Friday, October 19, 2018
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super blue moon mark in sky on January 31

वाशिंगटन: पिछली बार नीला चांद यानी ब्लू सुपरमून का दीदार नहीं कर पाने वालों लिए इसे देखने का दूसरा मौका आने वाला है. अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के मुताबिक इस महीने के आखिर में 31 जनवरी को एक बार फिर नीला चांद यानी सुपर ब्लू मून दिखेगा. इससे पहले तीन दिसंबर 2017 और एक जनवरी 2018 को काफी नजदीक से नीला चांद दिखा था और सुपरमून की झलक की इस तिकड़ी में शायद यह इस साल आखिरी मौका होगा.

क्या है सूपरमून?
सुपरमून एक आकाशीय घटना है जिसमें चांद अपनी कक्षा में धरती के सबसे निकट होता है और संपूर्ण चांद का स्पष्ट रूप से अवलोकन किया जा सकता है. 31 जनवरी को होने वाली पूर्णिमा की तीन खासियत है. पहली यह कि यह सुपरमून की एक श्रंखला में तीसरा अवसर है जब चांद धरती के निकटतम दूरी पर होगा. दूसरी यह कि इस दिन चांद सामान्य से 14 फीसदा ज्यादा चमकीला दिखेगा. तीसरी बात यह कि एक ही महीने में दो बार पूर्णिमा होगी, ऐसी घटना आमतौर पर ढाई साल बाद होती है.
सूपर ब्लू मून धरती की छाया से गुजरेगी और प्रेक्षकों को पूर्ण चंद्रग्रहण दिखेगा. नासा के प्रोग्राम एग्जिक्यूटिव व लूनर ब्लागर गॉर्डन ने नासा की ओर से जारी एक बयान में कहा कि चांद जब धरती की छाया में रहेगा तो इसकी आभा रक्तिम हो जाएगी जिसे रक्तिम चंद्र या लाल चांद कहते हैं.

धरती के इन हिस्सों में रहेगा चंद्रग्रहण
पूरे उत्तरी अमेरिका, प्रशांत क्षेत्र से लेकर पूर्वी एशिया में इस दिन पूर्ण चंद्रग्रहण दिखेगा. अमेरिका, अलास्का, हवाई द्वीप के लोग 31 जनवरी को सूर्योदय से पहले चंद्र ग्रहण देख पाएंगे जबकि मध्य पूर्व के देश समेत एशिया, रूस के पूर्वी भाग, आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में सुपर ब्लू ब्लडमून 31 जनवरी को सुबह चंद्रोदय के दौरान लोग देख पाएंगे. दिसंबर में हुई पूर्णमासी के चांद को कोल्ड मून कहा जाता है और 2017 में यह पहला सुपरमून था जिसका लोगों ने दीदार किया. चांद का आकार सामान्य से सात फीसदी बड़ा लग रहा था और यह सामान्य से 15 फीसदी ज्यादा चमकीला था.

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ऐसा क्या हुआ की सचिन कुछ बोल न सके

नई दिल्ली.

गुजरात चुनावों के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह पर की गई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टिप्पणी को लेकर राज्यसभा में बृहस्पतिवार को भी कांग्रेस का विरोध और नारेबाजी जारी रही। यही नहीं, सदन में पहली बार भाषण देने के लिए खड़े हुए सचिन तेंदुलकर को भी बोलने नहीं दिया गया।

दरअसल, सदन में सुबह प्रधानमंत्री की टिप्पणी और 2जी घोटाला मामले पर हुए हंगामे के बाद सभापति एम. वेंकैया नायडू ने कार्यवाही दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी थी। जब कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तो वेंकैया अल्पकालिक चर्चा की शुरुआत तेंदुलकर से करवाना चाहते थे। तेंदुलकर को खेल के अधिकार और देश में खेलों के भविष्य पर चर्चा की शुरुआत करनी थी। इस बीच सपा के नरेश अग्रवाल ने 2जी मामले में व्यवस्था का सवाल उठा दिया।

