Saturday, December 15, 2018
अजब-गजब

super blue moon mark in sky on January 31

वाशिंगटन: पिछली बार नीला चांद यानी ब्लू सुपरमून का दीदार नहीं कर पाने वालों लिए इसे देखने का दूसरा मौका आने वाला है. अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के मुताबिक इस महीने के आखिर में 31 जनवरी को एक बार फिर नीला चांद यानी सुपर ब्लू मून दिखेगा. इससे पहले तीन दिसंबर 2017 और एक जनवरी 2018 को काफी नजदीक से नीला चांद दिखा था और सुपरमून की झलक की इस तिकड़ी में शायद यह इस साल आखिरी मौका होगा.

क्या है सूपरमून?
सुपरमून एक आकाशीय घटना है जिसमें चांद अपनी कक्षा में धरती के सबसे निकट होता है और संपूर्ण चांद का स्पष्ट रूप से अवलोकन किया जा सकता है. 31 जनवरी को होने वाली पूर्णिमा की तीन खासियत है. पहली यह कि यह सुपरमून की एक श्रंखला में तीसरा अवसर है जब चांद धरती के निकटतम दूरी पर होगा. दूसरी यह कि इस दिन चांद सामान्य से 14 फीसदा ज्यादा चमकीला दिखेगा. तीसरी बात यह कि एक ही महीने में दो बार पूर्णिमा होगी, ऐसी घटना आमतौर पर ढाई साल बाद होती है.
सूपर ब्लू मून धरती की छाया से गुजरेगी और प्रेक्षकों को पूर्ण चंद्रग्रहण दिखेगा. नासा के प्रोग्राम एग्जिक्यूटिव व लूनर ब्लागर गॉर्डन ने नासा की ओर से जारी एक बयान में कहा कि चांद जब धरती की छाया में रहेगा तो इसकी आभा रक्तिम हो जाएगी जिसे रक्तिम चंद्र या लाल चांद कहते हैं.

धरती के इन हिस्सों में रहेगा चंद्रग्रहण
पूरे उत्तरी अमेरिका, प्रशांत क्षेत्र से लेकर पूर्वी एशिया में इस दिन पूर्ण चंद्रग्रहण दिखेगा. अमेरिका, अलास्का, हवाई द्वीप के लोग 31 जनवरी को सूर्योदय से पहले चंद्र ग्रहण देख पाएंगे जबकि मध्य पूर्व के देश समेत एशिया, रूस के पूर्वी भाग, आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में सुपर ब्लू ब्लडमून 31 जनवरी को सुबह चंद्रोदय के दौरान लोग देख पाएंगे. दिसंबर में हुई पूर्णमासी के चांद को कोल्ड मून कहा जाता है और 2017 में यह पहला सुपरमून था जिसका लोगों ने दीदार किया. चांद का आकार सामान्य से सात फीसदी बड़ा लग रहा था और यह सामान्य से 15 फीसदी ज्यादा चमकीला था.

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हर घंटे न नहाए तो ये लड़की बन जाए सांप

16 साल की शालिनी को हर घंटे नहाना पड़ता है ताकि उसकी त्वचा कड़ी ना हो जाए। वह दिनभर अपने शरीर पर क्रीम मलती रहती है जिससे त्वचा में नमी बनी रहे।


ऐसा वह अपनी खूबसूरती के लिए नहीं करती, बल्कि जिंदा रहने के लिए कर रही है। शालिनी को एक लाइलाज बीमारी है जिसके कारण लोग उसे नागकन्या भी कहने लगे हैं। स्कूल के बच्चे उससे डरते हैं जिसकी वजह से उसे स्कूल से भी निकाल दिया गया है।


शालिनी को नागकन्या इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि हर छह हफ्तों में उसकी त्वची निकलती है। जी हां! सुनने में यह काफी अजीब लग रहा है लेकिन ‘Erythroderma’ नाम की एक बीमारी की वजह से इस बच्ची की त्वचा कड़ी हो कर हर 42 दिनों में निकलती है।


