घर बैठे देखे कुम्भ मेला इस नए “कुंभाथन एप्लीकेशन” से

घर बैठे देखे कुम्भ मेला इस नए “कुंभाथन एप्लीकेशन” से

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नासिक। दुनियाभर में आस्था का केंद्र सिंहस्थ कुंभ नासिक में गोदावरी तट पर चल रहा है। करोड़ों लोग इस मेले में पवित्र डुबकी लगाने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से आ रहे हैं। इतनी भारी संख्या में लोगों के आने, उन्हें नियंत्रित करने, रोगों के प्रकोप से बचाने और उनकी सुरक्षा के लिए आधुनिकतम तकनीकों की मदद ली जा रही है। इस क्रम में एक अभिनव पहल करते हुए एक ऐसा एप्लीकेशन लांच किया गया जो पूरे मेले से जुड़ी हर जानकारी मुहैया कराएगा।

6 सप्ताह तक चलने वाले इतने बड़े मेले में करोड़ों लोगों की सुरक्षा और उन पर नजर रखने के लिए आधुनिक संसाधनों से लैस एक टीम गोदावरी नदी के तट पर डेरा डाले हुई है। मानवता के सबसे बड़े धार्मिक समारोहों में से एक कुंभ मेले में आ रहे लोगों की सुरक्षा और मेले में शांति बनाए रखने के लिए टीम ने डिजिटल इनफारमेशन प्लेटफॉर्म लांच किया है।
इस अभिनव पहल से करोड़ों लोगों को न सिर्फ सहूलियत हो रही, बल्कि मेला भी बिना किसी रुकावट के निर्बाध चल रहा है। गौरतलब है कि 12 वर्ष पहले इसी पर्व में भगदड़ मचने से दर्जनों लोगों की मौत हो गई थी।
मेसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी मीडिया लैब के एसोसिएट प्रोफेसर रमेश रस्कर ने बताया कि ऐसे मेले में करोड़ों लोगों की भीड़ को साइंटिफिक तरीके से नियंत्रित करने पर मंथन किया गया। इसी उद्देश्य से देशभर के उम्दा वैज्ञानिकों, समाजसेवियों और अधिकारियों की टीम ने दो वर्षों की अथक मेहनत के बाद च्कुंभाथनज् का इजाद किया, जिसकी मदद से भारी भीड़ का नियंत्रण और उसका प्रबंधन किया जा सकता है।

इसके लिए एक एंड्रॉयड एप्लीकेशन बनाया गया है, जिसे आसानी से नि:शुल्क डाउनलोड किया जा सकता है। इस एप्लीकेशन की मदद से मेले से संबंधित सभी जानकारियां, भोजन का इंतजाम, ट्रैफिक जाम, चिकित्सकीय सुविधा आदि के बारे में आसानी से जाना जा सकता है। यह पूरी जानकारी www.kumbha.org पर ऑनलाइन भी उपलब्ध है। इस एप्लीकेशन की सहायता से मेले में आने वालों को डेंगू, पीलिया समेत अन्य कई खतरनाक बीमारियों के प्रति जागरूक किया जाता है।

इस तकनीक के सहारे मेले में आने वाली भीड़ का अनुमान भी लगाया जा सकता है। साथ ही भीड़ को नियंत्रित करने और तितर-बितर करने के लिए अधिकारियों के लिए भी यह मददगार साबित हो रहा है।
जिला के अधिकारी रघुनाथ गावड़े ने बताया कि किसी एक स्थान पर भीड़ बढ़ने पर इसे नियंत्रित किया जाता है। हमने इसके लिए कई जोन बनाया है। च्कुंभाथनज् की टीम के रिसर्च में पता चला कि नहाने के लिए अधिकतर लोग दोपहर का समय चुनते हैं। शाही स्नान के दिन अधिकतर स्थानों पर जाम लगता है। सरकारी अधिकारियों ने च्कुंभाथनज् की टीम के आंकड़ों को काफी पसंद किया है।

भीड़ की संख्या का अनुमान लगाने के लिए नासिक के एक 15 वर्षीय लड़के ने बेहतरीन आविष्कार किया है। लगभग दो साल पहले कुंभाथनज् के बारे में सुनकर निलय कुलकामी 3 अन्य इंजीनियरों के साथ जुड़ गया और एक रबर का डोरमैट बना डाला। इसमें लोगों के पांव के निशान आ जाते हैं, जिससे लोगों की संख्या का अंदाजा लगाया जा सकता है। इससे जुटाए आंकड़े सरकारी अधिकारियों को भेज दिए जाते हैं। निलय कुलकामी ने बताया कि किसी गेम का प्रोग्राम बनाने से अच्छा है कि ऐसा आविष्कार किया जाए जो लोगों के काम आ सके।