इसके बाद वेंकैया ने यह कहते हुए चर्चा की शुरुआत करने की कोशिश की कि यह तेंदुलकर का पहला भाषण है और उन्हें सुना जाना चाहिए, लेकिन तुरंत ही कांग्रेस के कई सदस्य खड़े हो गए और प्रधानमंत्री की टिप्पणी का मुद्दा उठाते हुए ‘देश को गुमराह करना बंद करो’ के नारे लगाने लगे। वे प्रधानमंत्री मोदी द्वारा माफी मांगे जाने की मांग कर रहे थे।

वेंकैया ने सदस्यों से कहा कि ‘भारत रत्न’ सचिन तेंदुलकर ने देश के लिए काफी कुछ किया है, वह आदर्श शख्सियत और युवाओं के प्रेरणास्नोत हैं, लेकिन इसके बावजूद विपक्ष ने शोरगुल और विरोध जारी रखा। नाराज वेंकैया ने तेंदुलकर से भाषण शुरू करने के लिए कहा। सपा की जया बच्चन ने भी तेंदुलकर के बोलने का समर्थन किया, लेकिन वह सिर्फ खड़े होकर देखते रह गए, क्योंकि विपक्षी सदस्य लगातार नारेबाजी करते रहे। इस पर वेंकैया ने कहा, वह नहीं चाहते कि लोग टीवी पर ऐसे दृश्य देखें और उन्होंने सदन की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी।

राज्यसभा में बृहस्पतिवार को बोलने के लिए खड़े महान क्रिकेटर और सांसद सचिन तेंदुलकर ’ प्रेट्रमुख्य विपक्षी दल के रूप में दिशा खो चुकी है कांग्रेस 1खेलों के गैर-राजनीतिक मुद्दे पर भी सचिन तेंदुलकर को नहीं बोलने देने के लिए सरकार ने कांग्रेस की आलोचना की है। संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने कहा कि मुख्य विपक्षी दल के रूप में कांग्रेस अपना आधार और दिशा दोनों खो चुकी है। गुरुवार को कांग्रेस ने बिल्कुल अलोकतांत्रिक तरीके से व्यवहार किया। सभापति के बार-बार अनुरोध करने पर भी उन्हें (तेंदुलकर) बेहद महत्वपूर्ण और जनहित के मुद्दे पर बोलने नहीं दिया गया।

Varun Gandhi creating problem for BJP in up election

 

Lucknow.

बीजेपी को यूपी की जंग जिताने के लिए मोदी-शाह की जोड़ी ने जहां पूरा जोर लगा रखा है वहीं बीजेपी के अपने ‘गांधी’ हानिकारक साबित होते दिख रहे हैं. हम बात कर रहे हैं वरुण गांधी की. चुनाव प्रचार के दौरान वे यूपी में मौन रहे लेकिन चौथे चरण के मतदान के ठीक पहले इंदौर में वरुण गांधी कांग्रेस नेता के कार्यक्रम में शामिल हुए. वहां वरुण ने बयानों के ऐसे तीर छोड़े जो बीजेपी और मोदी सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकती है. यूपी के चुनावी समर में राहुल और अखिलेश के बाद वरुण का नंबर तीसरे पायदान पर आता है और इस वजह से कुछ लोग इन्हें यूपी का तीसरा लड़का भी कहते हैं. आखिर क्या है वरुण की पार्टी में नाराजगी की वजह?
चुप्पी तोड़ी, मोदी सरकार की दुखती रग पर रखा हाथ
पीलीभीत के सांसद और बीजेपी के युवा नेता वरुण गांधी ने अपनी लंबी चुप्पी तोड़ दी है. वो मंगलवार को इंदौर के एक स्कूल में ‘विचार नए भारत का’ का विषय पर बोलने के लिए पहुंचे थे. इस विषय पर बोलते हुए वरुण गांधी ने हर उस विषय पर अपनी बात रखी जिसपर अबतक केंद्र की मोदी सरकार विपक्षी पार्टियों से घिरती रही है. वरुण गांधी ने हैदराबाद के दलित पीएचडी छात्र रोहित वेमुला की आत्महत्या, अल्पसंख्यकों की बढ़ती मुश्किलें, किसानों की आत्महत्या और विजय माल्या का विदेश भाग जाना सहित बढ़ती जीडीपी की हकीकत के बारे में भी अपनी बात रखी. ऐसा माना जा रहा है कि ये सारे के सारे वो मुद्दे हैं जिनपर केंद्र की बेजेपी सरकार घिरती रही है. राजनीतिक पंडितों की मानें तो वरूण अपने बयान से यूपी में बीजेपी लिए मुश्किलों की दीवार खड़ी कर रहे हैं.

