Tuesday, October 16, 2018
अजब-गजब

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मेलबर्न। ऑस्ट्रेलिया में एक भेड़ से हाल ही 40.45 किलो ऊन प्राप्त की गई। इसी के साथ इस भेड़ ने नया रिकॉर्ड बना दिया। ऑस्ट्रेलिया की राजधानी कैनबरा के बाहरी इलाके में यह भेड़ पाई गई। भेड़ का नाम क्रिस है।

करना पड़ा ऑपरेशन
ऊन प्राप्त करने के लिए हालांकि जोखिम भरा ऑपरेशन भी करना पड़ा। इस भेड़ ने न्यूजीलैंड की श्रेक नामक भेड़ का विश्व रिकॉर्ड भी तोड़ दिया है, जिससे २७ किलो ऊन प्राप्त हुई थी।
खतरे में थी जान
ऑस्ट्रेलिया की पशु क्रूरता निवारण के लिए बनी रॉयल सोसायटी (आरएसपीसीए) के अनुसार, इतनी ज्यादा मात्रा में ऊन होने से भेड़ की जान को खतरा भी था। भेड़ से नियमित रूप से ऊन न प्राप्त करने पर जीवन खतरे में पड़ सकता है।

पांच सालों से नहीं काटी गई थी ऊन
आरएसपीसीए के मुताबिक, शरीर पर अत्यधिक ऊन की वजह से भेड़ मुश्किल से चल पा रही थी और पिछले पांच वर्षो से उससे ऊन नहीं प्राप्त की गई। गौरतलब है कि यह मेरीनो भेड़ है। इन्हें ऊन प्राप्त करने के लिए ही पाला जाता है। इसीलिए भेड़ से नियमित रूप से ऊन प्राप्त करना जरूरी है।

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20 मार्च अमावस्या को दोपहर में ऎसी अद्भुत खगोलीय घटना घटने वाली है जिसके चलते पूरी दुनिया अंधेरे में डूब जाएगी। हालांकि भारतवर्ष पर इसका कोई असर नहीं पड़ने वाला और न ही यहां पर इसे देखा जा सकेगा।

पूर्ण सूर्यग्रहण के चलते होगा ऎसा-
20 मार्च दोपहर में यह घटना घटेगी। इस दिन सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा की खास स्थिति के कारण पूर्ण सूर्यग्रहण लगेगा। यह इस साल का पहला ग्रहण होगा जो भारत के किसी भी इलाके में दिखाई नहीं देगा। यह खगोलीय घटना यूरोप, अटलांटिक महासागर और अफ्रीका में ही देखी जा सकेगी।

करीब 4 घंटे चलेगा यह घटनाक्रम-
खगोलविदों के अनुसार यह सूर्यग्रहण भारतीय मानक समय (आईएसटी) 20 मार्च को दोपहर 1 बजकर 11 मिनट पर शुरू होगा तथा पांच बजकर 20 मिनट पर समाप्त होगा। इस यह सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा की दिलचस्प भूमिका वाला घटनाक्रम लगभग 4 घंटे तक चलेगा।

सिर्फ 2 मिनट 50 सेकेंड का पूर्ण ग्रहण-
हालांकि यह सूर्यग्रहण करीग चार घंटे तक चलेगा लेकिन पूर्ण ग्रहण दोपहर 3 बजकर 15 मिनट होगा। इस समय सूर्य को चंद्रमा पूरी तरह ढंक देगा जिससे धरती पर अंधेरा छा जाएगा और यह स्थिति 2 मिनट 50 सेकेंड की होगी।

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Two‘bananas’ a day keep a doctor away, जी हां, सिर्फ apple ही नहीं, बल्कि दिन में दो केले भी आपको डॉक्टर से दूर रख सकते हैं। इससे पहले की हम आपको एक दिन में दो केले खाने के फायदे बताना शुरू करें, पहले यह जान लीजिए कि केला खाने से कोई मोटा नहीं होता। यह सिर्फ एक मिथ है। इससे आपको तुरंत एनर्जी मिलती है। इसमें फाइबर और तीन तरह की शुगर होती है- सुक्रोज़, फ्रुक्टोज़ और ग्लूकोज़।
एक रिसर्च के मुताबिक, 90 मिनट के वर्कआउट के लिए दो केले आपको खूब एनर्जी दे सकते हैं। इसलिए एथलीट्स केला ज़रूर खाते हैं। एनर्जी लेवल बढ़ाने के अलावा, केले से विटामिन्स भी मिलते हैं। दिन में दो केले खाने से आपके शरीर से जुड़ी 12 परेशानियां दूर हो सकती हैं।1.डिप्रेशन:

एक रिसर्च की मानें तो डिप्रेशन के मरीज़ जब भी केला खाते हैं, उन्हें आराम मिलता है। दरअसल, केले में एक ऐसा प्रोटीन होता है, जो आपको रिलैक्स फील करवाता है और आपका मूड अच्छा करता है। केले में विटामिन B6 भी होता है, जिससे आपका ब्लड ग्लूकोज़ लेवल ठीक रहता है।2.एनीमिया:

केले में आयरन होता है। इसलिए इसे खाने से ब्लड में हीमोग्लोबिन की कमी नहीं होती। जिन लोगों को एनीमिया है, उन्हें केला ज़रूर खाना चाहिए।

 

3.ब्लड प्रेशर:
इसमें पोटैशियम बहुत ज़्यादा होता है और नमक की मात्रा कम होती है, जिसके चलते आपका ब्लड प्रेशर नॉर्मल रहता है। FDA, यानी US FOOD AND DRUG ADMINISTRATION ने भी हाल ही में BANANA INDUSTRY को यह बात आधिकारिक रूप से बताने को कहा है कि केला खाने से ब्लड प्रेशर और स्ट्रोक होने का रिस्क कम हो जाता है।4.ब्रेन पावर:

इंग्लैंड के एक स्कूल में 200 स्टूडेंट्स को हर रोज़ इम्तिहान से पहले नाश्ते में केला ज़रूर खिलाया गया, ताकि उनका दिमाग तेज़ हो। दरअसल, रिसर्च कहता है कि पोटैशियम होने के चलते, केला खाने से याद करने की क्षमता बढ़ती है।5.कॉन्सटीपेशन:

अगर आपको कब्ज़ रहती है, तो केला आपके काफी काम की चीज़ है। दिन में दो केले खाइए और फिर देखिए फाइबर होने के चलते केला खाने से कैसे आपकी यह परेशानी दूर होती है।6.हैंगओवर्ज़ :

बहुत ज़्यादा अल्कोहल पीने के बाद, अगर आपका सिर दर्द हो, तो एक गिलास BANANA SHAKE पिएं। इसमें थोड़ी शहद भी डालिए। कुछ देर में आपका ब्लड शुगर लेवल ठीक हो जाएगा और हैंगओवर भी दूर हो जाएगा। सिर्फ यही नहीं, इससे आपकी बॉडी भी हाइड्रेटिड हो जाएगी।7.हार्टबर्न:

 

अगर आपको एसिडिटी हो रही है और सीने में जलन भी, तो केला आपकी समस्या का समाधान है।

8.मॉर्निंग सिकनेस:

अगर आपको खाने के बाद भी भूख लगती है, तो केला खाएं। इससे आपका ब्लड शुगर लेवल नॉर्मल रहेगा और आप रिलैकस्ड फील करेंगे।

9.मस्कीटो बाइट्स:

मच्छर के काटने पर आप लोशन या क्रीम की जगह, केले के अंदर का भाग भी लगा सकते हैं। इससे सूजन और जलन कम हो जाएगी।10.नर्व्ज़:

केले में विटामिन B होता हैं, जो आपके नर्वस सिस्टम को सही रखता है। ऑस्ट्रेलिया के एक साइकोलॉजी इंस्टिट्यूट ने रिसर्च में पाया कि वर्कप्लेस में भूख लगने पर इम्पलॉई फास्ट फूड और स्नैक्स से अपना पेट भरते हैं। इस वजह से टेंशन और मोटापा बढ़ता है। इसलिए ज़रूरी है कि हर दो घंटे बाद आप कार्बोहाइड्रेट वाला फूड खाएं, जैसे केला।11.अल्सर्ज़:

अगर आपको आए दिन छाले होते हैं, तो केला आपके लिए लाभदायक हो सकता है।12.टेम्परेचर कंट्रोल:

केला खाने से प्रेग्नेंट वुमन का टेम्परेचर भी सही रहता है। अगर आप केले की तुलना सेब से करेंगे, तो पाएंगे कि केले में सेब से चार गुना ज्य़ादा प्रोटीन, दो गुना ज़्यादा कार्बोहाइड्रेट, तीन गुना ज़्यादा फॉस्फोरस, पांच गुना ज़्यादा विटामिन A और आयरन होता है। केले में पोटैशियम की मात्रा अधिक होती है, इसलिए दिन में दो केले ज़रूर खाएं और हेल्दी रहें।