वह बचपन से इस बीमारी की शिकार है। त्वचा निकलने के कारण शालिनी के शरीर से खून भी आता है साथ ही उसे काफी दर्द से भी गुजरना पड़ता है।
डॉक्टर भी इस बीमारी का इलाज कर पाने में असमर्थ हैं। किसी को नहीं मालूम की आखिर इस बीमारी का इलाज क्या है। शालिनी के माता-पिता ने उसे कई डॉक्टरों को दिखाया लेकिन सभी ने हाथ खड़े कर दिए।

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All parties pin hopes of capturing power in Uttar Pradesh on the support of Muslim voters

बाराबंकी। मतदान का समय नजदीक आता जा रहा है और साथ ही विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां तेज होती जा रही हैं। 19 फरवरी को होने वाले तीसरे चरण के मतदान पर सभी की निगाहें टिकी हुई। आखिर इस बार के चुनाव में मुस्लिम मतदाताओं का रुझान किस ओर होगा। चुनाव में सबसे अधिक निर्णायक वोटरों में शामिल मुस्लिम मतदाताओं की खामोशी ने सभी राजनीतिक दलों के दिल की धड़कनें बढ़ा दी हैं।

जिस तरह चुनाव प्रचार के दौरान सभी राजनीतिक दलों के प्रत्याशी सबकी समस्याओं का समाधान करवाने और क्षेत्र को स्वर्ग बनाने के सपने दिखाकर वोट मांग रहे है। ठीक उसी तरह मतदाता भी सभी प्रत्याशियों का समर्थन करने का आश्वासन देते नजर आ रहे हैं। लेकिन अब तक मतदाताओं का रुझान किस ओर है, इस बात की जानकारी नहीं मिल पा रही है। सबसे खास बात यह है कि मुस्लिम मतदाताओं का रुझान भी पता नहीं चल पा रहा है। जबकि सबको अच्छी तरह मालूम है कि जनपद की छह विधानसभाओं में से पांच विधानसभाओं में मुस्लिम मतदाता सर्वाधिक है।

उनका समर्थन जिस किसी भी पार्टी को मिलेगा, उसके प्रत्याशी का जीतना तय है। बाराबंकी जनपद की हैदरगढ़ विधानसभा को छोड़कर बाकी अन्य पांच विधानसभा कुर्सी, सदर, जैदपुर रामनगर और दरियाबाद की सीटों पर मुस्लिम वोट सत्ता का खेल बनाने-बिगाड़ने में हर बार अहम भूमिका निभाते हैं। जबकि इस बार के विधानसभा चुनाव में अब तक मुस्लिमों का रुख पूरी तरह साफ नहीं है। इस बार के चुनाव में कहीं सपा-कांग्रेस गंठबंधन तो कहीं बसपा उनकी पसंद बनती दिख रही है।

वहीं कुछ सीटों पर पीस पार्टी और अन्य मुस्लिम समर्थित पार्टी भी मुस्लिम वोटों की दावेदारी में लगा हुआ है। इन सभी विधानसभा सीटों पर उनके वोटों का बंटवारा हो या एकजुटता दिखे, दोनों ही स्थिति में चुनावी नतीजे प्रभावित होना तय है। हालांकि भाजपा इन सीटों में हिंदू मतों के ध्रुवीकरण की आस संजोए बैठी है। तो वहीं सपा, कांग्रेस-बसपा के अलावा अन्य राजनीतिक दल अपने परंपरागत वोटों के साथ ही मुस्लिम मतों को सहेजने में जुटी हुई है। हालांकि कुछ जगहों पर मुस्लिमों का रुझान साफ है, लेकिन मतदान की तारीख नजदीक आ जाने के बावजूद भी ज्यादातर सीटों पर मुलिम मतदाताओं ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं।

गौरतलब है कि मुस्लिमों की सियासत में सक्रिय नेता भी उनके वोट के सवाल पर बंटे हुए हैं। हर व्यक्ति अलग-अलग नजरिये से मुस्लिमों के लाभ और नुकसान का आंकड़ा मालूम करने में जुटा हुआ है। इसलिए उनकी तरफ से भी मतदाताओं की उलझनों को सुलझाने का कोई निर्णायक जवाब नहीं मिल पा रहा है। नतीजतन अभी भी मुस्लिम मतदाता किस पार्टी को वोट देंगे, इसको लेकर वोटर किसी निर्णायक स्थिति में नहीं पहुंचे हैं।

