Friday, October 19, 2018
अजब-गजब

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मुंबई।

कई बार बॉलीवुड अभिनेत्रियां ज्यादा अच्छा दिखने की होड़ में ये भूल जाती हैं कि वे किन कपड़ों में खुद को सहज महसूस करेंगी और किसमें उन्हें परेशानी होगी। आलिया भट्ट के साथ भी हाल में कुछ ऐसा ही हुआ।

अभिनेत्री आलिया एक ब्रैंड के प्रमोशन में शामिल होने गईं थीं। वहीं उन्होंने कुछ ऐसे कपड़े पहने जो आरामदायक नहीं थे। वे बार-बार अपनी ड्रेस ठीक कर रहीं थीं, तस्वीरों में साफ पता चल रहा है कि उनकी उन्हें सीट पर बैठने में भी दिक्कत हो रही थी। आलिया की ड्रेस इतनी छोटी थी कि बैठने पर उनकी इनरवियर दिख रही थी।

गौरतलब है कि हाल ही में एक फैशन शो के दौरान रैंप वॉक करते वक्त अभिनेत्री नरगिस फाखरी की ड्रेस भी फट गई थी, लेकिन उन्होंने इसके बावजूद कैट वॉक किया।

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सेल्फी लेना आज एक फैशन बन गया है, सिर्फ हम, आप और बड़े सितारे ही सेल्फी के शौकीन नही है बल्कि जानवर भी इसके शौकीन बन गये हैं। इसका नतीजा यह हुआ कि एक बंदर और फोटोग्राफर में सेल्फी की वजह से विवाद हो गया है।

न्यूयॉर्क इंडोनेशिया के सुलावेसी द्वीप पर तीन साल पहले एक बंदर (ब्लैक मकैक, इंडोनेशिया में पाए जाने वाली बंदरों की एक प्रजाति है) द्वारा ली गई एक सेल्फी पर विकीपीडिया और जिस कैमरे से सेल्फी ली गई थी उसका मालिक फोटोग्राफर दोनों अपना-अपना मालिकाना हक जता रहे हैं। फोटोग्राफर डेविड स्लेटर का दावा है कि यह तस्वीर उनके कैमरे से ली गई है और विकीपीडिया इसे अपने पेज से हटा दे। जबकि विकीपीडिया ने इस सेल्फी को यह कहते हुए हटाने से इनकार कर दिया है कि क्योंकि यह तस्वीर बंदर ने ली थी।

विकीपीडिया के मुताबिक इस तस्वीर की कॉपीराइट उस बंदर के पास है न कि उस फॉटोग्राफर के पास विकीपीडिया ने अपनी बेवसाइट पर लिखा है, इन तस्वीरों को पब्लिक डोमेन में इसीलिए रखा गया कि इसे इंसान ने नहीं खींचा और इसलिए कोई कॉपीराइट भी नहीं बनता है।

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लंदन।

भारत में पिछले कुछ सालों में करोड़पतियों की संख्या में तेजी आई है। हाल ही में व‌र्ल्ड वेल्थ द्वारा जारी वेल्थ इंडेक्स के अनुसार करोड़पतियों की संख्या के मामले में भारत दुनियाभर में आठवें स्थान पर है। यहां करोड़पति लोगों की संख्या 14,800 है। भारत ने रूस, ऑस्ट्रेलिया और फ्रांस जैसे देशों को पीछे छोड़ दिया है। शीर्ष 10 देशों में अमेरिका, चीन और जर्मनी जैसे विकसित देश हैं। इस सूची में उन लोगों को ही शामिल किया गया जिनके पास एक करोड़ डॉलर यानी 61 करोड़ या उससे ज्यादा की संपत्ति है।

टॉप 30 शहरों में मुंबई :

करोड़पति के शहरों की बात की जाए तो दुनियाभर के शीर्ष 30 शहरों में मुंबई शामिल है। मुंबई में इनकी संख्या 2700 है जो जर्मनी के म्यूनिक शहर में करोड़पति लोगों की संख्या के बराबर है। वहीं, 15 हजार से ज्यादा करोड़पतियों के साथ हांगकांग दुनिया में पहले पायदान पर है। इसके बाद न्यूयॉर्क, लंदन और मॉस्को हैं। पिछले दस सालों में लखपति और करोड़पति लोगों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है। जहां लखपति लोगों की संख्या 58 प्रतिशत की दर से बढ़ी, वहीं करोड़पति लोगों की संख्या में 78 प्रतिशत से इजाफा हुआ।

