से 2012-13 में 15.1 फीसदी और अब पिछले 10 साल में सबसे कम है. हमारे जीवन की जरूरतों पर अब भी चीनी सामान का बोलबाला है, चाहे वह वालपेपर हो या फर्नीचर अथवा इलेक्ट्रॉनिक्स या औद्योगिक उपकरण.

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समय आ गया है, जब भारत बड़ी महत्वाकांक्षा दिखाए; जहां तक विकास और वृद्धि का संबंध है, यही वक्त है जब भारत सीढ़ी-दर-सीढ़ी बढ़ने की बजाए बड़ी छलांग लगाए. राजकाज और कारोबार के मौजूदा मॉडलों को बदलने और उन्हें विश्व स्तर पर उम्दा के बराबर लाने के लिए उद्योग जगत, पढ़े-लिखे लोगों और सरकार के बीच ज्‍यादा सहयोग की जरूरत है.

भारत की स्वतंत्रता के छह दशकों बाद हमें वैश्विक अर्थ व्यवस्था की राह पर आगे बढ़ने के लिए कुछ अहम क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करना होगा. यह जवाबदेही हमारी है कि हम कुछ समायोजन करें और उस दिशा में बढ़ें जिसकी चाह आम लोगों को है-न्यायपूर्ण राजकाज और समावेशी विकास वाला समतामूलक समाज

शिक्षा में निवेश करें: हमारी निरंतर वृद्धि और समृद्धि की चाभी शिक्षा के हाथों में है. लेकिन देश की शिक्षा प्रणाली में साफ तौर पर कुछ कमियां हैं. रिपोर्टों के मुताबिक, हमारे स्कूलों में औसत छात्र-शिक्षक अनुपात 80:1 का है.

इसकी तुलना विकसित देशों में 30:1 के अनुपात से कीजिए, यह वह आंकड़ा है जो क्लासरूम में व्यक्तिगत तौर पर ध्यान देने और मार्गदर्शन के लिए ज्‍यादा सहायक है. सरकार को सभी स्तरों की शिक्षा-प्राथमिक, उच्चतर माध्यमिक और उच्च शिक्षा-में निवेश जारी रखना चाहिए. साथ ही हमें दक्ष शिक्षकों की कमी के सवाल से समग्र शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों के जरिए निबटने के रास्ते खोजने चाहिए.

गुणवत्ता तक पहुंचने दें: जहां सभी के लिए शिक्षा के अधिकार को मोटे तौर पर मान लिया गया है, हमें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सभी को दिलाने की दिशा में अभी भी आगे बढ़ना है. जब हम शहरों से ग्रामीण भारत की ओर बढ़ते हैं, तो वहां शिक्षा की गुणवत्ता का क्रमिक लेकिन स्पष्ट पतन दिखता है.

अपने विकसित टेलीकॉम और आइटी ढांचे का इस्तेमाल करके, हम ठोस प्रशिक्षण और सभी को शिक्षा दिलाने में उपग्रह आधारित मीडिया का फायदा उठा सकते हैं. इस प्रौद्योगिकी से चलने वाले वर्चुअल क्लासरूम दुनिया की उम्दा शिक्षण प्रतिभाओं को दूरदराज इलाकों में बने क्लासरूमों तक पहुंचा सकते हैं.

ज्ञान के डिजिटल भंडार हर जगह क्लासरूमों में प्रासंगिक और अद्यतन पाठ्य सामग्री मुहैया करा सकते हैं. उद्योगों से मिली जानकारियों का इस्तेमाल कर बनी संशोधित शिक्षण प्रणाली को एकीकृत पाठ्यक्रम में शामिल कर सूचना और संचार तकनीक (आइसीटी) से क्लासरूमों में पहुंचाना चाहिए.

इस समावेशी राह पर बढ़ते हुए, हमें योग्य छात्रों को मेरिट आधारित छात्रवृत्ति देनी चाहिए. ऐसे प्रलोभन, पाने वालों को ऊंचे लक्ष्य तय करने को प्रेरित करते हैं और उनके आर्थिक तनाव घटाने में मददगार हो सकते हैं, जिससे उनके स्कूल या कॉलेज को छोड़ने की संभावना कम हो जाती है.