 

जेनेवा। भौतिकी के क्षेत्र में स्विट्जरलैंड के वैज्ञानिकों ने ऐतिहासिक सफलता हासिल करते हुए कण व तरंग के रूप में पहली बार प्रकाश की तस्वीर लेने में सफलता हासिल की। प्रकाश के कण व तरंग के तौर पर एक साथ व्यवहार करने की प्रकृति का भी पहली बार पता चला।

‘नेचर कम्यूनिकेशंस’ में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, यह सफलता लुसाने स्थित स्विस फेडरल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के शोधकर्ताओं ने हासिल की। फाब्रीजियो कारबोन के नेतृत्व वाली शोधकर्ताओं की टीम ने इलेक्ट्रॉन के जरिये यह कारनामा कर दिखाया।

विज्ञानियों ने धातु के एक अतिसूक्ष्म तार (नैनोवायर) पर लेजर प्रकाश (लाइट एंप्लीफिकेशन बाई सिमुलेटेड एमीशन ऑफ रेडिएशन) प्रवाहित किया, जिससे उसमें मौजूद आवेशित कणों को अतिरिक्त ऊर्जा मिली और वह कंपन करने लगा। साथ ही, सूक्ष्म तार में प्रकाश दो दिशाओं में संचरित होने लगा। प्रकाश की इन दो विपरीत दिशाओं में प्रवाहित होने वाली तरंगें मिलान बिंदु पर स्थिर प्रतीत हो रही थीं। विज्ञानियों ने स्थिर तरंगों का चित्र उतारने के लिए नैनोवायर के पास से इलेक्ट्रॉन को प्रवाहित किया।

सूक्ष्म तार में प्रवाहित प्रकाश के संपर्क में आने पर या तो उनकी गति बढ़ गई या फिर धीमी हो गई। कारबोन की टीम ने अल्ट्राफास्ट (तीव्रतम) माइक्रोस्कोप के जरिये प्रकाश की गति में परिवर्तन वाले स्थान का चित्र लेने में सफलता हासिल की। इस घटना ने जहां प्रकाश के तरंग की प्रकृति को दिखाया, वहीं कण के तौर पर भी उसके व्यवहार को सामने लाने में सफलता मिली।

विज्ञानियों ने बताया कि स्थिर तरंगों के पास से गुजरने पर इलेक्ट्रॉन ने प्रकाश के कण फोटॉन को टक्कर दी। इससे इलेक्ट्रॉन की गति में परिवर्तन दर्ज किया गया। यह बदलाव इलेक्ट्रॉन और फोटॉन के बीच एनर्जी पैकेट्स (क्वांटा) के आदान-प्रदान के तौर पर सामने आया, जो प्रकाश के व्यवहार को कण के तौर पर दिखाता है। इससे क्वांटम कंप्यूटिंग के क्षेत्र में क्रांति आने की संभावना है।

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नियमित अंतराल पर उपवास रखने से सिर्फ शरीर के विकार ही दूर नहीं होते हैं, आपकी उम्र भी लंबी हो सकती है। ताजा शोध से यह पता चला है कि उपवास रखने वाला व्यक्ति लंबी उम्र तक स्वस्थ जीवन बिता सकता है। अमेरिका के फ्लोरिडा विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने चुहिया पर इसका सफल परीक्षण किया। शोध रिपोर्ट के मुताबिक चुहिया न केवल ज्यादा दिनों तक जीवित रही, बल्कि उसे उम्र संबंधी बीमारियां भी नहीं हुईं। विशेषज्ञों ने दस सप्ताह तक चले शोध के दौरान वजन, रक्तचाप, ग्लूकोज की मात्र, कोलेस्ट्रॉल और प्रोटेक्टिव कोशिका में आने वाले परिवर्तनों पर नजर रखी। हार्वर्ड मेडिकल स्कूल से जेनेटिक्स में पीएचडी कर रहे माइकल गुओ ने कहा कि शोध में हमने नियमित अंतराल पर उपवास रखने से आयु और प्रोटेक्टिव कोशिका के व्यवहार के लिए जिम्मेदार एसआइआरटी-3 जीन में वृद्धि देखी। इस प्रोटीन के बढ़ने पर उम्र बढ़ती है।नियमित अंतराल पर उपवास रखने से सिर्फ शरीर के विकार ही दूर नहीं होते हैं, आपकी उम्र भी लंबी हो सकती है। ताजा शोध से यह पता चला है कि उपवास रखने वाला व्यक्ति लंबी उम्र तक स्वस्थ जीवन बिता सकता है। अमेरिका के फ्लोरिडा विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने चुहिया पर इसका सफल परीक्षण किया। शोध रिपोर्ट के मुताबिक चुहिया न केवल ज्यादा दिनों तक जीवित रही, बल्कि उसे उम्र संबंधी बीमारियां भी नहीं हुईं। विशेषज्ञों ने दस सप्ताह तक चले शोध के दौरान वजन, रक्तचाप, ग्लूकोज की मात्र, कोलेस्ट्रॉल और प्रोटेक्टिव कोशिका में आने वाले परिवर्तनों पर नजर रखी। हार्वर्ड मेडिकल स्कूल से जेनेटिक्स में पीएचडी कर रहे माइकल गुओ ने कहा कि शोध में हमने नियमित अंतराल पर उपवास रखने से आयु और प्रोटेक्टिव कोशिका के व्यवहार के लिए जिम्मेदार एसआइआरटी-3 जीन में वृद्धि देखी। इस प्रोटीन के बढ़ने पर उम्र बढ़ती है।

