Tuesday, December 11, 2018
दुनिया

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कुआलालंपुर।

दुनिया के कई देशों के अथक प्रयास के बावजूद रहस्यमय ढंग से लापता हुए मलेशिया एअरलाइंस के विमान का पांचवें दिन बुधवार को भी कोई पता नहीं चल पाया है।
विमान एमएच 370 की खोज में 10 से ज्यादा देश जुटे हुए हैं। तलाशी के काम में अब भारत और जापान भी शामिल हो गया है और तलाशी दल अब अंडमान सागर से थाइलैंड के दक्षिण तक तलाशी ले रहे हैं। यह जानकारी बुधवार को एक अधिकारी ने दी।

प्रधानमंत्री के विभाग में मंत्री शाहिदन कासिम ने कहा है कि मलेशियाई समुद्री प्रवर्तन एजेंसी (एमएमईए) ने अपने अभियान का दायरा बढ़ा दिया है। एजेंसी ने लापता विमान का सुराग पाने की उम्मीद में यह कदम उठाया है।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, कासिम ने कहा है, एमएमईए सक्रियतापूर्वक तलाशी अभियान को तेज करेगी। इस काम में अभी कई देशों की सरकारें मदद कर रही हैं।
मलेशिया एअरलाइंस का विमान एमएच 370 शनिवार को 239 सवारों को लेकर कुआलालंपुर से बीजिंग के लिए उड़ान भरा था लेकिन वियतनाम तट के समीप चीन सागर के ऊपर से गुजरते समय उसका वायु नियंत्रण से संपर्क टूट गया। माना जा रहा है बोइंग 777-200ईआर विमान वियतनाम समुद्र तट पर दक्षिण चीन सागर में दुर्घटनाग्रस्त हो कर गिर गया।

विमान आधी रात बाद 12:41 बजे कुआलालंपुर से रवाना हुआ था और शनिवार सुबह 6:30 बजे बीजिंग में उसे उतरना था। विमान में 227 यात्री और चालक दल के 12 लोग सवार थे। यात्रियों में पांच भारतीय, 154 चीनी और 38 मलेशियाई व अन्य देशों के नागरिक थे। विमान का संपर्क 1:40 बजे टूटा, उस समय यह वियतनाम के हो ची मिन्ह वायु यातायात नियंत्रण के क्षेत्र में था।
इससे पहले बुधवार को मलेशिया वायु सेना के प्रमुख ने उन रिपोर्टो का खंडन किया है जिसमें कहा गया है कि रडार ने मलक्का की खाड़ी के ऊपर विमान की तलाश कर ली है।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, जनरल रोदजाली दाउद ने एक बयान में कहा है, मैं यह कहना चाहता हूं कि मैंने ऎसा कोई बयान नहीं दिया है।
उन्होंने कहा कि वायु सेना इस बात की संभावना को खारिज नहीं कर रही कि बीजिंग जा रहा विमान रडार से गायब होने के पहले वापस मुड़ा था। इसी के आधार पर तलाशी के दायरे में मलेशिया के पश्चिमी तट को शामिल किया गया है।
विमान में चोरी के पासपोर्ट पर यात्रा करने वाले दो ईरानी यात्रियों का पता चलने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवादी नेटवर्क की जांच की जा रही है। अमेरिकी खुफिया एजेंसी सेंट्रल इंटेलीजेंस एजेंसी (सीआईए) के प्रमुख जॉन ब्रेन्नन ने मंगलवार को कहा कि आतंकवादी गतिविधि की आशंका को खारिज नहीं किया जा सकता है।
यह पूछे जाने पर कि क्या एजेंसी इस मामले में आतंकवादी गतिविधि की संभावना खारिज करती है, सीआईए प्रमुख ने कहा, नहीं बिलकुल नहीं।
इससे पहले मंगलवार को इंटपोल के महासचिव रोनाल्ड नोबल ने कहा था कि चोरी के पासपोर्ट पर यात्रा करने वाले दोनों ईरानी सैयद मोहम्मद रेजा दलावर और पौरिया नूरमोहम्मदी संभवत: आतंकी नहीं थे, बल्कि गैरकानूनी आव्रजक थे जो यूरोप में नई जिंदगी की शुरूआत करने के लिए पहुंचने की कोशिश में थे।
नोबल के बयान की हां में हां मिलाते हुए मलेशिया के राष्ट्रीय पुलिस प्रमुख खालिद अबू बकर ने भी कहा कि अधिकारियों का मानना है कि नूरमोहम्मदी किसी आतंकवादी गिरोह का सदस्य नहीं जान पड़ता है और वह जर्मनी में घुसपैठ करने का प्रयास कर रहा था।
इस बीच मलेशिया एअरलाइन्स ने अपनी वेबसाइट पर ताजा अपडेट में कहा है कि इस समय सबसे ज्यादा ध्यान यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को परिवार वालों पर है।
इसमें कहा गया है कि इसका मतलब उन्हें पल-पल की सूचना मुहैया कराना, यात्रा की सुविधा देना, रिहाइश, भोजन, चिकित्सा और भावनात्मक समर्थन देना है।