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लखनऊ।
यूसीमॉस इंडिया की ओर से उत्तर प्रदेश में कराए गए स्टेट लेवल एबेक्स एंड मेंटल अर्थमेटिक कंपटिशन में सिटी मांटेसरी स्कूल कानपुर रोड के चौथी क्लास के छात्र सास्वत सिंह ने प्रथम स्थान प्राप्त किया है। उन्हें यूसीमॉस की ओर से चैंपियंस ट्राफी दी गई है। यह कंपटिशन शनिवार को सिटी मांटेसरी स्कूल की गोमती नगर शाखा में हुआ था। जिसका परिणाम रविवार की देर रात घोषित किया गया।

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लंदन।

फ्रांस की एक अदालत में नौ साल के एक कुत्ते को मालिक के हत्यारे को पहचानने के लिए कठघरे में बुलाया गया। टैंगों नाम के लैब्राडोर नस्ल के इस कुत्ते को मध्य फ्रांस के टोर्स की अदालत में हत्या के मामले की शुरुआत जांच के दौरान मालिक के संदिग्ध हत्यारे को पहचानने के लिए बुलाया गया था। आरटीएल रेडियो की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने संदिग्ध को एक बैट से कुत्ते को डराने को कहा ताकि टैंगो की प्रतिक्रिया समझ कर हत्यारे को पहचाना जा सके।

इस परीक्षण को निष्पक्ष रखने के लिए टैंगो की तरह दिखने वाले नोरमन नाम के एक अन्य कुत्ते को भी अदालत में बुलाया गया। संदिग्ध से नोरमन को उसी तरह डराने को कहा गया लेकिन यह परीक्षण पूरी तरह विफल हो गया। हालांकि यह पहली बार नहीं है जब फ्रांस की किसी अदालत ने गवाही के लिए किसी कुत्ते को अदालत में बुलाने को मंजूरी दी है।

पिछले महीने भी अदालत में एक कुत्ते को हत्या के दो संदिग्धों की तस्वीर दिखाकर उन्हें पहचानने की कोशिश की गई थी। अदालत में एक पशु चिकित्सक को भी बुलाया गया था ताकि वह कुत्ते के हाव भावों को समझ सके। वर्ष 2008 में स्कूबी नाम के कुत्ते को पहली बार हत्या के संदिग्ध की पहचान के लिए अदालत में बुलाया गया था।

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मुंबई।
कैनेडियन पोर्न स्टार से बॉलीवुड स्टार बनी सनी लियोनी एक बार फिर सुर्खियों में है। खबर है कि सनी ने एक हीरा व्यापारी की पाट्र्री में स्ट्रिप डांस किया।
बीते दिनो में ऐसा लग रहा था कि सनी अपनी पोर्न स्टार इमेज से बाहर आने के लिए हर संभव प्रयास कर रही हैं पर बॉलीवुड बेबी डॉल की इन पिक्चर्स ने उन्हे एक बार फिर पोर्न स्टार की इमेज में लाकर खड़ा कर दिया है।
खबर है कि सनी बीते दिन पुणे में एक हीरा व्यापारी की पार्टी में न्यूड डांस किया और सनी को ऐसा करने के लिए 40 लाख रुपए दिए गए।
हालांकि सनी ने इन पिक्चर्स और खबरों को एक सिरे से खारिज कर दिया है। सनी ने ट्विट किया कि- मैं अप्रैल 18 को नीनाएनलोलो की शुटिंग में बिजी थी। और प्लीज इस तरह की खबरों को छापने से पहले आप फैक्ट्स चेक जरुर करें।