अब मोहर्रम के फ्री ‘मोबाइल एप्स ’
लखनऊ। इंटरनेट व मोबाइल फ्रेण्डली लोग संचार के इन साधनों से गमे हजरत इमाम हुसैन में शरीक हो रहे हैं। फेसबुक और वाट्सअप पर लोग अपने रिश्तेदारों, अजीजों व मित्रों को पैगाम-ए-कर्बला भेज रहे हैं। एंड्राइड मोबाइल फोन के लिए इस बार कई ऐसे मोबाइल एप्स मौजूद हैं, जिसमें मोहर्रम के नौहे, मजलिस,मर्सिया, कर्बला की घटना, मुखतार नामा और आशूर के आमाल हैं, जिन्हें अपलोड किया जा सकता है।
गूगल प्ले में ‘अजादारी’ नाम से एप्स है, जिसको इंस्टाल करने पर मशहूर उलेमा के ऑडियो-वीडियो मजलिस व मशहूर नौहाख्वानों के नौहे सुने जा सकते हैं। इस पर मशहूर नौहाख्वान नदीम सरवर, फरहान अली,मीर हसन मीर, इरफान हैदर,मीसम अब्बास, शदमान रजा, अली सफदर आदि के नौहे मौजूद हैं। मशहूर उलेमा जमीर अख्तर नकवी, मौलाना मिजा मोहम्मद अतहर, मौलाना हसन सादिक, मौलाना अली रजा काजमी, गजनफर अब्बास तूनसवी, शौकत रजा शौकत, मौलाना कुमैल मेंहदवी और मौलाना जान अली काजमी की 2007 से 2013 तक की मजलिसे भी इस पर उपलब्ध हैं।
मोहर्रम वॉलपेपर्स एप्स से अल्लाह, आशूरा, अब्बास इब्ने अली, मोहर्रम, अरबाइन के वालपेपर्स लोड कर सकते हैं। ‘आई दुआ’ एप्स इंस्टाल करने पर मोहर्रम की दुआएं और अन्य इबादतें सुन सकते हैं। नौहा डाउनलोड, बारगाह- ए-हुसैन,नौहे आदि सभी फ्री एप्स हैं।

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हरारे।

इस दुनिया में कई बार ऐसी घटनाएं सामने आतीं हैं जिनपर यकीन करना बहुत मुश्किल होता है, लेकिन वे सच होतीं हैं। हाल ही में जिम्बाब्वे के स्विस्वी में एक महिला को उसके मृत पति के शव के साथ सेक्स करने के लिए मजबूर किया गया और वह भी ताबूत के अंदर।

जिम्बाब्वे के स्विस्वी में सारा सिमिराई नामक महिला ने अपने पति की अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए इसे पूरा किया। उसने अपने पति के शव को दफनाए जाने से पहले सेक्स किया।