‘वरुण गांधी स्वतंत्र विचार रखते है, RSS का बैकग्राउंड नहीं’
जानकार ऐसा कहते हैं कि वरुण गांधी का आरएसएस से कोई जुड़ाव नहीं है. वो मुद्दों पर स्वतंत्र राय भी रखते हैं. पार्टी की कमान जब राजनाथ सिंह के हाथों में थी तो वरुण की स्थिति पार्टी में अच्छी थी. लेकिन जैसे ही पार्टी की कमान अमित शाह के हाथों में गई वरुण गांधी को पार्टी से किनारा किया जाने लगा. कुछ महीनों पहले एक न्यूज वेबसाइट से बात करते हुए राजनीतिक विश्लेषक अभय कुमार दुबे ने कहा था, ’वरुण गांधी की संघ की पृष्ठभूमि नहीं है. वह स्वतंत्र रूप से सोचने वाले व्यक्ति हैं. मोदी और शाह की बीजेपी उत्तर प्रदेश में किसी मज़बूत नेतृत्व को विकसित नहीं करना चाहती है.’
खुद को पार्टी में किनारा किए जाने से हैं दुखी
नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने और अमित शाह के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद से ही वरुण गांधी को पार्टी में किनारा किया जाने लगा. 2014 में बीजेपी ने वरुण को राष्ट्रीय महासचिव के पद से हटा दिया था. 12 जून 2016 को इलाहाबाद में बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के दौरान वरुण ने पार्टी नेताओं के सामने शक्ति प्रदर्शन करने की कोशिश की जो अमित शाह और मोदी को रास नहीं आई. पार्टी ने इस विधानसभा चुनाव में बड़ी संख्या में उन लोगों के टिकट काटे जो किसी न किसी तरह से वरुण गांधी के करीबी थे. पार्टी ने उन्हें स्टार प्रचारकों के अपने पहले लिस्ट में शामिल नहीं किया. दूसरे लिस्ट में वरुण का नाम सामने आया. इसे भी नाराजगी की वजह माना जा रहा है. कहने वाले तो यह भी कहते हैं कि वरुण बहुत पहले से पार्टी छोड़ने का मन बना चुके हैं. ऐसे में वरुण गांधी यूपी चुनाव के दौरान हर वो काम कर सकते हैं जिससे पार्टी कमजोर हो.
बीजेपी भी वरुण को नहीं मानती अपना
जैसे ही पार्टी की कमान राजनाथ सिंह से अमित शाह के पास आई वैसे ही पार्टी में वरुण गांधी की स्थिति बदलने लगी. पार्टी में उनका कद घटने लगा. राजनीति की समझ रखने वाले बताते हैं कि वरुण के साथ ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि उनके नाम में ‘गांधी’ लगा है. अमित शाह और नरेंद्र मोदी इस नाम के साथ सहज नहीं है. वरुण गांधी भी इस बात को जानते हैं. जब नरेंद्र मोदी केंद्र में जीतकर आए और पार्टी अमित शाह के हाथ में गई तभी वरुण को लगने लगा था कि उनकी अहमियत पार्टी में कम हो जाएगी. बीजेपी वरुण गांधी को ‘गांधी परिवार’ का ही एक हिस्सा मानते हैं. इसका एक और सबूत है- सात जनवरी को बीजेपी के फेसबुक अकाउंट से एक वीडियो अपलोड हुआ. इस वीडियो में यह बताया गया कि नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री हैं फिर भी उनके भाई, चाचा या दूसरे संबंधी गरीबी में रह रहे हैं या कोई छोटा-मोटा काम करके अपना जीवन चला रहे हैं लेकिन दूसरी तरह ऐसे परिवार हैं जिनका हर सदस्य सत्ता की मलाई खा रहा है. इस वीडियो में एक ग्राफिक्स के जरिए गांधी परिवार की वंशावली दिखाई गई और वरुण गांधी को उसी परिवार का सदस्य बताया गया.
अपने इलाके में प्रभावी हैं वरुण
यूपी के इस चुनाव में 45 उम्मीदवारों के टिकट इस वजह से कटे हैं कि वो वरुण के करीबी हैं. ये सारे के सारे उम्मीदवार निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं. जाहिर है कि इससे पार्टी को नुकसान होगा. ये सारे के सारे बीजेपी के विधायक हैं. इन उम्मीदवारों को चुनाव जीतवाने के लिए वरुण पूरी कोशिश कर रहे हैं. यह भी माना जाता है कि वरुण गांधी इन इलाकों में खासे प्रभावी हैं.