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बीजिंग। चीन में आईफोन ६एस लेने के लिए लोग अपनी किडनियां तक बेच रहे हैं। ऎसे में एक स्पर्म बैंक द्वारा अनोखा ऑफर निकाला गया है। इस ऑफर के तहत अपने स्पर्म डोनेट करने वाले व्यक्ति को 6000 युआर लगभग 62 हजार रूपए दिए जा रहे हैं। इस राशी से हाल ही में लॉन्च हुआ आईफोन 6एस लिया जा सकता है जिसकी कीमत 5288 युआन लगभग 54200 रूपए हैं।

लोग उठा रहे हैं ऑफर का फायदा
स्पर्म डोनेट करने का यह ऑफर शंघाई स्पर्म बैंक द्वारा निकाला गया है। बैंक के प्रवक्ता के मुताबिक उन्हें इस ऑफर का अच्छा रेस्पॉन्स मिल रहा है। लोग 6000 युआन के बदले अपने स्पर्म डोनेट कर रहे हैं। हालांकि कुछ लोगों ने इसे यह कहते हुए गलत ठहराया कि स्पर्म दान करना एक संवेदनशील मामला है। ऎसे करके पैसा बनाना अच्छी बात नहीं।

स्पर्म बैंक ने इसलिए चलाई योजना
चीन में हजारो परिवार नपुंसकता से जूझ रहे हैं। इसके अलावा वहां पर स्पर्म बैंकों की भी कमी है। इसके अलावा चीन के लोगों में आईफोन लेने को लेकर काफी क्रेज रहता है। यहां के लोग आईफोन लेने के लिए अपनी किडनियां तक बेच देते हैं। ऎसे में बैंक ने दोनों मौकों का फायदा उठाते हुए यह योजना जारी की है।

इस मुद्दे पर बन चुकी है फिल्म
गौरतलब है स्पर्म डोनेट को लेकर भारत में 2012 में एक फिल्म बन चुकी है। “विक्की डोनर” नाम से आई इस फिल्म द्वारा गंभीर और साहसिक मुद्दे को उठाने के लिए काफी सराहना की गई थी।

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गोरखपुर। रामपुर कारखाना क्षेत्र में शनिवार को ईंट-भट्ठे पर कार्यरत झारखंड के एक युवक ने कोबरा सांप को अपने दांत से काट-काट कर मार डाला। इसके बाद युवक को अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां उसकी हालत सामान्य बताई जा रही है।

झारखंड के हरिगांव निवासी चरवा (40) ट्रॉली पर ईंट लाद रहा था। अचानक जहरीले कोबरा सांप ने उसे डस लिया। इसके बाद सांप ईंट में छिपने की कोशिश कर रहा था। चरवा ने सांप को दबोच लिया। उसे अपने दांत से काटना शुरू कर दिया। देखते ही देखते ढाई से तीन फीट लंबा सांप टुकड़े में कट गया। वहीं, अनहोनी की आशंका से वहां खड़े मजदूरों ने तुंरत युवक को तत्काल जिला अस्पताल में भर्ती कराया। वहां डॉक्टरों ने प्राथमिक इलाज के बाद उसे छुट्टी दे दी।

डॉक्टर के मुताबिक जिस सांप को युवक ने काटा है, उस सांप के काटने से किसी भी व्यक्ति की मौत निश्चित हो जाती है, लेकिन युवक अभी सामान्य रूप से ठीक है।

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लोकप्रिय टीवी सीरिज गेम ऑफ थ्रोन्स को एक साथ १७३ देशों में प्रसारण के लिए सबसे बड़े टीवी ड्रामा कार्यक्रम के तौर पर गिनीज वर्ल्ड रिकॉडर्स 2016 किताब में जगह दी गयी है।