दक्षता तैयार करें: देश के युवाओं की दक्षता बढ़ाना संबंधित व्यक्तियों और व्यवसायों के लिए अहम है. हमें भविष्य में वांछित दक्षताओं की पहचान करनी होगी और उन्हें विकसित करने के व्यवस्थित तरीकों की ओर देखना होगा.

इस दिशा में नेशनल स्किल फाउंडेशन मददगार हो सकता है, लेकिन पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के लिए भी मजबूत दलीलें हैं. पिछले दो दशकों में आइटी उद्योग की तरक्की-1993 में 1,50,000 कर्मचारियों से आज 20 लाख से अधिक-दिखाती है कि यहां उद्योग का कितना कुछ दांव पर लगा है. सघन ज्ञान वाली कार्यशक्ति तैयार करने के लिए मौजूदा शिक्षण ढांचे और सरकार पर निर्भर रहने के बजाए, हमें कार्यशक्ति में दक्षता की कमी की समस्या के समाधान खोजने चाहिए. व्यापक प्रशिक्षण और इंटर्नशिप और अप्रेंटिसशिप के अवसर इसे दूर करने में मददगार हो सकते हैं.

नए अनुसंधानों पर ध्यान: अर्थव्यवस्था के क्रमिक विकास के अगले चरण में जाने के लिए, हमें संसाधन आधारित विकास पर निर्भरता घटाते हुए नव-अनुसंधान आधारित विकास की ओर बढ़ना होगा. आज, भारत विश्व की विकसित अर्थव्यवस्थाओं को ‘चुनौती देने वाले’ की भूमिका में है.

विश्व के बाजार में अपनी बढ़त बरकरार रखने के लिए सरकार और उद्योगों को शोध परियोजनाओं में साझ करने वाले अवसर तलाशने होंगे. रक्षा जैसे क्षेत्रों की तरह की बड़े लक्ष्य आधारित परियोजनाओं को साझा तौर पर विकसित करना होगा. वेंचर कैपिटलिस्ट चुने हुए क्षेत्रों में निवेश करें इसके लिए जीवंत इकोसिस्टम बनाना होगा, जिसमें उनके लिए प्रोत्साहन हो.

ऐसा इकोसिस्टम आधुनिकतम शोध और अनुसंधान को पनपने का मौका देगा, जो अकव्ले के स्तर पर किए गए प्रयासों से कहीं ज्‍यादा होंगे. उच्च शिक्षा इस क्षेत्र का इंजन होगी, इसलिए डॉक्टरेट और पोस्ट डॉक्टरेट अध्ययनों को छात्रवृत्तियों और अनुदानों से प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, ताकि शोध और अनुसंधान की रफ्तार बन सके.

कारोबार से आगे की सोचें: टिकाऊपन के उपाय आगे बढ़ाने में कारोबार की भूमिका पर कुछ कहने की जरूरत नहीं है. इसे सतही पहल से जुड़े सुविधाजनक प्रचलित जुमले के तौर पर अब और इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. इसे कंपनियों की मूल प्रणालियों और प्रक्रियाओं के साथ गूंथना होगा. इस प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ऐसे स्पष्ट और महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित करना है, जो हमारे कुल पारिस्थितिक पदचिन्ह घटा सके और लक्ष्य हासिल करने का खाका बना सके.

दुनिया भर में संस्थाएं आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय दृष्टि से सकारात्मक प्रभाव पैदा करने के तरीके खोज रही हैं. इस दौर को ताकत मिल रही है आंतरिक (कर्मचारयों द्वारा संचालित) और बाजार-मांग के पहलू से.

हमें टिकाऊपन को सामाजिक लाभ पैदा करने के अवसर और साथ ही हमारे संस्थाओं के भीतर नए प्रयोगों को प्रेरित करने वाले तरीके के तौर पर देखना चाहिए. किसी पहल की कामयाबी जांचने के लिए जरूरी है व्यक्ति, समुदाय और व्यापक पर्यावरण पर उसके प्रभाव का सावधानी से आकलन. इसमें मजबूती से जमी हुई प्रक्रियाओं और मान्यताओं पर सवाल उठाना और जहां जरूरत हो, वहां नए उपायों का इस्तेमाल शामिल होता है.