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वाशिंगटन।

भारतीय राजनयिक देवयानी खोबरागडे को अमेरिकी कोर्ट में बड़ी सफलता मिली है। कोर्ट ने उनके खिलाफ लगे नौकरानी के वर्क वीजा मामले में धोखाधड़ी के आरोपों को गुरुवार को खारिज कर दिया। उनके खिलाफ धोखाधड़ी और नौकरानी को दी जाने वाली तनख्वाह के बाबत झूठी जानकारी देने का आरोप था। इस बाबत न सिर्फ उन्हें हिरासत में रखा गया था बल्कि उनकी कपड़े उतरवाकर तलाशी तक ली गई थी।

इस मामले से दोनों देशों के बीच तल्खी काफी बढ़ गई थी। भारत ने भी इसके जवाब में अमेरिकी राजनयिकों पर सख्ती दिखाई थी। फेडरल कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई में कहा कि जिस समय देवयानी खोबरागडे पर वीजा में धोखाधड़ी और अपनी घरेलू कर्मचारी की तनख्वाह को लेकर गलतबयानी के आरोपों पर मुकदमा दर्ज किया गया गया था, उस वक्त उन्हें राजनयिकों को मिलने वाले विशेष अधिकार हासिल थे। जज ने इसके साथ ही इस संभावना को भी खुला रखा है जिसमें अभियोजन पक्ष देवयानी पर एक नए मुकदमे को लेकर आ सकता है।

खोबरागडे ने अमेरिकी कोर्ट द्वारा आरोपों के खारिज हो जाने के बाद अपनी प्रतिक्रिया में खुशी का इजहार किया है। उनके पिता ने कहा है कि यह उनके लिए सबसे बड़ी जीत है। इसके लिए उन्होंने भारत सरकार का भी धन्यवाद किया है। वहीं खोबरागडे के वकील ने कहा कि कोर्ट ने उनके द्वारा दी गई दलीलों को सही मानते हुए भारतीय राजनयिक पर लगे आरोपों को खारिज कर दिया है। यह एक बड़ी जीत है।

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बीजिंग

चीन ने अपने उन पड़ोसियों को सख्त संदेश दिया है, जिनके साथ उसका क्षेत्रीय विवाद है। उसने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने देश की एक इंच जमीन को लेकर किसी प्रकार का समझौता नहीं करेगा। उसने शनिवार को कहा कि वह शांतिपूर्ण तरीके से राजनयिक संबंधों को आगे बढ़ाते हुए अपने क्षेत्र की एक-एक इंच जमीन की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है।

चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि हम ऐसी कोई चीज नहीं लेंगे जो हमारी नहीं है, लेकिन अपनी जमीन के एक-एक इंच टुकड़े की रक्षा करेंगे। उन्होंने यह बात कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना के रबर स्टांप विधायी निकाय नेशनल पीपुल्स कांग्रेस (एनपीसी) के चल रहे सत्र से इतर वार्षिक प्रेस कांफ्रेंस में कही।