सारा पहले अपने पति ननुराई मुसामो का घर छोड़कर प्रेमी के साथ चली गई थी। कुछ दिनों के बाद उसके प्रेमी ने उसे छोड़ दिया और वह वापस अपने पति के पास आ गई। इसके थोड़े दिनों बाद ही नुनुराई की मौत हो गई। मरने से पहले नुनुराई ने एक नोट छोड़ा था जिसे उसने अपने अंतिम संस्कार में पढ़े जाने की बात कही थी। इस नोट में नुनुराई ने सारा के लिए लिखा था कि उसे खोने के बाद उसका दिल टूट गया था। इसके साथ ही उसने आखिरी इच्छा के तौर पर कहा था कि सारा उसके शव के साथ सेक्स करे।

सारा ने पहले तो इसे मानने से इंकार कर दिया था, लेकिन पति के परिजनों के दबाव डालने के बाद वह इसके लिए मान गई। नुनुराई के एक रिश्तेदार के अनुसार, उन्होंने इसके लिए पहले ताबूत को खोला और सारा उसके अंदर गई और फिर उसने अपने पति की अंतिम इच्छा पूरी की।

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स्विटजरलैंड।

इंसान बदलते हैं, सोच बदलती है और बदलता है जमाना एक जमाना था जब हम अपने प्रियजनों के स्वर्गवास पर उनका अंतिम संस्कार करते थे और उसके बाद उनकी राख को शुद्ध कलश में समेट कर रख लेते थे, पर अब ना ही आपको कलश की जरूरत पड़ेगी और ना ही करना होगा राख को नदी में प्रवाहित इसके बावज़ूद आपके मृत प्रियजन रहेंगे आपके और भी करीब जी हां! हम आपको सुनाने जा रहे हैं ऐसे इंसान की कहानी जिसने विकसित की है एक ऐसी तकनीक जिससे राखों को बदल दिया जाता है हीरे में।

कौन है वो

जिस व्यक्ति ने यह तरीका खोज निकाला है उसका नाम है रिनाल्डो विल्ली स्विटजरलैंड के रहने वाले विल्ली ने एक कंपनी खोली है जिसका नाम ‘एलगोरडैंजा’ है जिसका हिंदी अर्थ ‘यादें’ हैं। इस कंपनी में मृत व्यक्ति के अंतिम संस्कार के बाद बची राख को उन्नत तकनीकों का प्रयोग करते हुए हीरे में बदल दिया जाता है।

यह कंपनी हर साल 850 लाशों की राख को हीरे में तब्दील कर देती है। इस काम की लागत हीरे की आकार के आधार पर निर्धारित की जाती है। अमूमन यह 3 लाख से 15 लाख रूपए के बीच बैठती है।

कैसे आया विल्ली के दिमाग में यह विचार विल्ली को स्कूल में उसकी शिक्षिका ने एक लेख पढ़ने को दिया जो सेमीकंडक्टर उद्योग में प्रयोग होने वाले सिंथेटिक हीरे के उत्पादन पर आधारित थी। इस लेख में सब्जियों की राख से हीरे बनाने का तरीका था। लेकिन युवा विल्ली उसे मानव राख समझ कर पढ़ रहा था। विल्ली को विचार पसंद आया और उन्होंने अपनी शिक्षिका से इसके बारे में पूछा। शिक्षिका ने उसकी भूल को सुधारा तो विल्ली ने कहा अगर सब्जियों की राख से हीरा बनाया जा सकता है तो इंसान की लाश के राख से क्यों नहीं? इस पर उसकी शिक्षिका ने उस लेख के लेखक से सम्पर्क किया औऱ विल्ली को उनसे मिलवाया। फिर उन लोगों ने मिलकर इस विचार पर काम किया जिससे एलगोरडैंजा अस्तित्व में आई।

कैसे बनता है यह हीरा

सबसे पहले यह कंपनी इंसानी-राख को स्विटजरलैंड स्थित अपनी प्रयोगशाला में मंगवाती है। यहां एक विशेष प्रक्रिया द्वारा इस राख से कार्बन को अलग किया जाता है, अलग किए हुए कार्बन को उच्च ताप पर गर्म कर उसे ग्रेफाइट में बदला जाता है। इस ग्रेफाइट को एक मशीन में ठीक उन परिस्थितियों में रखा जाता है जैसा कि जमीन के नीचे पाई जाती है। कुछ महीनों के बाद वो ग्रेफाइट हीरे में बदल जाते हैं। फर्क बूझो तो जानें

सिंथेटिक हीरे और असली हीरे में फर्क अत्यंत बारीक होती है जिसका पता सिर्फ प्रयोगशाला में रासायनिक स्क्त्रीनिंग के द्वारा किया जा सकता है। कुशल से कुशल जौहरी भी दोनों के बीच के अंतर को नहीं बता सकता।

