रिलायंस के उपाध्यक्ष संदिग्ध, कॉरपोरट जासूसी गोपनीय दस्तावेजों के बदले सरकारी अधिकारियों सहित कई लोगों को दी गई बड़ी राशि: सीबीआई

रिलायंस के उपाध्यक्ष संदिग्ध, कॉरपोरट जासूसी गोपनीय दस्तावेजों के बदले सरकारी अधिकारियों सहित कई लोगों को दी गई बड़ी राशि: सीबीआई

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सीबीआई ने गुरुवार को दिल्ली की एक अदालत को बताया कि रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के उपाध्यक्ष (वित्त) केवी मोहनन और मुंबई की कानूनी फर्म चितले एंड एसोसिएट्स के राजेंद्र चितले दस्तावेज लीक मामले में संदिग्ध हैं। एजेंसी ने दोनों गिरफ्तार आरोपियों चार्टर्ड अकाउंटेंट खेमचंद गांधी और परेश चिमनलाल बुद्धदेव की पुलिस हिरासत की अवधि बढ़ाने का अनुरोध करते हुए सीबीआई के विशेष न्यायाधीश एससी राजन को यह जानकारी दी। गांधी और परेश चितले एंडएसोसिएट्स में भागीदार हैं। अभियोजक ने अदालत से कहा कि मोहनन और चितले का परेश और गांधी से आमना-सामना कराना जरूरी है ताकि आरोपियों के बीच वृहद षड्यंत्र का भंडाफोड़ किया जा सके। सीबीआई ने अदालत में यह भी कहा कि दस्तावेज लीक होने के मामले की जांच में पता चला है कि गोपनीय दस्तावेज देने के बदले सरकारी अधिकारियों समेत अनेक लोगों को भारी भरकम धन का भुगतान किया गया। सुनवाई के दौरान अभियोजक ने अदालत को कुछ दस्तावेज दिखाए जिनमें मामले से जुड़े धन के कथित लेनदेन का ब्योरा था। अभियोजक ने कहा कि सरकारी सेवकों को भी बड़ी राशि दी गई। एजेंसी ने कहा कि जांच के दौरान आरोपियों के बीच अनेक ई-मेल के आदान प्रदान की जांच की गई और इनमें अनेक लोगों का ब्यौरा मिला है। अभियोजक ने कहा कि जांच में पता चला है कि अनेक लोगों को भारी राशि दी गई और ऐसे लोगों के बैंक ब्यौरों की जांच की जा रही है। हम इन लोगों के नाम अभी नहीं बताना चाहते लेकिन उनकी जांच करनी होगी। हम कुछ ई-मेल की भी पड़ताल कर रहे हैं ताकि हमें पता चले कि किसे धन दिया गया। एजेंसी के अनुसार इस मामले में राष्ट्रीय हित शामिल है और इन दोनों आरोपियों से हिरासत में और अधिक पूछताछ के लिए सीबीआई को और समय देने की जरूरत है। दोनों आरोपियों के लिए उपस्थित होने वाले वकील ने सीबीआई की याचिका का विरोध करते हुए कहा कि एजेंसी ने दो दिनों की पुलिस हिरासत अवधि बढ़ाने की मांग करते हुए कोई कारण नहीं बताया है। न्यायाधीश ने दलीलें सुनने के बाद गांधी और परेश की सीबीआई हिरासत 21 मार्च तक बढ़ा दी। सुनवाई के दौरान चार आरोपी अशोक कुमार सिंह, लाला राम शर्मा, दलजीत सिंह और रामनिवास को अदालत में पेश किया गया। सीबीआई ने कहा कि उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया जाए क्योंकि उन्हें हिरासत में लेकर उनसे और पूछताछ की जरूरत नहीं है। अदालत ने इन चार आरोपियों को एक अप्रैल तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया। अदालत ने 17 मार्च को तीन सरकारी कर्मचारियों अशोक कुमार सिंह, लाला राम शर्मा और दलजीत सिंह तथा गांधी और परेश को गुरुवार तक की सीबीआई हिरासत में भेजा था। एजेंसी ने पहले अदालत से कहा था कि जांच के दौरान बड़ी संख्या में अनियमितता वाले दस्तावेज जब्त किए गए हैं और ये आरोपी इन्हें कथित रूप से आगे भेजते थे और गोपनीय दस्तावेज प्राप्त करते थे। अशोक कुमार सिंह वित्त मंत्रालय के विनिवेश विभाग में अवर सचिव के रूप में काम रहा था, लाला राम शर्मा आर्थिक मामलों के विभाग में सेक्शन अधिकारी था और दलजीत सिंह वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के औद्योगिक नीति एवं प्रोत्साहन विभाग में उच्च श्रेणी लिपिक था। गांधी को 12 मार्च को मुंबई से गिरफ्तार किया गया था और ट्रांजिट रिमांड पर उसे दिल्ली लाया गया था। सीबीआई ने दलजीत सिंह को जहां 16 मार्च को गिरफ्तार किया था वहीं परेश को 13 मार्च को अपने कार्यालय में गोपनीय सरकारी दस्तावेज नष्ट करते हुए गिरफ्तार किया था।