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कुबैत।

हाल में ई कोली बैक्टीरिया उस समय सुर्खियों में आया, जब जर्मनी में स्पेन से आयातित खीरा खाने के बाद 270 लोग बीमार पड़ गए। बाद में पता चला कि यह खीरे में मौजूद ई कोली बैक्टीरिया की करतूत थी। ‘ई कोली या ई कोलोई बैक्टिरिया’ मानव शरीर में भी पाया जाता है।

अब एक्सेटर विश्वविद्यालय इस घातक बैक्टीरिया का इस्तेमाल डीजल उत्पादन में में करने जा रहा है। प्रो. लव के मुताबिक ई कोली अपने सेल मेम्ब्रेंस का निर्माण करने की प्रक्रिया में शर्करा को प्राकृतिक रूप से वसा में बदल देते हैं। इसी दौरान प्रक्रिया में हस्तक्षेप कर वैज्ञानिक वसा को डीजल में बदल लेते हैं। (एजेंसी) लंदन। वैज्ञानिकों ने ऐसी तकनीक विकसित करने का दावा किया है, जिसमें जरूरत पड़ने पर एक बैक्टीरिया की मदद से डीजल का उत्पादन किया जा सकेगा।

इस डीजल की खासियत यह होगी कि इसे सामान्य डीजल की तरह ही स्टोर और सप्लाई किया जा सकेगा। एक्सेटर विश्वविद्यालय ने पेट्रोलियम कंपनी शेल के सहयोग से यह प्रौद्योगिकी विकसित की है। हालांकि, इसके कारोबार में अभी काफी चुनौतियां आ रही हैं। ‘ई कोली’ बैक्टीरिया के विशेष स्ट्रेंस से तैयार डीजल बहुत हद तक परंपरागत ईंधन की तरह होगा।

अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि ऐसे में इसे पेट्रोलियम उत्पादों के साथ मिलाने की जरूरत नहीं होगी, जैसा कि आमतौर पर प्लांट आयल से निकाले गए बायोडीजल के मामले में जरूरत होती है। एक्सेटर विश्वविद्यालय के बायोसाइंस विभाग में प्रोफेसर जॉन लव का कहना है कि इस प्रोजेक्ट का मुख्य लक्ष्य ऐसे व्यवासायिक बायो-फ्यूल का विकास करना है, जिसके इस्तेमाल में वाहनों को मॉडीफाई न करना पड़े।

उनका कहना है कि वर्ष 2050 तक ग्रीन हाउस गैसों के 80 फीसद उत्सर्जन के टारगेट को पूरा करने के लिए परंपरागत डीजल को बायो-फ्यूल कमर्शियल विकल्प के रूप में ढालना जरूरी हो गया है।

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सुल्तानपुर। यूपी के सुल्तानपुर में ऎसा बच्चा पैदा हुआ है, जिसका दिल उसके शरीर से बाहर है। फिलहाल अच्छा सिर्फ इतना है कि उसकी सांसें चल रही हैं, लेकिन डॉक्टरों का कहना है, वह तीन दिन से ज्यादा नहीं जी सकेगा।

उसे एक्टोपिया कॉर्डिस नाम की दुर्लभ बीमारी है। उसकी जिंदगी बचाने के लिए बड़े ऑपरेशन की जरूरत है, जो बेहद खर्चीला है। उसके परिवार की आमदनी रोजाना करीब 300 रूपए है। उसके मां-बाप बच्चे की जान बचाने को मदद की अपील कर रहे हैं। प्रियंका पाल (24) ने बीते बुधवार को इस बच्चे को जन्म दिया तो सब हैरान रह गए। यह दुर्लभ बीमारी दस लाख लोगों में से 8 को अपनी चपेट में लेती है और इससे पीडित 90 फीसदी बच्चे जन्म के तीन दिन के भीतर दम तोड़ देते हैं। बच्चे का नाम अब तक नहीं रखा गया है।

बच्चे को देहरादून के अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी हालत गंभीर है।

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कोयम्बटूर। 9 साल की इस लड़की के नाम इतने सारे रिकॉर्ड्स है कि सुनने वाला हर शख्स हैरान रह जाए। इतना ही नहीं बल्कि इस छोटी सी उम्र में इसें डॉक्टरेट की डिग्री भी मिल चुकी है।