शहरी विकास की योजना बनाएं: आज करीब 30 फीसदी भारत-करीब 34 करोड़ लोग शहरों में रहते हैं; आने वाले समय में यह संख्या तेजी से बढ़ने की उम्मीद है. हमारे बुनियादी ढांचे की सुधार परियोजनाएं-राजमार्ग, सड़क, मेट्रो, और हवाई अड्डे-हमारी दीर्घकालिक जरूरतों की पूर्ति के लिहाज से बनाने होंगे.

इस प्रक्रिया में हमें जिस एक क्षेत्र की अनदेखी नहीं करनी चाहिए वह है परिरक्षण.

आज का भारत अस्त-व्यस्त विकास की तस्वीर है. शहरी योजना और विस्तार का हमारा तरीका विकसित देशों के अनुभवों से कई सबक ले सकता है. हमें अपने शहरों के भीतर ‘ऐतिहासिक क्षेत्रों’ का सीमांकन करना चाहिए और इन धरोहर संपन्न क्षेत्रों में विकास की सीमा तय करनी चाहिए. नए उपनगर जमीन के इस्तेमाल, भविष्य के विकास, और नगर केंद्रों तक संपर्क की व्यापक योजनाओं पर बनने चाहिए.

मैन्युफैक्चरिंग को प्रोत्साहन दें: हमारे मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा न केवल इस क्षेत्र में बल्कि वित्तीय सेवाओं, बुनियादी ढांचे के विकास और रखरखाव, उपभोक्ता सहयोग, परिवहन, स्वास्थ्य रक्षा और कई दूसरे सहयोगी उद्योगों में निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ाएगी.

शोध और अनुसंधान पर ध्यान केंद्रित करने से नए प्रयोगों को गति मिलेगी और बहुत दक्ष कर्मचारियों और वैज्ञानिकों की मांग बढ़ेगी.

देश की अर्थव्यवस्था पर इसके दूरगामी प्रभावों को देखते हुए इस क्षेत्र के विकास के साथ हमारा बहुत कुछ जुड़ा हुआ है. मंजूरी की प्रक्रियाओं को आसान बनाकर, बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं को रफ्तार देकर और लचीले श्रम कानून, जो सामाजिक सुरक्षा तंत्र को कमजोर न करते हों, विकसित करके हमें भारत को मैन्युफैक्चरिंग के ठिकाने के तौर पर और आकर्षक बनाना चाहिए.

उद्योग विशेष के मैन्युफैक्चरिंग ठिकाने स्वयं विकास के लिए संबंधित क्लस्टर्स को भी नजदीक ही पनपने का अवसर देंगे. पर्यावरण अनुकूल उत्पादों-हाइब्रिड या वैकल्पिक ईंधन वाहनों, बिजली बचाने वाली प्रकाश विधियों, पर्यावरण हितैषी निर्माण सामग्री के निर्माताओं को प्रोत्साहित करके हम इस क्षेत्र में भविष्य के विकास का लाभ ले सकते हैं, साथ ही जलवायु परिवर्तन के प्रभाव कम करने की वैश्विक कोशिशों में हाथ बंटा सकते हैं.

पारदर्शिता लाएं: हमारी बढ़ती और छितराई जनसंख्या के लिए आइसीटी डिजिटल खाई पाटने और आगे बढ़ने में बड़ी भूमिका निभा सकती है. इस दिशा में कई पहल हैं, जिनमें मुख्य है भारत सरकार की विशिष्ट पहचान संख्या की पहल. मेरी नजर में यह अनोखी परियोजना ग्रामीण जनता तक सार्वजनिक सेवाएं पहुंचाने में प्रौद्योगिकी में उन्नति का लाभ उठाती है.