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कुआलालंपुर

मलेशिया एयरलाइंस के विमान बोइंग 777 के समुद्र में समाने की आशंका है। ये विमान क्वालालंपुर से बीजिंग के लिए उड़ा था। दो घंटे बाद ही लापता हो गया। विमान में चालक दल के 12 सदस्यों समेत 239 लोग सवार थे। इसके वियतनाम के समुद्र में गिरने की बात कही जा रही है।

विमान ने शुक्रवार को स्थानीय समयानुसार रात 12.41 बजे कुलालालंपुर से उड़ान भरी। उडान के एक घंटे बाद जब वह करीब 35,000 हजार फीट की ऊंचाई पर था तब आखिरी बार रडार पर दिखा। फिर संपर्क टूट गया। उसे सुबह साढ़े छह बजे बीजिंग पहुंचना था। विमान 777-200 फ्लाइट एमएच 370 में 14 देशों के यात्री शामिल थे, जिसमें पांच भारतीय भी थे।

17 घंटे तक बड़े पैमाने पर मलेशिया और वियतनाम के बीच सघन तलाश के बाद भी इसका कोई पता नहीं लग पाया। मलेशियाई प्रधानमंत्री नजीब रजाक ने कुआलालंपुर में कहा कि मलेशिया ने विमान की तलाश में 15 वायुसेना विमान, छह नौसैनिक जहाज और तीन तटरक्षक नौकाओं की सेवाएं लीं लेकिन कुछ पता नहीं चला। चीन और फिलीपीन्स ने भी इस क्षेत्र में जहाज भेजे। अमेरिका और सिंगापुर के सैन्य विमानों को भी मदद के लिए रवाना किया गया। सारी कोशिशें बेकार गईं।

वियतनामी मीडिया ने एक वरिष्ठ नौसैनिक अधिकारी के हवाले से कहा कि विमान दक्षिणी वियतनाम में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। बाद में वियतनाम के एडमिरल नगो वान फाट ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि दुर्घटनास्थल की पहचान कर ली गई है।

बीजिंग एयरपोर्ट पर विमान में सवार चीनी यात्रियों के परिजनों का बुरा हाल है। विमान में सबसे ज्यादा 154 चीनी यात्री सवार थे।

अमेरिका में निर्मित बोइंग777 विमान की 19 सालों में ये सबसे बड़ी दुर्घटना है। जेट ने वर्ष 1995 में विमान निर्माण क्षेत्र में कदम रखा था। मलेशिया एयरलाइंस 11 सालों से इस विमान का उपयोग कर रही थी।

एयर फ्रांस का एक विमान ठीक इसी तरह एक जून 2009 में दक्षिणी अटलांटा में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसमें 228 लोगों की मौत हुई थी। दो दिन बाद विमान के अवशेषों का पता चला।

मलेशिया एयरलाइंस के विमान को उड़ा रहे कैप्टन जाहिरी अहमद शाह को 18,365 घंटे की उड़ान का अनुभव था। वह 1981 में एयरलाइंस से जुड़े थे।

विमान में सवार भारतीय

बीजिंग में भारतीय दूतावास को मिली जानकारी के मुताबिक विमान में सवार भारतीयों की पहचान चेतना कोलेकार, स्वानंद कोलेकार, सुरेश कोलेकार, चंद्रिका शर्मा और प्रहलाद श्रेष्ठा के तौर पर हुई है। विमान में भारतीय मूल के कनाडाई नागरिक मुकेश मुखर्जी भी सवार थे।

विमान के मिलने की दुआ कर रहा भारतीय परिवार

लापता मलेशियाई विमान में सवार पांच भारतीयों में से एक गैरसरकारी संगठन मेंकार्यरत 51 वर्षीय चंद्रिका शर्मा भी शामिल हैं। वह कुआलालंपुर से मंगोलिया में आयोजित एक सम्मेलन में हिस्सा लेने जा रही थीं। खाद्य और कृषि संगठन द्वारा आयोजित यह सम्मेलन शनिवार को होना था। वह ‘इंटरनेशनल कलेक्टिव इन सपोर्ट ऑफ फिशवर्कर्स’ में कार्यकारी सचिव के तौर पर कार्यरत हैं।

