पेट्रोलियम पर करों में बदलाव से उद्योगों को लगा झटका सरकार ने सेनवेट कम कर बढ़ाया एईडी, कर अदायगी पर उद्योगों को कम मिलेगा क्रेडिट

पेट्रोलियम पर करों में बदलाव से उद्योगों को लगा झटका सरकार ने सेनवेट कम कर बढ़ाया एईडी, कर अदायगी पर उद्योगों को कम मिलेगा क्रेडिट

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नई दिल्ली। पेट्रोलियम पदार्थों, विशेष कर डीजल एवं पेट्रोल पर केंद्रीय करों में फेरबदल से उद्योग जगत, खास कर मंझोले और छोटे (एमएसएमई) उद्यमियों को झटका लगा है। इस बदलाव से हालांकि इनके लिए डीजल की दरों में तो कोई फेरबदल नहीं हुआ है, लेकिन उनके इनपुट कॉस्ट में बढ़ोतरी हो गई है।
केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा शनिवार को संसद में पेश किए गए वित्त विधेयक में डीजल और पेट्रोल पर लगने वाले अप्रत्यक्ष कर में फेरबदल किया गया है। इसका विवरण बजट में नहीं था, लेकिन केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड ने जो विवरण जारी किया, उससे उद्यमियों को झटका लगा क्योंकि इससे उनका ईंधन खर्च बढ़ गया है। अनब्रांडेड पेट्रोल पर सेनवेट 8.95 रुपये प्रति लीटर, स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (एसएईडी) 6 रुपये, एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (एईडी) 2 रुपये का शुल्क थी। बजट के बाद इस पर सेनवेट की दर प्रति लीटर घटा कर 5.46 रुपये कर दी गई। एसएईडी को तो 6 रुपये पर छोड़ दिया गया, लेकिन एईडी को बढ़ा कर 6 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया। पहले इन करों के ऊपर तीन फीसदी का शिक्षा उप कर लगता था, जो कि अब खत्म कर दिया गया है। कुल मिला कर देखें, तो पहले भी इस पर प्रति लीटर 17.46 रुपये का अप्रत्यक्ष कर था और अब भी यह 17.46 रुपये ही है।
इसी तरह अनब्रांडेड डीजल में पहले प्रति लीटर 7.96 रुपये का सेनवेट था, जिसे अब घटा कर 4.26 रुपये कर दिया गया है। इस पर एसएईडी पहले भी नहीं लगता था और अभी भी नहीं लगाया गया है। लेकिन अनब्रांडेड डीजल पर 2 रुपये प्रति लीटर का एईडी लगाया गया था, जिसे अब बढ़ा कर 6 रुपये प्रति लीटर हो गया है। डीजल पर लगने वाले अप्रत्यक्ष कर को देखें, तो यह पहले भी 10.26 रुपये प्रति लीटर था और अभी भी 10.26 रुपये प्रति लीटर ही है। इसमें भी पेट्रोल की तरह ही सेनवेट का हिस्सा घटा कर एईडी का हिस्सा बढ़ा दिया गया है।
उत्पाद एवं सीमा शुल्क विभाग के एक अधिकारी ने बताया किनए प्रावधान से उद्योग जगत को सेनवेट के रूप में कम रकम मिलेगी। उनके मुताबिक सेनवेट के मद में जो भी कर लिया जाता है, उसके बदले उद्यमी को सेनवेट क्रेडिट लेने की छूट होती है। जब साल का लेखा-जोखा बनता है तो सेनवेट के मद में जमा की गई राशि तो वापस मिल जाती है, लेकिन एक्साइज मद में जमा राशि नहीं मिलती है। अब सेनवेट घटा कर एक्साइज बढ़ाने से उद्यमियों को कम क्रेडिट मिलेगा।
मंझोले, लघु एवं सूक्ष्म उद्यमियों के संगठन फिस्मे के महासचिव अनिल भारद्वाज का कहना है कि इस प्रावधान से एमएसएमई की ईंधन की लागत बढ़ जाएगी। इससे उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर असर पड़ेगा। कुछ उद्यमियों को तो कीमत में भी बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है।