Samajwadi Party leader Gayatri Prajapati should be booked for gangrape: Supreme Court to UP police

नई दिल्ली।

अमेठी विधानसभा से सपा उम्मीदवार और मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने एक महिला की ओर दुष्कर्म की शिकायत पर प्रदेश सरकार को एफआइआर दर्ज करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार से इस संबंध में आठ सप्ताह में स्टेटस रिपोर्ट भी मांगी है। अमेठी में 27 फरवरी को मतदान होना है।

न्यायमूर्ति एके सीकरी की अध्यक्षता वाली पीठ ने शुक्रवार को एक महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए ये आदेश दिए। इससे पहले महिला की ओर से पेश वकील महमूद प्राचा ने आरोप लगाया कि उनकी मुवक्किल के साथ प्रजापति और उनके साथियों ने कई बार दुष्कर्म किया। उसकी बेटी के साथ भी छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न हुआ। प्रदेश के डीजीपी तक से शिकायत होने के बावजूद पुलिस ने एफआइआर दर्ज नहीं की।

प्रदेश सरकार की ओर से पेश वकील रवि प्रकाश मेहरोत्र ने कहा कि पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया और जांच की गई। इस जांच की सारी रिपोर्ट हलफनामे के साथ दाखिल की गई है। मामला तीन साल पुराना है। देरी से शिकायत करने का कारण शिकायतकर्ता नहीं बता पाई। ये मामला चुनाव के दौरान राजनीति से प्रेरित लगता है।

वर्तमान में दिल्ली में रह रही महिला ने प्रजापति और उनके साथियों पर 2013 और 2016 में सामूहिक दुष्कर्म और बेटी से यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। जान को खतरा बताते हुए सुरक्षा भी मांगी है। कोर्ट ने गत 25 नवंबर को नोटिस जारी किया था और याचिकाकर्ता को सुरक्षा देने का भी आदेश दिया था।

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Zeelandiya is 8th continent scientists found in Australia

नई दिल्ली।

धरती पर जल्द आठवां महाद्वीप अस्तित्व में आ सकता है। भूवैज्ञानिकों की राय अगर मानी गई तो नया महाद्वीप होगा। उन्होंने इसकी पहचान ऑस्ट्रेलिया के पूर्व में दक्षिण पश्चिम प्रशांत महासागर के 40.9 लाख वर्ग किलोमीटर लंबे पानी में डूबे हुए क्षेत्र के रूप में की है। इसके तटीय क्षेत्रों में अरबों-खरबों डॉलर के जीवाश्म ईंधन मिलने की संभावना जताई गई है।