प्रसिद्ध टीवी सीरिज के पांचवें सीजन के दूसरे एपिसोड का इस साल 20 अप्रैल को तड़के दो बजे एक साथ 173 देशों में प्रसारण किया गया था। कार्यक्रम ने एक दूसरे टीवी सीरिज सीएसआई का इससे पांच हफ्ते पहले बनाया गया रिकॉर्ड तोड़ दिया जिसका 169 देशों में प्रसारण किया गया था।

टीवी सीरिज में आर्या स्टार्क का किरदार निभा रही मैसी विलियम्स ने कार्यक्रम की ओर से आधिकारिक प्रमाणपत्र हासिल किया।

18 साल की अभिनेत्री ने कहा कि गेम ऑफ थ्रोन्स के गिनीज वर्ल्ड रिकॉडर्स का हिस्सा बनने से मैं बहुत खुश हूं, मैं अपने सौतेले भाई को इसके बारे में बताउंगी जिसे हर साल क्रिसमस के मौके पर यह किताब मिलती है। मैं उसके चेहरे के भाव देखने को बेताब हूं।

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लखनऊ। लेखपाल भर्ती परीक्षा देने आए परीक्षार्थियों की दोनों शिफ्ट की परीक्षा खत्म हो गई है। राजधानी के १143 केंद्र पर हुई परीक्षा के बाद छात्रों ने प्रश्न पत्र को आसान बताते हुए अब मेरिट ऊपर जाने की आशंका जताई। पहली शिफ्ट सुबह 10.30 बजे से 12 बजे तक थी जिसमें करीबन 83 हजार 179 परीक्षार्थी शामिल हुए। दूसरी पाली की परीक्षा तीन बजे से 4.30 बजे तक थी, जिसमें तकरीबन 83 हजार 178 परीक्षार्थी शामिल हुए।
जीके आसान, हिंदी में उलझे

परीक्षा देकर निकल रहे कई छात्रों ने बताया कि जनरल नॉलेज के सवाल काफी आसान आए थे। पेपर में देश से संबंधित सभी सवाल आसान थे। हालांकि, हिंदी के सवालों ने थोड़ा परेशान किया। खासतौर से इंग्लिश मीडियम के छात्रों को हिंदी ग्रामर के सावालों ने थोड़ा जरूर चौंकाया। परीक्षा में हिंदी, गणित, सामान्‍य ज्ञान और ग्रामीण विकास के चार खंड में 100 सवाल आए।

परीक्षा देकर लौटे रहे परीक्षार्थी ब्रहमशंकर ने बताया कि पेपर तो आसान था लेकिन हिंदी की व्याकरण थोड़ी टफ लगी। अब मेरिट में नाम आना मुश्किल लग रहा है क्योंकि मेरिट काफी हाई जाएगी।

रोल नंबर लिखने में हुई परेशानी
परीक्षा के दौरान परीक्षार्थी रोल नंबर को शब्‍दों में लिखने को लेकर परेशान रहे। परीक्षार्थियों के मुताबिक उन्हें जो ओएमआर शीट मिली उसके सीक्‍वेंस नंबर में नौ बॉक्‍स की जगह आठ बॉक्‍स ही बने थे। जब इस पर अफसरों ने आयोग से बात की तो पहले एप्‍लीकेशन में एक बॉक्स जोड़ने को कहा गया।

सेंटर बदले जाने से परेशान हुए अभ्यर्थी
लेखपाल भर्ती परीक्षा के लिए रविवार को राजधानी में प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम किए गए, वहीं सैकड़ों छात्रों को सेंटर बदल जाने की समस्या के चलते काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। लेखपाल की परीक्षा के लिए आवेदन किए परीक्षार्थी ठाकुरगंज निवासी अतुल कुमार ने बताया कि प्रवेश पत्र के मुताबिक उनका सेंटर सिसेंडी गया था, पर वहां जाने के बाद पता चला कि सेंटर राजकीय कॉलेज में। ऐसी ही समस्याओं से आलमबाग निवासी अनुज पांडेय, रोशनी यादव समेत तमाम परीक्षार्थियों को गुजरना पड़ा।