यह कमियों और बिलौचियों को दूर कर हमारी प्रणाली में ज्‍यादा पारदर्शिता भी लाती है. प्रौद्योगिकी अहम सेवाओं मसलन, स्वास्थ्य रक्षा और शिक्षा को टेलीमेडिसिन और उपग्रह आधारित शिक्षा जैसे उभरते हुए उपायों से-दूरदराज के इलाकों में उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.

ये विचार, भले ही अनूठे लगें, जल्दी से जल्दी मुख्यधारा में लाए जाने चाहिए. शिक्षा से लेकर ग्रामीण सेवाओं तक, हरेक चीज में कुछ निर्णायक परिवर्तनकारी स्पर्श देकर हमें विकास की एक अनवरत और टिकाऊ गति जरूर बरकरार रखनी चाहिए. हम एक उत्तेजक चौराहे पर हैं, और हमें भविष्य की ओर दृष्टि, उद्देश्य, क्रांतिकारी विचारों और सशक्त क्रियान्वयन के मिश्रण के साथ बढ़ना चाहिए. मुझे विश्वास है कि हम यह कर सकते हैं. हमें इससे कम किसी चीज के लिए राजी नहीं होना चाहिए.

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अंतरिम बजट के बाद कार कंपनियां और ग्राहक दोनों की बल्ले-बल्ले हो गई है। कार कंपनियों में सेल्स का पहिया तेजी से घूमने की उम्मीद बंधी है, तो ग्राहकों को मनपसंद कारें सस्ते में खरीदने का मौका मिला है।

भले ही कुछ महीनों के लिए, लेकिन इस दफा का अंतरिम बजट ऑटो मार्केट को खुश कर गया। वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने 2014 बजट में कारों पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी घटाने की खुशखबरी दी। हालांकि, ड्यूटी घटने का फैसला 30 जून 2014 तक लागू होगा। बजट भाषण में चिदंबरम के इस एलान के बाद ऑटो कंपनियों ने तुरंत कारों के दाम घटा दिए। अगर आप कार खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो हम आपको बता रहे हैं कि आपके लिए बेस्ट बाय क्या हो सकती है-

1-होंडा ब्रियो

इंजन

होंडा की खूबसूरत हैचबैक। इसमें लगा 1198 सीसी का पेट्रोल इंजन, जो 88 पीएस का पावर और 109 एनएम का टॉर्क देता है। अगर आप नई कार खरीदने का प्लान बना रहे हैं तो यह कार आपकी बेस्ट बाय हो सकती है।

कीमत

एक्साइज ड्यूटी घटने के बाद इसका बेस मॉडल 4 लाख रुपए से भी कम में मिलेगा। वहीं इसका टॉप वैरिएंट 6 लाख रुपये के अंदर आ जाएगा। इससे पहले इस कार का बेस मॉडल 4.19 लाख रुपए में उपलब्ध था।

जेनेवा

कितना मजा आएगा अगर आप अपनी कार में लगी बड़ी स्क्रीन पर मूवी देखें, इंटरनेट को यूज करें और आराम से बैठ कर दोस्तों के साथ गप्पे मारें। ये सारे काम तब हों जब आपकी कार खुद ब खुद चल रही हो। ऑटो निर्माताओं और टेक्नोलॉजी से जड़ी कंपनियों ने इस भविष्य को सच बनाने की ठान ली है। जहां ये सब कुछ होगा और ये बिना ड्राइवर के ही चलेगी।

इस कार को आप जेनेवा में चल रहे ऑटो शो में देख भी सकते हैं। वो कार दिखने में कैसी होगी जहां लोगों का ध्यान सड़क पर कम और कार के अंदर ज्यादा होगा? जब रिनस्पीड के संस्थापक एवं कार्यकारी निदेशक फ्रैंक रिंड्रिक्चट से पूछा गया कि अगर मेरी कार स्वायत्तता से चल रही है तो क्या मैं अपने स्टेयरिंग को देखना चाहूंगा जबकि वह आराम से दाएं बाएं हो रहा हो। उन्होंने कहा, ‘नहीं मैं ड्राइव और ट्रैफिक को देखना छोड़कर कुछ भी करूंगा। खाना, सोना, काम करना या कुछ भी जो आप सोच सकते हैं।’