इसे भारतीय उपमहाद्वीप के बराबर बताया जा रहा है। शोधकर्ताओं के अनुसार, भारत के गोंडवाना क्षेत्र का पांच फीसद हिस्सा भी कभी इस संभावित महाद्वीप का हिस्सा रह चुका है। अगर इसे मान्यता मिलती है तो यह एशिया, यूरोप, अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और अंटार्कटिका के बाद आठवां महाद्वीप होगा। 94 प्रतिशत समुद्र में डूबे में न्यूजीलैंड और फ्रांस नियंत्रित क्षेत्र न्यू कैलेडोनिया को भी शामिल बताया जा रहा है। न्यूजीलैंड की विक्टोरिया यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी के शोधकर्ताओं सहित 11 भूवैज्ञानिकों ने ‘ : अर्थ हिडेन कॉन्टीनेंट’ शीर्षक से जारी शोध पत्र में दावा किया है कि में महाद्वीप होने की सभी चार महत्वपूर्ण खूबियां मौजूद हैं।

शोधकर्ताओं के अनुसार, यह कोई अचानक की गई खोज नहीं है बल्कि लगातर चिंतन का नतीजा है। नाम सबसे पहले भूभौतिकी वैज्ञानिक ब्रूस ल्यूनेडाइक ने 1995 में इस्तेमाल किया था। हाल में उपग्रह तकनीक और समुद्र तल के ग्रेविटी मैप में इस बात की पुष्टि हो गई कि यह एकीकृत क्षेत्र है। इसी आधार पर वैज्ञानिकों ने इसे महाद्वीप घोषित करने की मांग उठाई है।

अध्ययन में कहा गया है कि का 94 फीसद हिस्सा जो पानी में डूबा हुआ है, दरअसल लाखों वर्ष पूर्व ऑस्ट्रेलिया से ही टूटकर समुद्र में समाहित हो गया था। जीएसए टुडे में प्रकाशित रिपोर्ट में शोधकर्ताओं का कहना है कि की पहचान बहुत हद तक एक भूवैज्ञानिक महाद्वीप के रूप में की जानी चाहिए। इससे महाद्वीपीय दरार, उसके पतलापन और विघटन की प्रक्रिया को समझने में आसानी होगी।’

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saniya mirja will not appear before officers in tax evasion

नई दिल्ली। सेवाकर के कथित तौर पर भुगतान नहीं किए जाने के मामले में टेनिस स्टार सानिया मिर्जा व्यक्तिगत रूप से अधिकारियों के समक्ष उपस्थित नहीं हो पायेंगी। खबरों की मानें तो 16 फरवरी को उनकी अनुपस्थिति में एक प्रतिनिधि अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत होगा। कहा जा रहा है कि सानिया ऑस्ट्रेलिया गयी हैं और वहां से वह अमेरिका जाएंगी। इसलिए वह अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत नहीं हो पाएंगी।

अधिकारियों और उनके द्वारा अधिकृत व्यक्ति के बीच बैठक के बाद ही यह तय होगा कि सेवाकर विभाग द्वारा किये गये दावे के अनुसार सेवा कर का भुगतान किया जाये या फिर इसका विरोध किया जाये।

बता दें कि सेवाकर विभाग के प्रधान आयुक्त ने छह फरवरी को इस टेनिस स्टार को सम्मन जारी किया था तथा उन्हें या उनके द्वारा अधिकृत व्यक्ति को 16 फरवरी को पेश होने के लिये कहा था। नोटिस में कहा गया है कि वित्त कानून, 1994 के प्रावधानों और नियमों के संबंध में सेवाकर के गैर भुगतान या अपवंचना को लेकर आपके खिलाफ जांच के संबंध में पूछताछ की जानी है। मेरे पास यह विश्वास करने का कारण है कि आपके पास इस जांच से जुड़े तथ्य या और दस्तावेज हैं।

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Share Market down today in starting business