डीएम ने किया निरीक्षण
डीएम राजशेखर ने शहर के कई स्कूलों व कॉलेज में जाकर निरिक्षण किया। वे रजत गर्ल्स कॉलेज(शक्ति नगर), राजकीय इंटर कॉलेज (निशातगंज) समेत कई स्कूल व कॉलेज गए और वहां के कॉर्डिनेट्र्स से बातचीत की। हालांकि पेपर आउट होने को लेकर दिनभर अफवाएं चलती रहीं।

कंट्रोल रूम पहुंचे शिवपाल
प्रदेश के कैबिनेट मिनिस्टर शिवपाल सिंह यादव ने कंट्रोल रूम पहुंचकर लेखपाल एंट्रेंस एग्जाम का जायजा लिया

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भले ही सुनने में यह अजीब लगे, लेकिन डॉक्टर्स के टेस्ट में भी यह साबित हो चुका है कि बाबा प्रहलाद जानी ने पिछले 75 साल से न खाना खाया और न पानी पिया। 13 अगस्त 1929 को गुजरात के मेहसाणा जिले के छारड़ा गांव में जन्मे इन बाबा को चुनरीवाला माताजी के नाम से भी जाना जाता है।

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हैदराबाद। सेफ्ली लेना सिर्फ लड़कियों का ही काम नहीं है क्योंकि लड़के अब इस मामले में उनसे कहीं ज्यादा आगे निकलना चाहते हैं। हैदराबादी भानु प्रकाश राचा ने एनएफएल स्टार पैट्रिक पिटरसन के गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड को चैलेंज किया है। पीटरसन के नाम एक घंटे में 1,449 सेल्फी लेने का रिकॉर्ड था, जोकि २४ वर्षीय भानु ने तोड़ने का फैसला किया है। भानु को विश्वास है कि वे एक घंटे में 1800 सेल्फी क्लिक कर पीटरसन का रिकॉर्ड तोड़ देंगे।

किसने किया प्रेरित
भानु ने हॉलीवुड स्टार और डब्लू डब्लू ई के सुपरस्टार ड्वेन जॉनसन (द रॉक) से प्रेरित होकर ये रिकॉर्ड बनाया है। रॉक ने तीन मिनट में 105 सेल्फी ली थी। इसी साल मई के महीने में भानु बसे से अपने घर जा रहे थे, तभी उन्होंने बस में कुछ युवाओं को रॉक के वर्ल्ड रिकॉर्ड के बारे में बात करते सुना। भानु ने कहा, “ये बात तुरंत मुझे लगी कि एक आदमी ने ये काम किया है। लोग अक्सर कहते रहते हैं कि सेल्फी क्लिक करना लड़कियों का काम है, लेकिन यहां ड्वेन जॉनसन ने ऎसा किया है और मैंने सोच लिया कि अब मैं ये करूंगा।” इसके अगले ही दिन भानु ने तीन मिनट में 120 सेल्फी क्लिक की।

रिकॉर्ड बनाने के लिए छोड़ दी नौकरी
इसके बाद भानु ने सेल्फी को लेकर कई रिकॉर्ड्स चेक किए जहां उन्हें एनएफएल स्टार पैट्रिक पीटरसन के रिकॉर्ड के बारे में पता चला। इसके करीब 20 दिन बाद उन्होंने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड को अपनी एपलीकेशन भेजी और हाल ही में उनकी एपलीकेशन को स्वीकार भी कर लिया गया है। भानु ने इस रिकॉर्ड को तोड़ने के लिए अपनी नौकरी भी छोड़ दी है। वो एक सिटी हॉस्पिटल में रिसर्च असिस्टेंट की जॉब किया करते थे।

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लखनऊ। डॉ० राम मनोहर लोहिया योजना के तहत उत्तर प्रदेश में 3 हजार नए नलकूप शुरू किए जाने की परियोजना तैयार की गई है। जिसके तहत प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आज मंगलवार को 1020 नलकूपों एवं 5 पम्प नहरों की शुरूआत की। लोकार्पण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने बटन दबा कर परियोजना का शुभारंभ किया।

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