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ब्यूनस आयर्स।
हालांकि भले ही यह सुनने में अजीब लगे लेकिन यह सच है। एक बकरी ने ऎसे नवजात को जन्म दिया है जो इंसान जैसा लगता है। इसकी तस्वीरें इंटरनेट भी वायरल हो चुकी है।

यह मामला अर्जेटीना के सेंट्रो का है जहां बकरियां पालने वाले विलालबा परिवार की एक पालतू बकरी ने ऎसे अजीबोगरीब नवजात को जन्म दिया है जो दिखने में हूबहू इंसान जैसा लगा लगाता है।

हालांकि बकरी के नवजात का शरीर पूरा विकसित नहीं हो पाया, लेकिन इस चेहरा किसी इंसानी चेहरे जैसा है। इसके अलावा बाकी का शरीर भी ठीक से विकसित नहीं हुआ है।

इस अजीबोगरीब नवजात का मामला तब सामने आया जब विलालबा परिवार के एक दोस्त ने इसकी तस्वीरें ऑनलाइन जारी दी। उसका कहना था कि क्षेत्र में कीटनाशकों के ज्यादा इस्तेमाल से ऎसे जीव पैदा होने लगे हैं।

लेकिन उसें अंदाजा भी नहीं था कि आनलाइन बैठे कई लोग विलालबा परिवार को पलेट लेंगे। उन लोगों ने बिलावल परिवार पर बेस्टीलिटी का आरोप लगाया है। बेस्टीलिटी यानि बकरी और इंसान के बीच शारीरिक संबंध बनाया जाना।

हालांकि विलालबा परिवार इन कमेंट्स को बेतुके करार दिया है। उनका कहना है कि यह इंसान जैसा दिखने वाला यह बकरी का बच्चा पैदा होते ही मर गया था और यह एक जेनेटिक म्यूटेशन का मामला है जिसे ज्यादा तूल देने की जरूरत नहीं।

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लूसिया कासिडी अपने आपको भाग्यशाली समझती हैं कि एक दिन में 29 बार हार्ट अटैक का सामना करने के बावजूद आज वे जीवित है। लूसिया को जब पहली बार दिल का दौरा पड़ा तो वह अपने बच्चों की देखभाल कर रहीं थी। 34 वर्षीय लुसिया तीन बच्चों की मां हैं। पहले दिल के दौरे के बाद लुसिया कुछ भी ठीक से खा-पी नहीं पा रही थी। उन्हें तुरंत ही अस्पताल लेकर जाया गया, पर अगले 24 घंटे में उनका दिल 28 बार और रूका।

हर बार चिकित्सकों की टीम लुसिया के दिल को फिर से चालू करने की मशक्कत करती। हर बार उनके दिल को पुन: चालू करने के लिए डिफिब्रिलेटर दिया जाता।

लूसिया अब पूरी तरह से फिट हैं और फिटनेस प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले रहीं हैं। वे कहती हैं कि, मैं बेहद खुश हूं कि आज मैं जीवित हूं। लोग विश्वास नहीं करते की मेरे साथ क्या हुआ।

मेरे तीन बच्चे हैं जिनकी देखभाल मेरी प्रथम प्राथमिकता है। मैं उनके देखभाल में इतना खो गई थी कि अपने शरीर का ध्यान रखना भूल गई थी। मेरे सीने में हल्का दर्द को मैने स्तनपान की वजह मानकर नजरअंदाज कर दिया।

लूसिया आगे बाताती हैं कि, फिलहाल मैं स्वस्थ हूं, नियमित रूप से व्यायाम कर रही हूं और अपने शरीर का पूरा ख्याल रख रहीं हूं।

लूसिया कहती हैं कि पहले कुछ दौरों के बाद उन्हें अपनी मौत सामने दिखाई देने लगी थी। चिकित्सकों ने उनकों खांसते रहने के लिए कहा ताकि उनका दिल निरंतर अंतराल से धड़कता रहे। आखिरकार 29 बड़े दौरों के बाद डॉक्टरों ने उनके दिल को स्थिर करने में कामयाबी हासिल कर ली। 3 हफ्तों के बाद लूसिया को अस्पताल से छुट्टी मिल गई। लूसिया के शरीर में कॉर्डियोवर्टर डिफिब्रिलेटर (आईसीडी) फिट किया गया है जो पेसमेकर के जैसा एक यंत्र है।

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