गूगल पिछले काफी समय से स्वायत्तता से चलने वाली कारों पर काम कर रहा है और परंपरागत कार निर्माता भी ऑटोनॉमस टेक्नोलॉजी बनाने पर काम कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सेल्फ ड्राइविंग पूरी तरह से ड्राइवर लैस कार नहीं होगी। इसकी बिक्री इस दशक के अंत तक शुरू हो सकती है। फ्रैंक ने अपनी एक्स चेंज कॉन्सेप्ट कार को इस बार जेनेवा ऑटो शो में पेश किया है। इस कार में वो सब कर सकते हैं जो आप समय बचाने के लिए ट्रेन या फ्लाइट में करते हैं। इसलिए रिनस्पीड ने अपने टेस्ला मॉडल एस इलेक्ट्रिक कार का इंटिरियर बदला है। इसमें स्टैंडर्ड साइज का इंटरटेनमेंट सेंटर, ऑफिस और मीटिंग स्पॉट की जगह बनाई है।

इस कार की सीटें झुक सकत है, मुड़ सकती हैं और 20 विभिन्न शेप में बदली जा सकती हैं। इससे यात्रियों को एक-दूसरे की ओर देखने और 32 इंच स्क्रीन को देखने में मदद मिलेगी। फ्रंट में बदलाव है। पूरे डैशबोर्ड पर इंटरटेनमेंट सिस्टम लगा हुआ है और स्टेयरिंग को शिफ्ट भी किया जा सकता है। इतना ही नहीं, इस कार में आपको एक्सप्रेसो मशीन भी लगी है। 120 किलोमीटर प्रति घंटा से चलते वक्त आप कॉफी, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और ईमेल पर नजर रख सकते हैं। ये सब सुनकर एक कल्पना ही लगती है। लेकिन कंपनी का दावा है कि ऐसा भविष्य अब ज्यादा दूर नहीं है।

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नई दिल्ली

भारतीय स्कूटर बाजार में बड़ी हिस्सेदारी को लक्ष्य बनाते हुए एलएमएल ने अगले साल में पांच नए स्कूटर लॉन्च करने की घोषणा की है। कंपनी ने हाल में अपने स्टार यूरो 150 स्कटूर लॉन्च किया हैं।
बताया गया है कि एलएमएल (लोहिया मोटर्स लिमिटेड) अपने इन नए स्कूटर की बदौलत भारतीय टू व्हीलर बाजार में वापसी करने जा रहा है जहां यह वेस्पा, होंडा, हीरो, यामाहा, टीवीएस तथा सुजुकी जैसी कंपनियों को चुनौति पेश करेगा।
कंपनी ने हाल ही में अपना स्टार यूरो 150 सीसी स्कूटर भारत में लॉन्च किया है। एलएमएल स्टार यूरो को 54,014 रूपए की कीमत तथा सात रंगों के ऑप्शन के साथ बाजार में उतारा गया है।
पावरफुल स्कूटरों की श्रेणी में आने वाले इस स्कूटर में 150 सीसी इंजन लगा है जो 9.38 बीएचपी का पावर देता है। जबकि यह 55 किलोमीटर प्रतिलीटर का माइलेज देता है।
तीन वेरियंट्स में उपलब्ध-
1. एलएमएल स्टार यूरो 150 इलेक्ट्रिक स्टार्ट- इसकी कीमत 57,918 रूपए है।
2. एलएमएल स्टार यूरो 150 इलेक्ट्रिक स्टार्ट और डिस्क ब्रेक- इसकी कीमत 57,918 रूपए रखी गई है।
3. एलएमएल स्टार यूरो 150 इलेक्ट्रिक स्टार्ट के साथ डिस्क ब्रेक और मल्टी कलर्स- यह इस मॉडल का टॉप एंड वेरियंट है जिसकी कीमत 59,422 रूपए रखी गई है।
फीचर्स, कीमत तथा परफोर्मेश के मामले में यह पियाजियो के वेस्पा ब्रांड स्कूटरों को चुनौति देने वाला है।

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