यहां पर उनके पति मैनेजमेंट कंसल्टेंट केएस नरेंद्र को जब विमान के लापता होने की खबर मिली तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। आसइसीएसएफ के एन वेणुगोपाल ने बताया कि उनका परिवार बेहद दुखी है। चंद्रिका मूल रूप से हरियाणा की रहने वाली हैं। 1993 में तमिलभाषी नरेंद्र के साथ शादी करने के बाद से वह चेन्नई में रह रही हैं। दपंति की एक बेटी है जो दिल्ली में पढ़ रही है।

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वाशिंगटन

ओबामा प्रशासन के एक अधिकारी ने कहा है कि भारत में भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को वीजा देने को लेकर अमेरिका की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है।

अमेरिकी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता जेन सैकी ने कहा, ‘अभी भारत में चुनाव नहीं हुए हैं। लेकिन मोदी को वीजा देने को लेकर अमेरिका की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। यदि मोदी वीजा के लिए आवेदन करना चाहते हैं तो उनका स्वागत है। इस पर सामान्य प्रक्रिया के तहत विचार किया जाएगा।’ वह दक्षिण और मध्य एशिया के लिए सहायक विदेश मंत्री निशा देसाई बिस्वाल द्वारा दिए गए एक साक्षात्कार को लेकर पूछे गए सवाल का जवाब दे रही थीं।

बिस्वाल ने कहा था कि अमेरिका ने लोकतांत्रिक देश के प्रत्येक नेता का स्वागत किया है। भारत में लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित नेता का भी अमेरिका के सहयोगी के रूप में स्वागत है। सैकी ने कहा कि हम वीजा को लेकर अनुमान नहीं लगाते हैं। इस मामले में हमारी स्थिति नहीं बदली है। मेरा मानना है कि बिस्वाल केवल भारत के साथ अमेरिका के मजबूत संबंधों को लेकर बात कर रही थीं।

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रियाद

सऊदी अरब के नेशनल कमर्शिएल बैंक ने सारा अल सुहैमी को एनसीबी कैपिटल का प्रमुख बनाने की घोषणा की है। इस पद को संभालने वाली वह पहली महिला होंगी। सऊदी अरब जैसे देश में, इस तरह की नियुक्ति से लोग आpर्यचकित है, क्योंकि कट्टरपंथियों की बहुलता वाले इस देश में महिलाओं पर कई तरह के प्रतिबंध है और पुरूषों के साथ उनका काम करना एक तरह से वर्जित है।

यहां ज्वाइन करने से पहले वे जडवा इन्वेस्टमेंट में थीं, जहां वे एस्सेट मैनेजमेंट की प्रमुख थीं। वे 17 बिलियन रियाल यानी 4.53 बिलियन यूएस डॉलर के प्रबंधन के लिए जिम्मेदार थीं। उन्होंने 2007 में जडवा ज्वाइन किया था और मैनेजमेंट पोर्टफोलियो को देख रहीं थीं। पांच सालों के बाद वो सीनियर पोजिशन पर पहुंच गई थीं। फरवरी में, सऊदी डेली की एडिटर-इन-चीफ बनने वाली सौम्या जाबेरी पहली महिला हैं, जब उन्हें सऊदी गजट का नेतृत्व करने के लिए प्रमोशन दिया गया था।

सऊदी अरब में महिलाओं पर इस्लामिक कानून के अनुसार कड़ा प्रतिबंध है। इसके तहत, महिलाओं को काम करने और ट्रैवल करने से पहले उनके पुरूष अभिभावक से अनुमति की जरूरत होती है। यह पहला देश है, जहां महिलाओं को ड्राइविंग करने पर प्रतिबंध है और अभिभावक की अनुमति के बिना कोई परिचय पत्र तक नहीं बन सकता है।