नई दिल्ली।

कारोबारी सत्र के तीसरे दिन शेयर बाजार के शुरूआती कारोबार में गिरावट देखने को मिल रही है। ऑटो, फार्मा और रियल्टी शेयरों में हुई बिकवाली के चलते बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान पर कारोबार कर रहे है। सुबह 10 बजे BSE का 30 शेयरों वाला प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स 35 अंक गिरकर 28,305 पर कारोबारा कर रहा है।

वहीं, NSE का 50 शेयरों वाला प्रमुख इंडेक्स निफ्टी 5 अंक की गिरावट के साथ 8787 के स्तर पर कारोबार करने में सक्षम दिख रहा है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने की आशंका के कारण घरेलू शेयर बाजारों में गिरावट आई है।

दिग्गज शेयरों का हाल
बाजार में कारोबार के इस दौरान दिग्गज शेयरों में टाटा मोटर्स, टाटा मोटर्स डीवीआर, सन फार्मा, आइडिया, अरविंदो फार्मा, डॉ रेड्डीज और एनटीपीसी 7.75-0.6 फीसदी तक गिरे हैं। हालांकि दिग्गज शेयरों में अदानी पोर्ट्स, जी एंटरटेनमेंट, बॉश, ओएनजीसी, अल्ट्राटेक सीमेंट, इंफोसिस, महिंद्रा एंड महिद्रा और आईटीसी 1.75-0.7 फीसदी तक बढ़े हैं।

टाटा मोटर्स का मुनाफा 96 फीसदी गिरा
वित्त वर्ष 2017 की तीसरी तिमाही में टाटा मोटर्स का मुनाफा 96.2 फीसदी घटकर 112 करोड़ रुपए रह गया है। वित्त वर्ष 2016 की तीसरी तिमाही में टाटा मोटर्स का मुनाफा 2952.7 करोड़ रुपए रहा था।

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crude oil prices hike to 55 us dolar

नई दिल्ली।

भारतीय बास्केट के कच्चे तेल की अंतर्राष्ट्रीय कीमत 54.87 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल रही। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधीनस्‍थ पेट्रोलियम नियोजन एवं विश्‍लेषण प्रकोष्ठ के अनुसार भारतीय बास्‍केट के कच्चे तेल की अंतर्राष्‍ट्रीय कीमत 13 फरवरी, 2017 को 54.87 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल दर्ज की गई। यह 10 फरवरी, 2017 को दर्ज कीमत 54.86 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से अधिक है।

 

रुपये के संदर्भ में भारतीय बास्केट के कच्चे तेल की कीमत 13 फरवरी, 2017 को बढ़कर 3674.49 रुपये प्रति बैरल हो गई, जबकि 10 फरवरी, 2017 को यह 3658.93 रुपये प्रति बैरल था। रुपया 13 फरवरी, 2017 को कमजोर होकर 66.97 रुपये प्रति अमेरिकी डॉलर के स्तर पर बंद हुआ, जबकि 10 फरवरी, 2017 को यह 66.94 रुपये प्रति अमेरिकी डॉलर था।

Sarojninagar constituency of Lucknow is important for all political parties

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के सरोजनीनगर के चुनावी दंगल में कई बड़ों की साख दांव पर लगी है। सपा के टिकट पर उतरे अनुराग यादव की वजह से अब इस सीट से सीएम की प्रतिष्ठा भी दांव पर है। वहीं, दूसरी तरफ स्वाति सिंह की वजह से बीजेपी मुखिया अमित शाह का भरोसा भी दांव पर है। बसपा के टिकट पर दोबारा चुनाव मैदान में उतरे शिव शंकर उर्फ शंकरी सिंह के सामने पिछले चुनाव में मिली हार को जीत में बदलने की चुनौती है।

वहीं पिछले चुनाव में करीब 41 हजार वोट हासिल करने वाले निर्दलीय रुद्रदमन सिंह बब्लू भी बीजेपी से बगावत कर चुनाव मैदान में कूद पड़े हैं। उनके पास अब खुद को साबित करने का मौका है। फिलहाल इन चारों उम्मीदारों के मजबूती से चुनाव में उतरने से सरोजनी नगर का चुनाव काफी रोचक हो गया है। यहां कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है।