डॉक्टरेट की डिग्री लेने वाली यह 9 साल की लड़की पी आदर्शिनी है जो तमिलनाडु के कोयम्बटूर शहर की रहती है तथा अभी चौथी कक्षा में ही पढ़ती है। लेकिन ब्रिटेन की वर्ल्र्ड यूनिवर्सिटी ने इसें डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया है।

वर्ल्र्ड यूनिवर्सिटी ने पी आदर्शिनी को यह डिग्री लैपटॉप के हिस्सों को बहुत ही कम समय में अलग-अलग करने तथा वापस से जोड़ने (असेंबल) के लिए दिया है।

पी आदर्शिनी के पिता आईटी सॉल्युशंस फर्म चलाते है। उनका कहना है कि उनकी बेटी को यह सम्मान रिकॉर्ड तोड़ प्रस्तुति के लिए मिला है।

पी आदर्शिनी को डॉक्टरेट की यह उपाधि वियतनाम के हो चि मिन्ह शहर में दी गई है। इतना ही नहीं बल्कि यह छोटी सी लड़की अब तमिलनाडु बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, इंडियन बुक ऑफ रिकॉड्स तथा एशिन बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज करा चुकी है।

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गायनीकोमैस्टिया ऐसी शारीरिक स्थिति है, जिसमें पुरुषों के सीने का आकार सामान्य से कहीं ज्यादा बढ़ जाता है। इस वजह से सीने पर वसायुक्त टिश्यूज का अत्यधिक जमाव हो जाता है। गायनीकोमैस्टिया से ग्रस्त पुरुष अपने शरीर के प्रति बहुत चिंतित हो जाते हैं। विशेषकर तैरते समय, जिम में या चुस्त टीशर्ट पहनते वक्त। इससे उनका आत्मविश्वास घट जाता है। इस प्रकार उनके मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

इलाज

गायनीकोमैस्टिया से छुटकारा पाया जा सकता है। इसके लिए लाइपोसक्शन और कुछ विधियों के द्वारा अतिरिक्त चर्बी (फैट)और ग्रंथिमय टिश्यूज को हटा दिया जाता है। कुछ मामलों में ऊपरी त्वचा को भी टाइट किया जाता है। यह सर्जरी लोकल या जनरल एनेस्थीसिया देकर की जा सकती है। निपल के एरिया के निचले हिस्से में एक छोटा छेद किया जाता है जिसके जरिए लाइपोसक्शन कैन्युला को भीतर डाला जाता है। कितनी चर्बी निकालनी है, इस आधार पर सर्जरी में एक से दो घंटे लग सकते हैं। जनरल एनेस्थेसिया देकर सर्जरी करने पर रोगी को एक रात के लिए अस्पताल में रुकना पड़ता है।

नवीनतम इलाज

मिनिमली इनवेसिव सर्जरी एक आधुनिक और बेहद कम चीरफाड़ वाली सर्जरी है। इसमें एक छोटे से छिद्र के जरिए चर्बी (फैट)और ग्रंथिमय टिश्यूज को बाहर निकाला जाता है। इस प्रक्रिया का लाभ यह है कि इसमें निशान कम पड़ते हैं और कोई रिक्त स्थान शेष नहीं रहता। इस सर्जरी के बाद तेजी से रोगी स्वास्थ्य लाभ करता है और कम से कम निशान दिखाई पड़ते हैं। रोगी को सर्जरी वाले स्थान पर कुछ पीड़ा, खरोंच व सूजन जैसा अनुभव होगा, किंतु यह सब कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है। रोगी को कुछ दिनों के लिए काम से छु˜ी लेनी पड़ सकती है और कुछ समय के लिए ऐसी गतिविधियों से परहेज करना पड़ता है, जिनसे शरीर पर दबाव पड़ता हो। सर्जरी किए गए स्थान पर संक्रमण या निशान रह जाने का जोखिम बहुत कम होता है। इस समस्या से परेशान पुरुषों को इस सर्जरी के बाद बहुत संतुष्टि और खुशी प्राप्त होती है और वे अपने शरीर के संदर्भ में पहले से कहीं ज्यादा सहज व स्वाभाविक महसूस करते हैं।

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