एलआईसी में कार्यरत डीओ कामगार नहीं

एलआईसी में कार्यरत डीओ कामगार नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) में कार्यरत विकास अधिकारियों (डीओ) को औद्योगिक विवाद कानून के प्रावधानों के तहत कामगार की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता है। न्यायमूर्ति दीपक मिश्र और न्यायमूर्ति प्रफुल्ल सी. पंत की खंडपीठ ने इस संबंध में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराया है। हाईकोर्ट ने कहा था कि बीमा निगम के विकास अधिकारियों को कामगार नहीं माना जा सकता। शीर्ष अदालत ने कहा कि औद्योगिक विवाद कानून की धारा 2 (एस) के तहत जीवन बीमा निगम के विकास अधिकारी कामगार नहीं है और इसलिए उसे हाईकोर्ट के फैसले में कोई त्रुटि नजर नहीं आती कोर्ट जीवन बीमा निगम के कुछ विकास अफसरों की अपील पर सुनवाई कर रहा था। इन अधिकारियों ने हाईकोर्ट के फैसले का ेचुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने औद्योगिक न्यायाधिकरण के फैसले को उलट दिया था। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि विकास अधिकारियों को संबंधित कानून के तहत कामगार नहीं माना जा सकता है और इसलिए श्रमिक अदालत को इस विवाद की सुनवाई का अधिकार नहीं है। न्यायाधिकरण में बीमा निगम ने इस कार्यवाही की विचारणीयता पर सवाल उठाते हुए दलील दी थी कि विकास अधिकारियों को इस कानून के तहत कामगार की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता है। लेकिन न्यायाधिकरण ने विचारणीयता के मुद्दे को अस्वीकार करते हुए इस मामले में विकास अधिकारियों के पक्ष में फैसला सुनाया और निर्देश दिया था कि उन्हें वेतनमान में बहाल करने के साथ ही बकाया राशि का भुगतान किया जाए।