सरोजनीनगर विधान सभा सीट पर चुनावी मुकाबला काफी रोचक होने जा रहा है। इस सीट पर प्रत्याशियों के साथ उनके आकाओं की प्रतिष्ठा भी जुड गयी है। अनुराग सांसद धर्मेन्द्र यादव के बड़े भाई हैं। अनुराग पूरी ताकत से मैदान में अड़े हैं। बीजेपी के टिकट पर उतरीं स्वाती सिंह का पूरा राजनीतिक करियर करीब छह महीने का है। उनके पति दयाशंकर सिंह भाजपा से जुड़े रहे हैं। स्वाति सिंह पहली बार जनता के सामने आयीं। उनके कड़े तेवर, सधी व सीधी बात ने उन्हें बीजेपी का नेता बना दिया।

अब वह सरोजनी नगर से मजबूती से चुनाव लड़ रही हैं। बसपा के टिकट पर यहां चुनाव लड़ रहे शिव शंकर सिंह उर्फ शंकरी सिंह 2012 के चुनाव में अपनी दमदारी दिखा चुके हैं। पिछले चुनाव में उन्हें अचानक मैदान में उतारा गया था लेकिन इस बार वह पांच वर्षों से क्षेत्र में डटे हुए हैं। इस सीट पर उनके खुद के साथ पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की भी साख जुड़ी है। उन्हें चुनाव में किसी से कम नहीं आंका जा रहा है। निर्दलीय चुनाव में उतरे रुद्र दमन सिंह बब्लू इस बार बीजेपी से टिकट मांग रहे थे।

चुनाव से पहले बीजेपी में भी शामिल हो गए थे। पार्टी ने टिकट नहीं दिया तो बगावत कर फिर निर्दलीय मैदान में उतर गए। वर्ष 2012 का चुनाव भी उन्होंने निर्दलीय लड़ा था। उस चुनाव में उन्हें करीब 41386 वोट मिले थे। फिलहाल इस सीट पर चारों प्रत्याशी बड़ी मजबूती से मैदान में डटे हैं। इसीलिए यहां का चुनाव रोचक मोड़ पर पहुंच गया है। पहले सपा के टिकट से क्षेत्र से विधायक रहे शारदा प्रताप शुक्ला यहां से रालोद से मैदान में हैं।

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हर घंटे न नहाए तो ये लड़की बन जाए सांप

16 साल की शालिनी को हर घंटे नहाना पड़ता है ताकि उसकी त्वचा कड़ी ना हो जाए। वह दिनभर अपने शरीर पर क्रीम मलती रहती है जिससे त्वचा में नमी बनी रहे।


ऐसा वह अपनी खूबसूरती के लिए नहीं करती, बल्कि जिंदा रहने के लिए कर रही है। शालिनी को एक लाइलाज बीमारी है जिसके कारण लोग उसे नागकन्या भी कहने लगे हैं। स्कूल के बच्चे उससे डरते हैं जिसकी वजह से उसे स्कूल से भी निकाल दिया गया है।


शालिनी को नागकन्या इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि हर छह हफ्तों में उसकी त्वची निकलती है। जी हां! सुनने में यह काफी अजीब लग रहा है लेकिन ‘Erythroderma’ नाम की एक बीमारी की वजह से इस बच्ची की त्वचा कड़ी हो कर हर 42 दिनों में निकलती है।


वह बचपन से इस बीमारी की शिकार है। त्वचा निकलने के कारण शालिनी के शरीर से खून भी आता है साथ ही उसे काफी दर्द से भी गुजरना पड़ता है।
डॉक्टर भी इस बीमारी का इलाज कर पाने में असमर्थ हैं। किसी को नहीं मालूम की आखिर इस बीमारी का इलाज क्या है। शालिनी के माता-पिता ने उसे कई डॉक्टरों को दिखाया लेकिन सभी ने हाथ खड़े कर दिए।

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