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दमिश्क
एक ओर तो दुनिया में इंटरनेट की आजादी की बात की जाती है और दूसरी ओर सीरिया में एक लड़की को इसी आजादी का इस्तेमाल कर सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक खोलने की कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। सीरिया की शरिया अदालत को पांतूम अल जासेम नाम की इस लड़की का फेसबुक अकांउट खोलना इतना नागवार गुजरा कि उसने फातूम की पत्थरों से पीटकर हत्या किए जाने की सजा सुना दी। इस फारमान के चलते आखिरकार इस्लामी अतिवादियों की भीड़ ने फातूम की पत्थरों से पीटकर हत्या कर दी।
स्थानीय मीडिया के अनुसार इस्लामी राज्य इराक और सीरिया के क्षेत्राधिकार में आने वाली एक धार्मिक अदालत अल रेका ने अपने आदेश में कहा कि फातूम ने फेसबुक अकाउंट खोलकर बड़ा अनैतिक काम किया है और इसके लिए वह ऐसी ही सजा की हकदार है। कट्टरपंथी इस्लामी संगठन आईएसआईएस ने इराक और सीरिया में अपनी मजबूत पकड़ बना ली है। यह संगठन सीरिया में राष्ट्रपति बशर अल असद के खिलाफ और इराक में सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है।

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आपने ऎसा शायद ही सुना होगा लेकिन चीन में कुछ महिलाएं ऎसी है जो अपने ही स्तन के दूध से साबुन बना रही हैं और उसे बाजार में बेच भी रही हैं।

सुत्रों के अनुसार चीन में महिलाओं ने अपने बच्चों को दूध पिलाने के बाद बचे दूध का इस्तेमाल साबुन बनाने के लिए करना शुरू किया है।

चीन की ऑनलाइन कारोबारी वेबसाइट ताओबाओ पर प्रकाशित विज्ञापन में साबुन बनाने वालों ने दावा किया है कि इससे त्वचा गोरी होती है और लंबे समय तक सुरक्षित भी रहती है। वही की एक महिला ने ये बताया की वे इस तरह के 300 से ज्यादा साबुन बेच चुकी हैं।

हालांकि ऎसे साबुन के दावों पर चिकित्सकों ने कोई खास उत्साह नहीं दिखाया है। वैसे स्तन दूध में पोषक तत्वों की काफी विविधता होती है। लेकिन एक चिकित्सक के मुताबिक बताया गया हैं। साबुन बनाने की प्रक्रिया में पोषक तत्व नष्ट हो जाते होंगे।

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तेहरान
ईरान में एक स्कूल शिक्षक ने छात्रों को रोजाना होने वाली प्रार्थना रोचक बनाने के लिए रोबोट का इस्तेमाल करना शुरू किया है। सत्ताइस साल का यह टीचर अकबर रिजी तेहरान से 35 किलोमीटर दक्षिण पूर्व वारामिन शहर में अलबरोज स्कूल में छात्रों को कुरान की शिक्षा देता है। उसने बताया कि एक बार मैं एक परिवारिक कार्यक्रम में हिस्सा ले रहा था जहां एक बच्ची एक गुड़िया से खेल रही थी जो नाच और गा सकती थी।
मैंने देखा कि वह बच्ची उस गुड़िया को बहुत ध्यान से देख रही थी। तब मेरे दिमाग में एक विचार आया कि इसी तरह के उपकरण को धर्मिक एवं मनोरंजक कार्यों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इस टीचर ने कोरियाई रोबोट निर्माता कंपनी से शिक्षा किट खरीदकर खुद बनाए एक रोबोट में फिट कर दी। यह रोबोट झुक सकता है और आगे पीछे जाकर कुरान की आयते गा सकता है। इसमें दो इंजन लगे है। टीचर ने बताया कि इस रोबोट को गाते देखकर छात्र बहुत ही ध्यान से देखते हैं और प्रार्थना में हिस्सा लेते हैं।
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